Rajasthan

प्रेमिका के लिए प्रेमी बना हत्यारा, पार कर दी सभी हदें, ओवर कॉन्फिडेंस से फंसा कानून के शिकंजे में

Last Updated:May 06, 2026, 11:33 IST

Chittorgarh News : चित्तौड़गढ़ कोर्ट ने हत्या के साढ़े तीन साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कातिल और उसके सहयोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कातिल ने यह मर्डर अपनी प्रेमिका के लिए किया था. कत्ल प्रेमिका के भाई का किया गया था. प्रेमिका ने ही अपने भाई को मौत के घाट उतारने के लिए प्रेमी के साथ भेज दिया था. कातिल ने मर्डर करने के बाद सबूत छिपाने के लिए शव को कुंए में फेंक दिया था. जानें पूरी कहानी. खौफनाक मर्डर केस : प्रेमिका के लिए प्रेमी बना हत्यारा, पार कर दी सभी हदें Zoomचित्तौड़गढ़ पुलिस की गिरफ्त में कातिल प्रेमी, उसका दोस्त और प्रेमिका.

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार थाना इलाके में साल 2022 में प्रेम प्रसंग फेर में हुए सनसनीखेज मर्डर केस में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. यहां एक प्रेमी ने प्यार में दीवार बन रहे प्रेमिका के भाई को मौत के घाट उतार कर उसकी लाश को कुंए में फेंक दिया था. इस वारदात में उसका एक साथी भी शामिल था. कोर्ट ने कातिल और उसके साथी को हत्या का दोषी करार देते हुए उनको उम्रभर के लिए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है. इस मर्डर केस में शामिल रही कातिल की प्रेमिका को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. इस केस में कातिल अपने ओवर काॅन्फिडेंस के चक्कर में पुलिस की गिरफ्त में आ गया. यह केस चित्तौड़गढ़ में खासा चर्चा में रहा था.

अपर लोक अभियोजक ममता जीनगर ने बताया कि दिल को दहला देने वाली कत्ल की यह वारदात 16 नवंबर 2022 को हुई थी. इसका पता 5 दिसंबर 2022 को चला था. 22 दिसंबर को गंगरार स्थित किले की पहाड़ी पर हनुमान मंदिर के पीछे स्थित कुंए में एक अज्ञात युवक का सिर कटा हुआ धड़ मिला था. उसके हाथ पैर बिजली के तार से बंधे हुए थे. तलाशी के दौरान कुएं से ही कटा हुआ सिर भी मिल गया था. बाद में मृतक की पहचान महेन्द्र रायका (23) के रूप में हुई. वह मध्य प्रदेश के मंदसौर के ऐरिया थाना इलाके के गरोठ का रहने वाला था. वारदात के समय वह अपने मामा शांतिलाल रायका के पास भाटखेड़ा गंगरार में रह रहा था.

प्यार के बीच रोड़ा बन गया था भाईपुलिस ने मृतक के मामा की रिपोर्ट पर हत्या का केस दर्ज किया. पुलिस ने जब केस की जांच की तो उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में सामने आया कि महेन्द्र की बहन तनिष्का उर्फ तनु का महावीर धोबी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. तनु महावीर के साथ जाना चाहती थी. लेकिन भाई महेन्द्र इसका विरोध कर रहा था. वह अपनी बहन का विवाह अपनी ही बिरादरी में कराना चाहता था. इसी विरोध के कारण तनु बहन और उसके प्रेमी महावीर धोबी ने मिलकर महेन्द्र को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

गमछे से गला घोंटकर मारा थावारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने फिल्मी पटकथा की तरह योजना बनाई. इसके तहत 16 नवंबर 2022 को तनु ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत भाई महेन्द्र को फोन कर गंगरार चौराहे पर बुलाया. महावीर धोबी और उसका साथी महेन्द्र धोबी महेन्द्र को अपनी वैन में बिठाकर किले के पास ले गए. वहां उन्होंने पहले साथ बैठकर गांजा पिया. बाद में नशे की हालत में महावीर ने सारणेश्वर मंदिर के पास सुनसान जगह पर गमछे से महेन्द्र का गला घोंट दिया. सबूत मिटाने के लिए शव के हाथ-पैर बिजली के तार से बांधकर रात के अंधेरे में किले के कुएं में फेंक दिया. लेकिन कुंए में लगे एंगल से टकरा उसका सिर धड़ से अलग हो गया.

अति-आत्मविश्वास से फंस गया कातिलवारदात के बाद आरोपी महावीर ने पुलिस को गुमराह करने का पूरा प्रयास किया. महावीर खुद पुलिस के साथ रहकर जांच में सहयोग करने का नाटक करता रहा. पुलिस जब कुएं से लाश निकाल रही थी उस समय वह टॉर्च की रोशनी में मृतक के हाथ पर लिखा नाम पढ़ने की कोशिश कर रही थी. उसी दौरान महावीर ने हड़बड़ी में खुद ही मृतक का नाम बोल दिया. इस पर पुलिस को शंका हुई कि बिना चेहरा देखे महावीर ने मृतक का नाम कैसे जान लिया? बस उसकी यह हड़बड़ी उसकी गिरफ्तारी का कारण बन गई. पुलिस ने जब महावीर से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने फिर इस मामले में महावीर धोबी और साजिश में शामिल रहे महेन्द्र धोबी तथा मृतक की बहन तनु को गिरफ्तार कर लिया. इनके साथ ही एक नाबालिग को भी संदेह के आधार पर निरुद्ध किया गया था.

70-70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गयापुलिस ने जांच पड़ताल के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी. कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने हत्या के इस केस को साबित करने के लिए 33 गवाह और 96 दस्तावेजी सबूत पेश किए. सुनवाई के बाद अपर सेशन न्यायाधीश संख्या (2) के जज विनोद कुमार बैरवा ने महावीर धोबी और महेन्द्र धोबी दोनों को साजिश, हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया. कोर्ट ने उनको आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना) और 120बी (षड्यंत्र) के तहत आजीवन कारावास और 70-70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. कोर्ट ने सबूतों के मृतक की बहन तनु को बरी कर दिया. कोर्ट ने मृतक के विधिक उत्तराधिकारियों को सरकार की ओर से उचित पीड़ित प्रतिकर राशि दिलाने के भी आदेश दिए हैं.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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