Rajasthan

सीकर में बारिश के बाद नानी बीड़ से NH-52 तक फैला गंदा पानी, राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें, किसानों की फसल खतरे में

Last Updated:July 06, 2026, 23:03 IST

सीकर में बारिश शुरू होते ही नानी बीड़ क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या फिर गंभीर हो गई है. कच्चे बांध से पानी छोड़े जाने के बाद NH-52 पर नानी चौराहे से भढ़ाढर तिराहे तक कई किलोमीटर में जलभराव हो गया, जिससे सड़क तालाब जैसी बन गई है. वाहनों के फंसने, दोपहिया चालकों के फिसलने और किसानों के खेतों में गंदा पानी पहुंचने से फसलें खराब होने का खतरा बढ़ गया है. हर साल दोहराई जाने वाली इस समस्या से स्थानीय लोग परेशान हैं, हालांकि 50 करोड़ की एसटीपी परियोजना के जरिए स्थायी समाधान की योजना पर काम शुरू हो चुका है.

सीकर. एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होते ही सीकर शहर के नानी बीड़ क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है. बारिश के मौसम में कच्चे बांध से पानी छोड़े जाने के बाद जयपुर-बीकानेर बाइपास स्थित एनएच-52 पर नानी चौराहे से भढ़ाढर तिराहे तक कई किलोमीटर लंबे हिस्से में जलभराव हो गया है. हर साल की तरह इस बार भी सड़क कई जगह तालाब में तब्दील होना शुरू हो गई है. इससे वाहन चालकों, राहगीरों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं गंदा पानी खेतों में पहुंचने से फसलों को भी नुकसान हो रहा है.

जलभराव के कारण एनएच-52 पर कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो रहे है, जबकि दोपहिया वाहन चालक कीचड़ में फिसलकर घायल होने की संभावना बढ़ गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया. किसानों के लिए खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और पैदल निकलना भी चुनौती बन गया है.

भढ़ाढर तिराहे तक पहुंचा गंदा पानीनानी बीड़ से निकला गंदा पानी सालासर रोड होते हुए करीब पांच किलोमीटर दूर भढ़ाढर तिराहे तक पहुंच गया है. तिराहे पर कई दुकानों के सामने पानी भरने से व्यापार प्रभावित होना शुरू हो गया है. लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो बारिश बढ़ने के साथ हालात और गंभीर हो सकते हैं. नानी बीड़ स्थित बांध में शहर का गंदा पानी एकत्रित होता है. बांध ओवरफ्लो होने पर अतिरिक्त पानी कच्चे बांधों के जरिए बाहर निकाला जाता है, जो सीधे एनएच-52 और आसपास के खेतों में पहुंच जाता है. कई बार मिट्टी के बांध टूटने से स्थिति और खराब हो जाती है. किसानों का कहना है कि हर बार फसलें खराब होती हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया.

50 करोड़ की परियोजना से मिलेगी राहतगंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए 50 करोड़ रुपए की परियोजना पर काम शुरू हो चुका है. हाल ही में यूडीएच मंत्री ने इसका शिलान्यास किया था और अब वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका है. योजना के तहत प्रतिदिन 20 एमएलडी गंदे पानी का शोधन कर उसका पुन: उपयोग किया जाएगा. शुद्ध पानी किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे करीब 10 हजार लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. जानकारी के अनुसार, नगर परिषद ने इस परियोजना का प्रस्ताव करीब एक साल पहले सरकार को भेज दिया था, लेकिन अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है. प्रस्ताव के तहत एसटीपी के माध्यम से हाईवे से सटे क्षेत्रों के किसानों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की योजना है. कई किसानों ने आवेदन भी किए, लेकिन प्रोजेक्ट लंबित होने से समस्या जस की तस बनी हुई है. एईएन प्रवीण कुमार ने बताया कि स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव सरकार के पास लंबित है. फिलहाल नगर परिषद अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जलनिकासी की व्यवस्था कर रही है, जबकि परियोजना का काम भी शुरू कर दिया गया है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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