Rajasthan

हिल स्टेशन माउंट आबू घूमने का बना रहे हैं प्लान? इन 5 मंदिरों के दर्शन करना ना भूलें, जुड़ी है रहस्यमयी मान्यताएं

Last Updated:May 08, 2026, 16:21 IST

Mount Abu Religious Tourist Place: इस गर्मियों की छुट्टियों में अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में आप कम बजट में घूम सकते हैं. वैसे तो यहां कई दर्शनीय स्थल पर्यटकों के लिए बने हुए हैं, लेकिन आज हम आपके यहां के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो स्थानीय भक्तों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं. गुरुशिखर पर दत्तात्रेय और अनुसूया का प्राचीन मंदिर स्थित है, यहां गुफा मंदिर और धुना भी है. यह स्थान आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करता है.

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की लेक के किनारे स्थित सर्वेश्वर रघुनाथ मंदिर आस्था और इतिहास का अनूठा संगम माना जाता है. यह प्राचीन मंदिर भगवान राम को समर्पित है, जहां उनकी बाल स्वरूप में अकेली प्रतिमा विराजमान है, जो इसे अन्य राम मंदिरों से अलग बनाती है. आमतौर पर राम मंदिरों में भगवान राम सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ दिखाई देते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने इसी पवित्र स्थान पर गुरु वशिष्ठ से शिक्षा प्राप्त की थी. यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है.

गुरुशिखर अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित एक पवित्र तीर्थ स्थल है. यह स्थान समुद्र तल से 1722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. यहां भगवान दत्तात्रेय और माता अनुसूया का प्राचीन मंदिर स्थित है. दत्तात्रेय मंदिर एक गुफा में बना हुआ है जहां उनका धुना भी स्थित है. यह स्थान भक्तों और पर्यटकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है. यहां आने वाले लोग शांति और आस्था का गहरा अनुभव प्राप्त करते हैं.

यह मंदिर माउंट आबू शहर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए लगभग 150 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. दिन का समय इस स्थान की यात्रा के लिए उपयुक्त माना जाता है. रात के समय मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती हैश, क्योंकि आस-पास वन्यजीव क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है. यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है और यहां प्राकृतिक दृश्य बहुत ही मनमोहक दिखाई देते हैं तथा वातावरण शांत और पवित्र महसूस होता है लगता है.

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माउंट आबू से करीब 5 किलोमीटर दूर अचलगढ में बना प्राचीन अचलेश्वर महादेव मंदिर देश के कुछ अनोखे शिव मंदिरों में से एक हैं. ये एक मात्र ऐसा मंदिर हैं, जहां भगवान शिव की शिवलिंग स्वरूप के बजाय उनके पैर के अंगूठे की पूजा होती हैं. मान्यता है कि भगवान शिव ने माउंट आबू की पहाड़ियों को अपने पैर के अंगूठे पर टिका रखा है. भक्त मंदिर में शिवलिंग के स्थान पर बनी गहरी खाई में जल चढ़ाते हैं. यहां कितना भी जल चढ़ाया जाए, ये खाई कभी भरती नहीं है.

माउंट आबू का प्रसिद्ध शक्तिपीठ अधर देवी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां मां कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है. मान्यता है कि इस स्थान पर मां सती के होंठ गिरे थे. इसी कारण इसे अधर देवी मंदिर कहा जाता है. अधर देवी को राजपूत परमार समेत कई समाजों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है और यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं. प्राकृतिक वातावरण भी बहुत मनोहारी है. यह स्थान माउंट आबू की धार्मिक पहचान भी दर्शाता है.

अधर देवी मंदिर माउंट आबू की पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन गुफा मंदिर है. यहां पहुंचने के लिए लगभग 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मंदिर में मां की चरण पादुकाओं की पूजा की जाती है. मान्यता है कि यह शक्तिपीठ अत्यंत चमत्कारी है और हर वर्ष नवरात्रि के दौरान यहां देशट्विरैदेश से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं. स्थानीय लोग इस मंदिर को अर्बुदा देवी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह स्थान धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है. यहां का वातावरण अत्यंत शांत और पवित्र महसूस होता है और भक्तों की श्रद्धा रहती है.

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