जगन गुर्जर का भाई लालसिंह गुर्जर को मिली 15 दिन की पैरोल, जेल से आया बाहर

Last Updated:July 04, 2026, 20:39 IST
Jagan Gurjar Murder Case: धौलपुर से एक अहम घटनाक्रम सामने आया है. कुख्यात डकैत जगन गुर्जर के बड़े भाई लालसिंह गुर्जर को 15 दिनों की आकस्मिक पैरोल मंजूर की गई है. लालसिंह फिलहाल धौलपुर जेल में बंद था. हाल ही में जगन गुर्जर की हत्या के बाद उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लालसिंह को पुलिस सुरक्षा के बीच जेल से लाया गया था. अब प्रशासन ने उसे निर्धारित नियमों के तहत 15 दिनों के लिए पैरोल पर रिहा करने की अनुमति दी है. पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद लालसिंह गुर्जर को पुनः धौलपुर जेल में निर्धारित समय पर आत्मसमर्पण करना होगा. इस घटनाक्रम पर पुलिस और प्रशासन की नजर बनी हुई है तथा पैरोल की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
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जगन गुर्जर का भाई लालसिंह गुर्जर को मिली 15 दिन की पैरोल
अजमेर. कुख्यात डकैत जगन गुर्जर हत्याकांड मामले में पुलिस अनुसंधान में रोज़ नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. अजमेर की हाईसिक्योरिटी जेल में हुई इस हत्या के मामले में मुख्य आरोपी विष्णु जाट को सिविल लाइन थाना पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्थानीय न्यायालय में पेश किया. न्यायालय की कार्यवाही के बाद, कोर्ट के आदेश पर आरोपी को पुनः बख्तरबंद गाड़ी में कड़ी निगरानी के बीच जेल भेज दिया गया.
सिविल लाइन थाना अधिकारी शंभू सिंह शेखावत ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि हत्या की मुख्य वजह जगन गुर्जर का अहंकार और विष्णु जाट को कमतर आंकना था. दरअसल, आरोपी विष्णु जाट के खिलाफ अधिकांश मुकदमे चोरी के दर्ज हैं. इसी बात का फायदा उठाकर जगन गुर्जर जेल में अन्य बंदियों के सामने खुद को ‘बड़ा डकैत’ बताते हुए विष्णु को मामूली चोर कहता था और उस पर लगातार फब्तियां कसता रहता था. जगन द्वारा बार-बार किए जाने वाले इस अपमान और मानसिक प्रताड़ना से विष्णु बेहद आहत था. इसी प्रतिशोध की आग में उसने जगन को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली.
टूथपेस्ट और एफएम रेडियो की आड़ में वारदात को दिया अंजामपुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी विष्णु ने वारदात को बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया. हत्या करने से पहले उसने बैरक के कमरे (लोहे की जाली/दरवाजे) पर टूथपेस्ट लगा दिया, ताकि बाहर से कोई आसानी से अंदर न देख सके. वारदात के वक्त जेल में एफएम रेडियो चल रहा था, जिसकी आवाज की आड़ में आरोपी ने जगन गुर्जर का गमछे से गला घोंट दिया. शोर न हो पाने के कारण किसी को कानों-कान भनक नहीं लगी. थाना अधिकारी के अनुसार, घटना के वक्त सेल में बंद अन्य कैदियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिसके लिए न्यायालय को प्रार्थना पत्र लिखकर उनसे पूछताछ की अनुमति मांगी गई है.
धौलपुर जेल से 15 दिन की पैरोल पर बाहर लालसिंहवहीं दूसरी तरफ जगन गुर्जर की मौत के बाद उसके बड़े भाई लालसिंह गुर्जर को 15 दिनों की इमरजेंसी पैरोल मंजूर की गई है. लालसिंह गुर्जर वर्तमान में धौलपुर जेल में सजा काट रहा था. इससे पहले, जगन गुर्जर की हत्या के ठीक बाद उसकी दाह संस्कार में शामिल होने के लिए लालसिंह को भारी पुलिस कस्टडी में लाया गया था. अब उसे नियमानुसार 15 दिनों के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिल गई है. पैरोल की यह अवधि समाप्त होते ही लालसिंह को दोबारा धौलपुर जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करना होगा.
About the AuthorJagriti Dubey
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