Khatu Shyam Ji New Aarti Time 2026 | खाटूश्याम जी मंदिर आरती का नया समय

Last Updated:May 03, 2026, 10:23 IST
Khatu Shyam Mandir News: खाटूश्याम जी मंदिर कमेटी ने गर्मी और वैशाख शुक्ल पक्ष के कारण आरती के समय में बदलाव किया है. अब मंगला आरती सुबह 4:30 बजे, श्रृंगार आरती सुबह 7:00 बजे, भोग आरती दोपहर 12:30 बजे, संध्या आरती शाम 7:00 बजे और शयन आरती रात 10:00 बजे होगी. मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नई समय-सारणी के अनुसार ही मंदिर पहुँचें. बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार और ‘हारे का सहारा’ माना जाता है.
ख़बरें फटाफट
KhatuShyam ji: राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक जरूरी सूचना है. मंदिर प्रशासन ने बाबा श्याम की दैनिक आरतियों के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. गर्मी के बढ़ते प्रभाव और वैशाख शुक्ल पक्ष की शुरुआत को देखते हुए, श्री श्याम मंदिर कमेटी ने नई समय-सारणी जारी की है. मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, भक्तों की सुविधा और ऋतु परिवर्तन के धार्मिक नियमों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
नई व्यवस्था के तहत, मंदिर की सबसे पहली और महत्वपूर्ण ‘मंगला आरती’ अब सुबह 4:30 बजे संपन्न होगी. सर्दियों के दौरान यह आरती सुबह 5:30 बजे होती थी. वहीं, बाबा श्याम के अद्भुत रूप के दर्शन कराने वाली ‘श्रृंगार आरती’ के समय में भी बदलाव किया गया है. अब श्रद्धालु सुबह 7:00 बजे बाबा के विशेष श्रृंगार वाली आरती में शामिल हो सकेंगे, जो पहले सुबह 7:30 बजे आयोजित की जाती थी.
दोपहर और शाम की आरतियों का शेड्यूलदोपहर की ‘भोग आरती’ अपने पूर्व निर्धारित समय यानी दोपहर 12:30 बजे ही होगी, जिसमें बाबा को विशेष छप्पन भोग और पकवान अर्पित किए जाते हैं. शाम के समय होने वाली ‘संध्या आरती’ अब शाम 7:00 बजे की जाएगी. दिन की अंतिम आरती, जिसे ‘शयन आरती’ कहा जाता है, रात 10:00 बजे होगी. शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट विश्राम के लिए बंद कर दिए जाते हैं. मंदिर कमेटी ने अपील की है कि दूर-दराज से आने वाले भक्त इसी नई समय-सारणी के अनुसार अपनी यात्रा और दर्शन का समय तय करें.
हारे के सहारे: बर्बरीक से बाबा श्याम तक की कथाखाटूश्याम जी को कलियुग में ‘हारे का सहारा’ माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हैं. महाभारत युद्ध के समय जब बर्बरीक ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी दानवीरता की परीक्षा लेते हुए उनसे उनका शीश मांग लिया. बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे. आज देश-दुनिया से लोग अपनी अर्जी लेकर बाबा के दरबार में पहुँचते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Sikar,Sikar,Rajasthan



