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कौन हैं तगाराम भील? जिन्हें मिलेगा पद्मश्री, बकरियां चराने से लेकर थार के लोकसंगीत को दिलाई वैश्विक पहचान

Last Updated:May 17, 2026, 18:34 IST

Folk Singer Tagaram Bhil: थार की रेत से उठी अल्गोजा की धुनों को वैश्विक पहचान दिलाने वाले सुप्रसिद्ध लोक कलाकार तगाराम भील को पद्म श्री सम्मान मिलेगा. जैसलमेर के मूलसागर गांव में जन्मे तगाराम ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकसंगीत की साधना जारी रखी और अपनी कला से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान बनाई. उन्होंने राजस्थानी लोकगीतों, मांड गायकी और रेगिस्तानी संस्कृति को दुनिया भर में पहुंचाया. तगाराम भील आज नई पीढ़ी को भी लोक वाद्य और लोकधुनों की शिक्षा देकर इस विरासत को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं.

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कौन हैं तगाराम भील? बकरियां चराने से लेकर पद्म श्री तक का तय किया सफरZoomअल्गोजा की धुनों से दुनिया में पहचान बनाने वाले लोक कलाकार तगाराम भील को मिलेगा पद्म श्री सम्मान

जैसलमेर. राजस्थान की थार नगरी की मिट्टी में बसे लोकसंगीत को अपनी अनूठी अल्गोजा धुनों से दुनिया तक पहुंचाने वाले सुप्रसिद्ध लोक कलाकार श्री तगाराम भील को पद्म श्री सम्मान से नवाजा जाएगा. यह सम्मान न केवल तगाराम भील की दशकों की साधना का परिणाम है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति और मरुधरा के पारंपरिक संगीत को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है.

तगाराम भील का जन्म राजस्थान के जैसलमेर से 10 किलोमीटर दूर मूलसागर गांव के एक साधारण परिवार में हुआ था. तगाराम भील का जीवन संघर्षों की मिसाल है. उनके पिता मनोरंजन के लिए अल्गोजा बजाते थे. आर्थिक तंगी के कारण बचपन में उन्हें बकरियां चराने भेजा जाता था, जबकि पिता ऊंट पर लकड़ी बेचकर परिवार चलाते थे. चोरी-छिपे पिता का अल्गोजा लेकर जंगल में घंटों अभ्यास करने वाले तगाराम मात्र 15 वर्ष की आयु में इस वाद्य यंत्र के माहिर वादक बन गए. अल्गोजा, जिसे रेगिस्तान की आत्मा कहा जाता है, उनकी पहचान बन गया.

1981 में पहली बार अल्गोजा बजाने का मौका मिला था

वर्ष 1981 में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पहली बार मंच पर अल्गोजा बजाने का मौका मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. तगाराम भील ने अल्गोजा की अनूठी धुनों से 35 से अधिक देशों में राजस्थान का नाम रोशन किया. आज उनकी साधना और समर्पण का फल मिल रहा है. पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा रहे तगाराम भील राजस्थान की लोक कला और संस्कृति के सच्चे साधक हैं. अल्गोजा दो बांसुरियों से मिलकर बना एक पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र है, जिसे बजाना बेहद कठिन माना जाता है. तगाराम भील ने अपनी मेहनत और अभ्यास से इस कला में ऐसी महारत हासिल की कि उनकी धुनें देश ही नहीं, विदेशों तक गूंजने लगीं.

Taga Ram Bheel, renowned maestro of the Algoza, will be honoured with the Padma Shri for his exceptional contribution to preserving and promoting the traditional folk music of the Thar Desert.

— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) May 17, 2026

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