Health

Health Tips: काला चना या काबुली चना, किसे कौन-सा चना खाना चाहिए? जानिए फायदे

Last Updated:July 11, 2026, 18:00 IST

Black Vs Kabuli Chickpeas: वैसे तो काला चना और काबुली चना दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन दोनों के पोषक तत्व की मात्रा में अंतर होता है, जिससे अलग-अलग जरूरतों के अनुसार चने को चुनना बेहतर साबित होता है. यहां जानिए किसे कौन-सा चना खाना चाहिए?

ख़बरें फटाफट

काला चना या काबुली चना, किसे कौन-सा चना खाना चाहिए? जानिए फायदेZoom

चना भारतीय रसोई का एक बेहद लोकप्रिय और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है. आमतौर पर लोग दो तरह के चनों का सेवन करते है- काला चना (देसी चना) और सफेद चना (काबुली चना). दोनों ही प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इनमें से कौन-सा चना ज्यादा फायदेमंद है.

वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल करने, दिल को स्वस्थ रखने या शरीर में आयरन की कमी पूरी करने जैसे लक्ष्यों के लिए सही विकल्प चुनना जरूरी होता है. हालांकि दोनों चनों में कई समानताएं हैं, लेकिन फाइबर, खनिज और कुछ अन्य पोषक तत्वों के स्तर में हल्का अंतर देखा जाता है. यही वजह है कि अलग-अलग जरूरतों के अनुसार एक प्रकार का चना दूसरे से थोड़ा बेहतर साबित हो सकता है. आइए जानते हैं प्रोटीन, फाइबर, ब्लड शुगर, दिल की सेहत, पाचन और वजन प्रबंधन के आधार पर काला चना और काबुली चना कैसे एक-दूसरे से अलग हैं.

प्रोटीन के मामले में कौन बेहतर है?अलग-अलग अध्ययनों में काला और काबुली चना दोनों के प्रोटीन स्तर में थोड़ा अंतर पाया गया है. कुछ शोधों में काला चना थोड़ा अधिक प्रोटीन वाला बताया गया है, जबकि कुछ में दोनों लगभग समान पाए गए हैं. इसलिए केवल रंग के आधार पर किसी एक को ज्यादा प्रोटीन वाला कहना सही नहीं होगा. दोनों ही अच्छे प्लांट-बेस्ड प्रोटीन स्रोत हैं और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं.

फाइबर और वजन घटाने में काला चना आगेकाले चने का छिलका मोटा होता है, इसलिए इसमें फाइबर की मात्रा आमतौर पर अधिक होती है. अधिक फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है. यही कारण है कि वजन कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए काला चना एक अच्छा विकल्प माना जाता है.

ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगारचना सामान्य रूप से लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन है, लेकिन काले चने में अधिक फाइबर और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण इसका असर ब्लड शुगर पर अपेक्षाकृत धीमा हो सकता है. इसलिए डायबिटीज वाले लोगों के लिए काला चना अक्सर बेहतर विकल्प माना जाता है. हालांकि सही मात्रा में खाया गया काबुली चना भी स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकता है.

दिल और आयरन के लिए फायदेकाले चने के गहरे रंग के छिलके में पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट अधिक पाए जाते हैं. ये तत्व दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. साथ ही इसमें आयरन और कुछ अन्य खनिज भी अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकते हैं, जो शरीर में आयरन की जरूरत पूरी करने में सहायक हैं.

पाचन और पकाने में अंतरजहां काला चना अधिक फाइबर के कारण कुछ लोगों में गैस या पेट फूलने की समस्या पैदा कर सकता है, वहीं काबुली चना अपने पतले छिलके और मुलायम बनावट के कारण पचाने में अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. दोनों प्रकार के चनों को अच्छी तरह भिगोकर और पूरी तरह पकाकर खाने से पाचन संबंधी परेशानियां कम की जा सकती हैं.

किसे कौन-सा चना खाना चाहिए?अगर आपको वजन कम करना है, ब्लड शुगर नियंत्रित रखना या आयरन की मात्रा बढ़ाना है, तो काला चना बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं यदि आपको हल्का और आसानी से पचने वाला विकल्प चाहिए, तो काबुली चना चुन सकते हैं.

About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

New Delhi,Delhi

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj