दूध में घुलने वाली चीनी की तरह हैं भारतीय, मेलबर्न में पीएम मोदी की इस बात पर गूंज उठी तालियां

नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बदलती वैश्विक पहचान और विकास की रफ्तार का दमदार संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां सिर्फ अपनी मौजूदगी नहीं, बल्कि प्यार, मेहनत और संस्कृति की ऐसी मिठास घोल देते हैं, जो पूरी दुनिया को जोड़ती है. भारतीयों की तुलना दूध में घुलने वाली चीनी से करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि घर का दूध और सब्जियां भले ऑस्ट्रेलिया की हों, लेकिन उनसे बनने वाली चाय और खाने का असली स्वाद भारतीय संस्कृति और मसालों से आता है.
पीएम मोदी ने कहा, “हम भारतीय दूध में घुलने वाली चीनी की तरह हैं, जो उसे और भी मीठा बना देती है. हम भारतीय दुनिया में अपने प्यार की मिठास घोलते रहते हैं. घर में दूध भले ही ऑस्ट्रेलिया का हो लेकिन उससे बनी चाय भारतीय होती है. दाल और सब्जियां ऑस्ट्रेलिया की होती हैं, फिर भी उनमें असली भारतीय मसालों का तड़का लगाया जाता है.”
पीएम मोदी ने बताया कि 21वीं सदी का भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार और विनिर्माण का केंद्र बन रहा है. ‘चिप्स से लेकर शिप्स’ तक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, 6जी तकनीक पर तेजी से काम और 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है.
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में कुछ सौ स्टार्टअप्स से शुरू हुआ सफर अब 2 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स तक पहुंच चुका है. देश में हर महीने 4,000 से ज्यादा नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं. उन्होंने भारत के युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और नवाचार की बदौलत भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप्स का विकास अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लगभग हर जिले तक इसका विस्तार हो चुका है. उन्होंने बताया कि आज रक्षा (डिफेंस) और अंतरिक्ष (स्पेस) जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सैकड़ों स्टार्टअप काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल्द ही भारत का एक स्पेस स्टार्टअप अपने ही रॉकेट से अपना उपग्रह (सैटेलाइट) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है.
पीएम मोदी ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत गगनयान मिशन और अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के बड़े सपनों और ऊंची आकांक्षाओं की सबसे मजबूत नींव देश के लोग हैं. ‘वी द पीपल’ और ‘नागरिक देवो भव:’ का मंत्र आज देश के सुशासन का मार्गदर्शक सिद्धांत बन चुका है. आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों के ठिकानों पर विस्फोट हो रहे थे और उनकी गूंज पूरी दुनिया ने सुनी.”
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 की अपनी पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा को याद करते हुए कहा कि वह 28 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा थी. उस समय उन्होंने भारतीय समुदाय से कहा था कि अगली यात्रा के लिए उन्हें फिर 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में यह मेरी ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है. एक तरह से यह हैट्रिक है. यह भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की नई ऊंचाइयों को दर्शाता है. और इसका सबसे बड़ा श्रेय मुझे नहीं, बल्कि आप सभी भारतीयों को जाता है. भारतीय प्रवासी समुदाय ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है.”
मेलबर्न पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय समुदाय ने ‘मोदी-मोदी’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मेलबर्न का मौसम भले ही ठंडा हो, लेकिन भारतीय समुदाय के स्वागत की गर्मजोशी अविस्मरणीय रही. भारत के प्रति उनका स्नेह और अटूट जुड़ाव गर्व और खुशी का विषय है.”
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखीं. इनमें ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी समुदाय के प्राचीन वाद्य यंत्र डिजेरिडू और भारत के तबले का अनूठा संगीत संगम, ‘मां तुझे सलाम’ की 10-सदस्यीय सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति तथा कथक नृत्य शामिल था. प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया के प्राचीन डिजेरिडू और भारत के तबले का अद्भुत संगीत दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों का शानदार प्रतीक है.”



