Rajasthan Medical Recruitment | 3318 Vacancies in RajMES Colleges | राजस्थान मेडिकल भर्ती

Last Updated:August 06, 2026, 08:50 IST
Rajasthan Medical Recruitment: राजस्थान सरकार ने राजमेस के 19 मेडिकल कॉलेजों में 3318 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है. इनमें 2577 पद नर्सिंग अधिकारियों के हैं. 3090 पद संविदा और 228 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे. सीकर को सबसे अधिक 293 पद मिले हैं. इसके बाद चूरू को 266 और बाड़मेर को 265 पद आवंटित किए गए हैं. इस फैसले से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को जयपुर भागने से राहत मिलेगी.
Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राजमेस (RajMES) के तहत संचालित 19 मेडिकल कॉलेजों के लिए 3,318 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है. लंबे समय से डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों और तकनीकी स्टाफ की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों को इस निर्णय से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति होने से मरीजों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, साथ ही अस्पतालों की कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बन सकेगी.
भर्ती प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 2,577 नर्सिंग अधिकारियों के पद स्वीकृत किए गए हैं, जो कुल भर्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा हैं. इसके अलावा लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, असिस्टेंट रेडियोग्राफर, ओटी टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन समेत विभिन्न पैरामेडिकल पदों पर भी भर्ती की जाएगी. विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए काउंसलर, डाइटिशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, ईसीजी टेक्नीशियन और ऑप्थैल्मिक टेक्नीशियन जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल किए गए हैं. इन नियुक्तियों से सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होने, कार्यभार कम होने और मरीजों को अधिक प्रभावी एवं समय पर उपचार मिलने की उम्मीद है.
भर्ती प्रक्रिया दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत पूरी की जाएगी. इनमें 3,090 पद राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स-2022 के तहत संविदा आधार पर भरे जाएंगे, जबकि 228 पद आउटसोर्स या जॉब बेसिस के माध्यम से भरे जाएंगे. आउटसोर्स श्रेणी में मशीन विद मैन और वार्ड अटेंडेंट जैसे पद शामिल हैं. इस व्यवस्था से अस्पतालों में सहायक सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी, जिससे नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन अधिक सुचारु और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा.
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भर्ती प्रक्रिया दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत पूरी की जाएगी. कुल 3,090 पद राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स-2022 के तहत संविदा आधार पर भरे जाएंगे. वहीं 228 पद आउटसोर्स या जॉब बेसिस के माध्यम से भरे जाएंगे. आउटसोर्स श्रेणी में मशीन विद मैन, वार्ड अटेंडेंट सहित अन्य सहायक पद शामिल हैं. इस भर्ती से अस्पतालों में सहायक सेवाएं और अधिक मजबूत होंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी, सुचारु और व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा.
भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में आवश्यकता के अनुसार पदों का आवंटन किया गया है. झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज को 130 पद, नागौर मेडिकल कॉलेज को 116 पद और अलवर मेडिकल कॉलेज को 115 पद आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़, करौली, सिरोही, हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, बूंदी, बारां, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, दौसा और भीलवाड़ा के मेडिकल कॉलेजों को भी उनकी जरूरत के अनुसार पद स्वीकृत किए गए हैं. चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों में श्रेणीवार स्टाफ उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है, ताकि किसी एक संस्थान पर अतिरिक्त कार्यभार न पड़े और प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन संतुलित एवं प्रभावी ढंग से हो सके.
गौरतलब है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में लंबे समय से नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है. कई बार पर्याप्त संख्या में डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर जांच, उपचार और आवश्यक देखभाल नहीं मिल पाती थी. नई भर्ती के बाद ऑपरेशन थिएटर, लैब, डायलिसिस यूनिट, रेडियोलॉजी और वार्ड सेवाओं का संचालन अधिक सुचारु होने की उम्मीद है. इससे मरीजों का इंतजार कम होगा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और अस्पतालों की कार्यक्षमता भी पहले से बेहतर हो सकेगी.
नई भर्तियों के बाद मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में मरीजों को लंबी कतारों में कम समय तक इंतजार करना पड़ेगा और पर्ची बनने के बाद जल्द चिकित्सकीय परामर्श मिल सकेगा. साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की रोटेशन ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में भी लगाई जाएगी, जिससे रात के समय आने वाले गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा. अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ उपलब्ध होने से उपचार सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा. इससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए जयपुर, सीकर या अन्य बड़े शहरों का रुख करने की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो सकेगी.
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August 06, 2026, 08:50 IST



