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सीकर के खंडेला में बना छतरी परिसर I Sikar news I rajasthan news I

Last Updated:July 06, 2026, 22:45 IST

शेखावाटी अंचल के सीकर जिले के खंडेला कस्बे में स्थित ऐतिहासिक छतरी परिसर राजपूती स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है. सफेद पत्थरों से निर्मित ये भव्य छतरियां अरावली की हरियाली के बीच अपने अद्भुत शिल्प और नक्काशी के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. इतिहासकारों के अनुसार, इनका निर्माण राजा हमीर सिंह सहित शेखावाटी के शासकों की स्मृति में किया गया था. विशाल गुंबद, कलात्मक स्तंभ और आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थान को और भी खास बनाते हैं.

सीकर. राजस्थान का शेखावाटी अंचल अपनी भव्य हवेलियों, किलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इन्हीं अनमोल विरासतों में शामिल है सीकर जिले के खंडेला कस्बे का ऐतिहासिक छतरी परिसर, यहां बनी छतरियां राजपूती स्थापत्य, शिल्पकला और सांस्कृतिक वैभव का उदाहरण मानी जाती है. अरावली की हरियाली के बीच सफेद पत्थरों से निर्मित ये छतरियां आज भी शेखावाटी के गौरवशाली इतिहास और राजाओं की शौर्यगाथा को जीवंत करती हैं.

छतरी परिसर में प्रवेश करते ही विशाल गुंबद, कलात्मक स्तंभ और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी लोगों का मन मोह लेती है. हर छतरी अपने भीतर इतिहास का एक अध्याय समेटे हुए है. यहां की स्थापत्य शैली राजपूतकालीन वास्तुकला को दर्शाती है. वहीं, गुंबदों और स्तंभों पर किया गया महीन शिल्प उस दौर के कारीगरों की अद्भुत कला का प्रमाण है. यही कारण है कि यह जगह इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए यह स्थान आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

संवत 1950 में राजा हमीर सिंह ने शुरू किया था ये कामइतिहासकारों के अनुसार, बड़ा पाना के राजा केसरी सिंह की 12 रानियां थी. राजा केसरी सिंह और उनकी सात रानियों के निधन के बाद उनके पुत्र राजा हमीर सिंह ने संवत 1950 में बूढ़ा पुष्कर के निकट छह बड़ी और एक छोटी छतरी का निर्माण करवाया. बाद में राजा हमीर सिंह की स्मृति में राजा प्रताप सिंह ने उनकी छतरी बनवाने के बजाय एक सुंदर तिबारी का निर्माण कराया. इसके अलावा छोटा पाना गढ़ के फतेह सिंह और संग्राम सिंह की स्मृति में भी यहां भव्य छतरियां बनाई गई, जो आज भी अपने मूल स्वरूप में इतिहास की गवाही देती हैं.

बारिश के दिनों में चित्र की तरह दिखाई देती है जगह इस ऐतिहासिक परिसर की खूबसूरती को आसपास का प्राकृतिक वातावरण और भी आकर्षक बना देता है. छतरियों के ऊपर पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन किला इस स्थान की भव्यता को बढ़ाता है, जबकि सामने मौजूद रसोड़ा तालाब और बूढ़ा पुष्कर इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को और मजबूत करते हैं. बारिश के मौसम में जब अरावली की पहाड़ियां हरियाली से ढक जाती हैं, तब यह पूरा परिसर किसी चित्र की तरह दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के अनुसार खंडेला की इन ऐतिहासिक छतरियों को देखने हर साल एक लाख से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं. फोटोग्राफी, इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान किसी खजाने से कम नहीं है. सदियों पुरानी यह धरोहर आज भी शेखावाटी की संस्कृति, राजपूती शौर्य और बेमिसाल वास्तुकला की अमर पहचान बनी हुई है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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