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इस जवान का नाम सुनते ही थर्राता है पाकिस्तान… एक जनरल, जिसने सिखाया जंग जीतने का नया तरीका!

जयपुर. राजस्थान की धरती ने कई वीर सपूत दिए हैं, लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह का नाम उन चुनिंदा योद्धाओं में आता है जिन्होंने सिर्फ युद्ध नहीं लड़े, बल्कि युद्ध जीतने के तरीके भी बदल दिए. 14 जुलाई 1919 को बीकानेर रियासत के चूरू क्षेत्र के कुसुमदेसर गांव में जन्मे सगत सिंह एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय सेना के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में शामिल हुए. उनके पिता बृजलाल सिंह राठौड़ खुद सेना में थे और प्रथम विश्व युद्ध में सेवा दे चुके थे, जिससे सगत सिंह को बचपन से ही सैन्य अनुशासन और देशसेवा की प्रेरणा मिली.

मेजर जनरल रणधीर सिंह ने अपनी किताब A Talent For War: The Military Biography of Lt Gen Sagat Singh में उन्हें स्वतंत्र भारत का अद्वितीय सैन्य मस्तिष्क बताया है. किताब के अनुसार, सगत सिंह ने बेहद साधारण शुरुआत से अपने करियर की शुरुआत की, उस समय उन्हें अंग्रेजी का सीमित ज्ञान था. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्हें अधिकारी के रूप में कमीशन मिला और उन्होंने मध्य पूर्व में सेवाएं दीं. युद्ध खत्म होने तक वे उन गिने-चुने अधिकारियों में थे जिन्होंने दो प्रतिष्ठित स्टाफ कोर्स पूरे किए, जिनमें क्वेटा का कोर्स भी शामिल था.

गोवा से सिक्किम तक, हर मोर्चे पर दिखाई रणनीतिक क्षमतास्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना में शामिल होने पर सगत सिंह को तीसरी गोरखा राइफल्स में भेजा गया, जहां उन्होंने दो बटालियनों की कमान संभाली. इसके बाद उन्हें पैरा ब्रिगेड की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने गोवा ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई, जिसके जरिए पुर्तगाली शासन का अंत हुआ. 1967 में सिक्किम में 17 माउंटेन डिवीजन की कमान संभालते हुए उन्होंने चीन के साथ हुए संघर्ष में भारतीय सेना को जीत दिलाई और यह साबित किया कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है.

मेघना हेलीब्रिज: एक ऐसा फैसला जिसने युद्ध की दिशा बदल दी1971 के भारत-पाक युद्ध में सगत सिंह की सबसे बड़ी पहचान बनी उनकी मेघना हेलीब्रिज रणनीति. उस समय उन्हें मेघना नदी पार न करने के आदेश मिले थे, लेकिन उन्होंने हालात को समझते हुए खुद निर्णय लिया कि नदी पार करना जरूरी है. 9 और 10 दिसंबर को भारतीय वायुसेना ने 409 उड़ानों के जरिए करीब 5 हजार सैनिकों और 51 टन सैन्य सामग्री को नदी के पार उतारा. यह ऑपरेशन पुराने एमआई-4 हेलिकॉप्टर्स से किया गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी.

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह

एक फैसले से टूटा पाकिस्तान का मनोबलसगत सिंह का मानना था कि अगर भारतीय सेना मेघना नदी पार कर लेती है, तो पाकिस्तान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा. उनका यह आकलन बिल्कुल सही साबित हुआ. भारतीय सेना की इस तेज और अप्रत्याशित कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना पूरी तरह चौंक गई और उसका मनोबल टूट गया. यही वह मोड़ था जिसने युद्ध को तेजी से भारत के पक्ष में झुका दिया.

13 दिन में जीत, दुनिया रह गई हैरान1971 का युद्ध सिर्फ 13 दिनों में खत्म हुआ, जो दुनिया के लिए चौंकाने वाला था. इस तेज जीत के पीछे सगत सिंह की रणनीति का बड़ा योगदान माना जाता है. मेघना हेलीब्रिज ने भारतीय सेना को तेजी से आगे बढ़ने का रास्ता दिया और ढाका तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई. यह रणनीति आज भी आधुनिक सैन्य इतिहास की सबसे नवाचारी योजनाओं में गिनी जाती है.

जोखिम उठाने का साहस, जो बना उनकी पहचानसगत सिंह की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह परंपरागत सोच से अलग जाकर फैसले लेने का साहस रखते थे. उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों से हटकर निर्णय लिए, लेकिन हर बार उनका फैसला सही साबित हुआ. उनके अंदर जीतने की एक अलग ही जिद थी, जो उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग बनाती थी.

एक योद्धा, जिसने सिखाया ‘जंग जीतने के लिए सोच बदलनी पड़ती है’लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह सिर्फ एक सैनिक नहीं थे, बल्कि एक ऐसे रणनीतिकार थे जिन्होंने यह दिखाया कि युद्ध सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि सोच और फैसलों से जीते जाते हैं. उन्होंने भारतीय सेना को यह सिखाया कि असंभव दिखने वाले हालात में भी अगर सही रणनीति अपनाई जाए, तो जीत हासिल की जा सकती है.

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