सरकारी अस्पताल में गिर रही छतें और प्लास्टर, मरीजों से लेकर डॉक्टरों तक की जान पर खतरा

Last Updated:July 10, 2026, 16:18 IST
Udaipur Government Hospital Ground Report: उदयपुर के खेरवाड़ा सीएचसी में छत का प्लास्टर गिरा, कर्मचारी बाल-बाल बचे. मानसून में सरकारी अस्पतालों की जर्जर हालत उजागर हुई, मरम्मत की कमी से हादसे का खतरा. सड़कें हों, सरकारी स्कूल हों या फिर सरकारी अस्पताल, बारिश शुरू होते ही कई जगहों की बदहाल तस्वीरें सामने आने लगती हैं. लोगों की जान बचाने वाले सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार नजर आ रहे हैं.
मानसून की बारिश हर साल सरकारी व्यवस्थाओं के दावों की हकीकत सामने लेकर आती है. सड़कें हों, सरकारी स्कूल हों या फिर सरकारी अस्पताल, बारिश शुरू होते ही कई जगहों की बदहाल तस्वीरें सामने आने लगती हैं. लोगों की जान बचाने वाले सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार नजर आ रहे हैं. कहीं छतों से पानी टपक रहा है तो कहीं जर्जर छत का प्लास्टर अचानक गिर रहा है. ऐसे हालात मरीजों के साथ-साथ अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं.
उदयपुर जिले के खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ऐसा ही एक मामला सामने आया. यहां अस्पताल की लेखा शाखा के कमरे की जर्जर छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा. घटना इतनी अचानक हुई कि अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और मरीज घबरा गए. राहत की बात यह रही कि लेखा शाखा में कार्यरत कर्मचारी घटना से कुछ ही सेकंड पहले अपनी सीट छोड़कर दूसरे कमरे में चले गए थे. यदि वह अपनी जगह पर बैठे रहते तो बड़ा हादसा हो सकता था.
प्लास्टर गिरने से कमरे में लगा सीलिंग फैन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं कुर्सियों सहित अन्य सामान भी टूट गया. घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया. कर्मचारियों ने तुरंत अन्य लोगों को उस कमरे में जाने से रोका और घटना की जानकारी अधिकारियों को दी.
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यह पहली बार नहीं है जब सरकारी अस्पतालों की जर्जर हालत सामने आई हो. कुछ दिन पहले उदयपुर शहर के एक सरकारी अस्पताल में भी छत का सीमेंट गिरने से एक डॉक्टर घायल हो गए थे. उस घटना के बाद अस्पतालों की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन अब खेरवाड़ा सीएचसी की घटना ने एक बार फिर इन दावों की पोल खोल दी है.
मानसून के दौरान अस्पतालों में मरीजों की संख्या पहले से ही बढ़ जाती है. ऐसे समय में यदि अस्पताल की इमारतें ही सुरक्षित नहीं हों तो यह चिंता का विषय है. मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन जर्जर भवनों के कारण उन्हें डर के साए में इलाज करवाना पड़ रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि कई जगहों पर छतों में दरारें हैं और बारिश के दौरान पानी भी टपकता है. इसके बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होने से हादसों का खतरा लगातार बना रहता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों की इमारतों का समय-समय पर निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके. लोगों का मानना है कि अगर इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो भविष्य में किसी कर्मचारी, डॉक्टर या मरीज की जान भी जोखिम में पड़ सकती है.
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