चुनाव लड़ने से पहले जान लें नया नियम, अब खर्च की सीमा तय, 15 दिन में देना होगा पूरा हिसाब

Last Updated:August 07, 2026, 18:19 IST
Rajasthan Nikaay Chunaav Me Kharch Ki Seema : राजस्थान निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा तय. नगर निगम के लिए 3.50 लाख, नगर परिषद के लिए 2.50 लाख और नगरपालिका के लिए 1.50 लाख रुपये निर्धारित. निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों के लिए यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए सभी खर्च का पूरा हिसाब रखना जरूरी होगा. प्रचार सामग्री, वाहन, सभा, पोस्टर, बैनर, पंपलेट, प्रचार अभियान और अन्य चुनावी गतिविधियों पर होने वाला खर्च निर्धारित सीमा के भीतर ही होना चाहिए.
ख़बरें फटाफट
निकाय चुनाव 2026: नगर निगम प्रत्याशी 3.50 लाख, नगर परिषद 2.50 लाख और नगरपालिका 1.50 लाख से ज्यादा नहीं कर सकेंगे खर्च
जयपुर. राजस्थान में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने एक और बड़ा फैसला लिया है. चुनाव की तैयारियों के बीच अब प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है. यानी अब कोई भी उम्मीदवार तय सीमा से ज्यादा पैसा चुनाव प्रचार में खर्च नहीं कर सकेगा. इतना ही नहीं, चुनाव खत्म होने के बाद हर प्रत्याशी को अपने खर्च का पूरा हिसाब भी आयोग के सामने पेश करना होगा.
आयोग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक अलग-अलग निकायों के लिए चुनावी खर्च की अलग सीमा तय की गई है. इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और सभी प्रत्याशियों को बराबरी का मौका देना माना जा रहा है.
नगर निगम प्रत्याशियों के लिए सबसे ज्यादा सीमाराज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नगर निगम के पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अधिकतम 3.50 लाख रुपये तक चुनावी खर्च कर सकेंगे. वहीं नगर परिषद के पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 2.50 लाख रुपये तय की गई है. दूसरी ओर नगरपालिका सदस्य पद के प्रत्याशी अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक ही चुनावी खर्च कर पाएंगे. आयोग ने साफ किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाले सभी तरह के खर्च इसी तय सीमा के भीतर रहने चाहिए. उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा रिकॉर्ड भी संभालकर रखना होगा.
हर खर्च का रखना होगा रिकॉर्डनिर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों के लिए यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए सभी खर्च का पूरा हिसाब रखना जरूरी होगा. प्रचार सामग्री, वाहन, सभा, पोस्टर, बैनर, पंपलेट, प्रचार अभियान और अन्य चुनावी गतिविधियों पर होने वाला खर्च निर्धारित सीमा के भीतर ही होना चाहिए. अगर कोई प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान खर्च का सही रिकॉर्ड नहीं रखता या तय नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके सामने आगे परेशानी खड़ी हो सकती है. इसलिए उम्मीदवारों को शुरुआत से ही अपने चुनावी खर्च का पूरा लेखा-जोखा तैयार रखने की सलाह दी गई है.
15 दिन के भीतर देना होगा पूरा ब्यौरानिर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सभी प्रत्याशियों को 15 दिन के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा हिसाब आयोग के पास जमा कराना होगा. इसमें यह बताना होगा कि चुनाव के दौरान किस मद में कितना खर्च किया गया. आयोग के पास जमा होने वाले इस ब्यौरे में चुनाव प्रचार से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे. उम्मीदवारों को खर्च का रिकॉर्ड निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना होगा.
चुनावी तैयारियों के बीच अहम फैसला
राजस्थान में निकाय चुनाव की तैयारियां लगातार तेज हो रही हैं. इसी बीच चुनावी खर्च की सीमा तय होने से अब चुनाव मैदान में उतरने वाले संभावित उम्मीदवारों को अपने प्रचार की रणनीति भी उसी हिसाब से बनानी होगी. आयोग का यह फैसला चुनावी प्रक्रिया को नियमों के दायरे में रखने और खर्च पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. अब चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी के सामने केवल वोट जुटाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि तय सीमा के भीतर रहकर प्रचार करना और बाद में हर खर्च का पूरा हिसाब आयोग को देना भी जरूरी होगा. यही नियम इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू रहेगा.About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 07, 2026, 18:16 IST



