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शायरी मांग रहा था डायरेक्टर, ठुकराए फैज अनवर के 81 शेर, जिद्द में लिखा 82वां, जगजीत सिंह ने गाकर बना दिया अमर

Last Updated:April 24, 2026, 13:37 IST

कुछ गाने बनते नहीं, रचते हैं. साल 2001 में रिलीज फिल्म तुम बिन का गाना ‘कोई फरियाद’ आज 26 साल बाद भी उतना ही ताजा और दिल को छूने वाला है. जगजीत सिंह की आवाज में सिमटा यह 9 मिनट लंबा गीत आज भी दर्द और उदासी का सबसे खूबसूरत गवाह माना जाता है. लेकिन इस गाने को लिखने के लिए फैज अनवर को काफी मेहनत करनी पड़ी. क्या है इस गाने से जुड़ा ये किस्सा, चलिए बताते हैं…

नई दिल्ली. ‘कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे…’ यह गीत सुनते ही दिल के तार छू जाते हैं. साल 2001 में आई फिल्म ‘तुम बिन’ का यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसता है. लेकिन इस गीत के बनने की कहानी उतनी ही अद्भुत है, जितनी कि इसकी धुन और शब्द. जगजीत सिंह की मखमली आवाज में सजा यह गीत आज भी दर्द, मोहब्बत और इंतजार की सबसे खूबसूरत मिसाल माना जाता है.

आज इस गीत को गुजरे 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन गजल सम्राट जगजीत सिंह की आवाज और फैज अनवर के शब्दों का जादू आज भी वैसा ही अमर बना हुआ है. ‘तुम बिन’ के इस गीत ने अनुभव सिन्हा के निर्देशन की शुरुआत पर तो मुहर लगाई ही, साथ ही भारतीय सिनेमा में क्लासिक गजलों की श्रेणी में अपनी अलग पहचान बनाई. एक इंटरव्यू में डायरेक्टर ने इस गीत का किस्सा सुनाया था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

दरअसल, फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा चाहते थे कि ‘तुम बिन’ की कहानी में एक गजल को अहम भूमिका मिले. उन्होंने इसके लिए फैज अनवर से संपर्क किया, जो उस समय गीतकार नहीं, बल्कि एक शायर थे. अनुभव ने उन्हें पूरी फिल्म की कहानी और सीन समझा दिए और कहा कि इसपर एक गजल लिखो. फैज ने काम शुरू किया. वे बीच-बीच में फोन पर अनुभव को शेर सुनाते, लेकिन हर बार जवाब होता- ‘नहीं’. यह सिलसिला महीनों तक चला. एक-दो नहीं, बल्कि 81 बार अनुभव सिन्हा ने फैज के शेरों को ठुकरा दिया.

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फिल्म के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा चाहते थे कि इस गजल को फिल्म के मूड और कहानी के हिसाब से बिल्कुल परफेक्ट बनाया जाए. किसी भी गीतकार के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक हो सकती थी, लेकिन फैज अनवर ने हार नहीं मानी. लगातार रिजेक्शन के बावजूद उन्होंने अपनी कलम नहीं रोकी और आखिरकार 82वां शेर लिखा. फिर वह दिन आया. अनुभव किसी की शूटिंग पर थे कि अचानक फोन बजा. फैज ने कहा- ‘एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर, जिंदगी तेज बहुत तेज चली हो जैसे.’

यही वह शेर था, जिसने सब कुछ बदल दिया. इस बार अनुभव सिन्हा को वह बात मिल गई, जिसकी वह तलाश कर रहे थे. उन्होंने तुरंत कहा- ‘बस यही है.’ तब फैज ने मुस्कुराते हुए पूछा- ‘क्या आपको पता है कि यह 82वां शेर है? यानी आपने मेरे 81 शेर रिजेक्ट कर दिए थे.’ इस बात का खुलासा खुद अनुभव सिन्हा ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था. हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी. इसके बाद की बारी थी गजल सम्राट जगजीत सिंह की.

इसके बाद इस गजल को मॉडर्न टच देने की जिम्मेदारी संगीतकार जोड़ी निखिल-विनय ने संभाली. उन्होंने पारंपरिक गजल की रूह को बरकरार रखते हुए इसे एक ऐसे संगीत में ढाला, जो उस दौर के युवाओं से भी जुड़ सके. यही कारण है कि ‘कोई फरियाद’ क्लासिकल और मॉडर्न का बेहतरीन संगम बन गया. जब यह गीत जगजीत सिंह की आवाज में रिकॉर्ड हुआ, तो मानो उसमें जान आ गई. उनकी गायकी ने हर शब्द को एक नई गहराई दी, जिससे यह गाना सीधे दिल में उतरता चला गया.

जगजीत सिंह को जब यह गीत सुनाया गया तो वे खुद अपनी आवाज से संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने कई बार इसे दोबारा रिकॉर्ड किया और फिर भी मन नहीं भरा. गीत की लंबाई करीब 8.34 मिनट थी, जिसमें 12 मुखड़े और 13 अंतरे थे. खास बात यह रही कि इस गजल में किसी तबले का इस्तेमाल नहीं किया गया था. खास बात यह रही कि इस गजल में किसी तबले का इस्तेमाल नहीं किया गया था. रिलीज के बाद यह गीत तुरंत ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया और आज तक अपनी जगह बनाए हुए है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

फिल्म तुम बिन की सफलता में इस गाने का बड़ा योगदान माना जाता है. उस दौर में जब तेज-तर्रार और पॉप म्यूजिक का चलन बढ़ रहा था, तब ‘कोई फरियाद’ जैसी गजल का सुपरहिट होना अपने आप में एक बड़ी बात थी. यह गीत साबित करता है कि सच्ची भावनाएं और अच्छी शायरी कभी पुरानी नहीं होती. ‘कोई फरियाद’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि जिद, मेहनत और कला के प्रति समर्पण की मिसाल है. 81 बार रिजेक्ट होने के बाद भी हार न मानने का जज्बा ही इसे खास बनाता है. अगर उस समय फैज अनवर ने हार मान ली होती तो शायद हिंदी सिनेमा को यह अनमोल नगमा कभी नहीं मिल पाता. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

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April 24, 2026, 13:37 IST

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