राजस्थान की इस गली से निकलती हैं लाखों में बिकने वाली कोटा डोरिया साड़ियां, तस्वीरें देखकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:July 04, 2026, 22:29 IST
Kota Doria Saree: कोटा शहर की ऐतिहासिक भैरव गली को कोटा डोरिया साड़ियों का सबसे बड़ा और पारंपरिक केंद्र माना जाता है. वर्षों से यहां कारीगर हाथकरघों पर महीन बुनाई के जरिए ऐसी साड़ियां तैयार कर रहे हैं, जिनकी पहचान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक है. कोटा डोरिया की खासियत इसकी हल्की बनावट, पारदर्शी कपड़ा, चौकोर ‘खाट’ डिजाइन और उत्कृष्ट हस्तकला है. विशेष डिजाइन, महीन बुनाई और हाथ से तैयार होने के कारण कई प्रीमियम कोटा डोरिया साड़ियां लाखों रुपये तक की कीमत में भी बिकती हैं. भैरव गली आज भी राजस्थान की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा को जीवंत बनाए हुए है. यहां आने वाले पर्यटक बुनाई की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखते हैं और पारंपरिक कला की इस विरासत से रूबरू होते हैं.
इस तस्वीर में देखिए कोटा का मशहूर रामपुरा इलाका, जहाँ स्थित है बेहद लोकप्रिय ‘भैरव गली’. रियासत कालीन (स्टेट के जमाने) समय से यहाँ भगवान भैरवनाथ का एक प्राचीन मंदिर स्थापित है, जिसके नाम पर इस गली की पहचान बनी. इतिहास के पन्नों से सफर शुरू करके आज यह गली कोटा डोरिया के सबसे बड़े और प्रमुख मार्केट के रूप में तब्दील हो चुकी है, जहाँ कदम रखते ही आपको कोटा की विरासत का अहसास होगा.
कोटा डोरिया का वो रॉयल लुक, जो इसे सबसे खास बनाता है. इस कला के दीवानों में सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि देश की नामचीन महिला राजनेता और बड़ी-बड़ी प्रोफेशनल महिला अधिकारी (ऑफिसर्स) भी शामिल हैं. अपनी इसी जबरदस्त डिमांड, शुद्धता और बुनाई की बारीकी के कारण, इन खास साड़ियों की कीमत हजारों से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंच जाती है.
यह बाजार ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार रहता है. पिछले 60-70 सालों से संचालित हो रहे इस रामपुरा बाजार में शुरुआती दौर में महज गिने-चुने काउंटर थे. लेकिन आज जैसे ही ‘कोटा डोरिया’ का नाम वैश्विक स्तर पर चमका, यहाँ दुकानों की संख्या बढ़कर 60 से भी ज्यादा हो गई है. यहाँ दूर-दूर से सैलानी और खरीदार सिर्फ इस खास कपड़े की खरीदारी करने कोटा पहुंचते हैं.
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रामपुरा बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ पारंपरिक साड़ियाँ चाहने वाली महिलाओं और ट्रेंडी सूट पसंद करने वाली लड़कियों, दोनों की पसंद का खास ख्याल रखा जाता है. यहाँ ग्राहकों को जरी, गोटा-पत्ती, रेशम, थ्रेडवर्क, प्रिंटेड, जरी टिशु और लीलन टिशु (leelan tissue) जैसी दर्जनों वैरायटी एक ही जगह पर देखने को मिल जाती हैं.
तस्वीर में कपड़े के टेक्सचर को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना झीना और बारीक है. कोटा डोरिया के कपड़ों की सबसे यूनीक बात इनका बेहद कम वजन (lightweight) होना है. वजन में काफी हल्की होने के कारण महिलाएँ इन्हें हर मौसम में पहनना पसंद करती हैं. आराम और रॉयल्टी का यह बेहतरीन कॉम्बिनेशन ही इस मार्केट में कोटा डोरिया की बंपर बिक्री की सबसे बड़ी वजह है.
स्थानीय व्यापारी शंकर बताते हैं कि बाजार के हर दुकानदार के पास कोटा डोरिया की अपनी एक अलग और अनूठी वैरायटी है. यहाँ बदलते समय के साथ फैशन और डिजाइनों में लगातार बदलाव आता रहता है. खास बात यह है कि यहाँ की कोई डिजाइन अगर एक बार बिक जाए, तो हुबहू वैसी ही डिजाइन दोबारा मिलना नामुमकिन माना जाता है.
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