लकड़ी के कूलर से आती मछली जैसी बदबू से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से मिनटों में कमरा हो जाएगा फ्रेश

Last Updated:May 10, 2026, 19:59 IST
How to Remove Smell from Cooler: भीलवाड़ा में आज भी पारंपरिक लकड़ी के कूलर लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. इन्हें ज्यादा ठंडी और प्राकृतिक हवा देने वाला माना जाता है. हालांकि गर्मियों में कूलर से आने वाली बदबू लोगों को परेशान कर देती है. विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह टैंक में जमा पुराना पानी, गंदे पैड्स और बैक्टीरिया होते हैं. नियमित सफाई, पानी बदलने और पैड्स धोने से इस समस्या से बचा जा सकता है. वहीं विनेगर, नीम की पत्तियां और कूलर फ्रेशनर जैसे घरेलू उपाय भी बदबू कम करने में मददगार साबित होते हैं.
भीलवाड़ा में आज भी पारंपरिक लकड़ी के कूलर लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. जहां देश के कई हिस्सों में लोहे और प्लास्टिक के कूलर ज्यादा इस्तेमाल होते हैं, वहीं भीलवाड़ा में लकड़ी के कूलरों का चलन खास माना जाता है. लोग मानते हैं कि लकड़ी के कूलर ज्यादा ठंडी और प्राकृतिक हवा देते हैं. हालांकि गर्मियों में कई बार कूलर से बदबू आने की समस्या भी होती है. इसकी मुख्य वजह टैंक में लंबे समय तक जमा पुराना पानी होता है, जिसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं. इससे दुर्गंध पूरे कमरे में फैल जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार कूलर का पानी नियमित बदलने और टैंक की सफाई करने से हवा ठंडी और ताजा बनी रहती है.
भीषण गर्मी के इस दौर में कूलर आम लोगों के लिए राहत का सबसे सस्ता और आसान साधन बन जाता है. भीलवाड़ा की बात करें तो यहां लकड़ी के कूलर सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं और इनका उपयोग भी सबसे अधिक होता है. लेकिन कई बार कूलर की हवा के साथ आने वाली अजीब बदबू पूरे आराम का मजा खराब कर देती है. खासकर मछली जैसी स्मेल लोगों को बेहद परेशान करती है, जिससे कमरे में बैठना तक मुश्किल हो जाता है. कई लोग इसे कूलर की खराबी समझ लेते हैं, जबकि असल में यह एक सामान्य समस्या होती है, जो साफ-सफाई की कमी के कारण पैदा होती है. अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो इस बदबू से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है और कूलर की हवा को फिर से ताजा बनाया जा सकता है.
कूलर के पैड्स यानी घास भी बदबू की समस्या की बड़ी वजह बन सकते हैं. लगातार गीले और सूखे रहने के कारण इनमें धूल, मिट्टी, काई और बैक्टीरिया जमा होने लगते हैं, जिससे कूलर की हवा में दुर्गंध आने लगती है. कई बार यह बदबू इतनी तेज हो जाती है कि कमरे में बैठना मुश्किल हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि कूलर के पैड्स की समय-समय पर अच्छी तरह सफाई की जाए. पैड्स को साफ पानी से धोने और उनमें जमी गंदगी हटाने से काफी राहत मिलती है. अगर पैड्स ज्यादा पुराने और खराब हो चुके हों, तो उन्हें बदल देना बेहतर रहता है. वहीं तुरंत नए पैड्स उपलब्ध नहीं हों, तो इन्हें तेज धूप में सुखाने से बैक्टीरिया कम होते हैं और बदबू काफी हद तक दूर हो जाती है.
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भीलवाड़ा की बात करें तो यहां आज भी लकड़ी के कूलर लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. जहां देश के कई हिस्सों में लोहे और प्लास्टिक के कूलर ज्यादा प्रचलन में हैं, वहीं भीलवाड़ा में पारंपरिक लकड़ी के कूलरों का इस्तेमाल सबसे अधिक देखने को मिलता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि लकड़ी के कूलर ज्यादा ठंडी और प्राकृतिक हवा देते हैं. साथ ही इनमें हवा का नैचुरल फ्लो बेहतर रहता है, जिससे गर्मी में अधिक राहत महसूस होती है. यही कारण है कि भीषण गर्मी के मौसम में भी यहां लकड़ी के कूलरों की मांग बनी रहती है. हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि इन कूलरों की नियमित साफ-सफाई और देखभाल बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही होने पर इनमें भी जल्दी बदबू और गंदगी की समस्या पैदा हो सकती है.
आजकल बाजार में कूलर के लिए खास तरह के परफ्यूम और फ्रेशनर उपलब्ध हैं, जो अलग-अलग खुशबू के साथ आते हैं. इन्हें कूलर के पानी में मिलाने पर कमरे में ताजगी बनी रहती है और बदबू काफी हद तक कम हो जाती है. कई लोग घरेलू उपाय के तौर पर नींबू या संतरे के छिलकों और नीम की पत्तियों का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे हल्की प्राकृतिक खुशबू मिलती है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपाय केवल बदबू को कुछ समय के लिए दबाते हैं, लेकिन समस्या की जड़ खत्म नहीं करते. अगर कूलर की नियमित सफाई नहीं की जाए, तो बैक्टीरिया और गंदगी फिर से दुर्गंध पैदा कर सकते हैं. इसलिए टैंक, पैड्स और पानी की समय-समय पर सफाई करना बेहद जरूरी माना जाता है.
कूलर की बदबू दूर करने का एक बेहद आसान और सस्ता तरीका है पानी में थोड़ा सा सफेद सिरका यानी विनेगर मिलाना. विनेगर एक नेचुरल डियोडराइजर की तरह काम करता है, जो बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है. आमतौर पर एक बाल्टी पानी में एक से दो चम्मच विनेगर डालना काफी होता है. इससे टैंक में जमा गंध न्यूट्रल हो जाती है और कूलर से आने वाली हवा ताजा महसूस होती है. बेहतर परिणाम के लिए पहले टैंक को अच्छी तरह साफ करना और उसके बाद विनेगर मिला पानी डालना ज्यादा असरदार माना जाता है.
कूलर में कभी भी डिटर्जेंट या तेज केमिकल पाउडर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इससे कूलर के पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है और मोटर पर भी असर पड़ सकता है. साथ ही हवा के साथ केमिकल के कण भी कमरे में फैल सकते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. कुल मिलाकर कूलर की बदबू कोई बड़ी समस्या नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा होती है. सही समय पर सफाई करना, पानी नियमित बदलना और छोटे-छोटे घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है. इससे गर्मी के मौसम में कूलर से आने वाली ठंडी और ताजा हवा का सुकून भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है.
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