दोस्तों की कुर्बानी से लिया सबक, हीरो से विलेन बन गया हैंडसम हंक, डिंपल कपाड़िया की फिल्म ने पलटा एक्टिंग करियर

Last Updated:September 23, 2026, 05:01 IST
प्रेम चोपड़ा ने करियर की शुरुआत में एक्टर के तौर पर भी छोटे-छोटे रोल निभाए थे. लेकिन उन निभाए गए किरदारों से उन्हें पहचान नहीं मिली. बाद में उन्होंने इडंस्ट्री में रहने के लिए विलेन के रोल करने शुरू कर दिए. लेकिन बतौर विलेन असली पहचान उन्हें डिंपल कपाड़िया की एक ब्लॉकबस्टर से मिली थी. अपने दोस्तों को देखकर प्रेम चोपड़ा ने ये फैसला लिया था.
नई दिल्ली. फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले ज्यादातर कलाकारों का सपना हीरो बनने का होता है. प्रेम चोपड़ा भी इसी सपने के साथ मुंबई आए थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर हीरो की थी, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था. आगे चलकर उन्होंने फिल्मों में ऐसे खलनायक के किरदार निभाए कि हिंदी सिनेमा में उनका नाम मशहूर विलेन के तौर पर दर्ज हो गया. साभार:facebook@Imprints and Images of Indian Film Music
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रेम चोपड़ा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों से की थी. शुरुआत में उन्होंने हीरो के तौर पर काम किया. इसके बाद जब उन्होंने हिंदी फिल्मों का रुख किया, तो उन्हें कई फिल्मों में लीड रोल मिले. हालांकि, बतौर हीरो उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाईं. इसके बाद उन्होंने नेगेटिव किरदारों की तरफ रुख किया और यहीं से उनके करियर को एक नई पहचान मिली.
23 सितंबर 1935 को लाहौर, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है, में जन्मे प्रेम चोपड़ा का परिवार भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद शिमला आ गया था. उनके पिता रणबीर लाल चोपड़ा एक कंपनी में अकाउंट ऑफिसर थे, जबकि उनकी मां रूपरानी चोपड़ा गृहिणी थीं. प्रेम चोपड़ा का बचपन और शुरुआती पढ़ाई शिमला में ही हुई.
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पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रेम चोपड़ा के मन में फिल्मों में काम करने का सपना था. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया. हालांकि, मुंबई में शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे. अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक कंपनी के सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में नौकरी भी की.
इसी दौरान एक दिन लोकल ट्रेन में उनकी मुलाकात पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक शख्स से हुई. उस शख्स ने प्रेम चोपड़ा के व्यक्तित्व को देखकर उनसे पूछा कि क्या वह फिल्मों में काम करना चाहेंगे. प्रेम चोपड़ा ने बिना देर किए हां कह दी. इसके बाद वह उनके साथ रंजीत स्टूडियो पहुंचे और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई.
साल 1960 में प्रेम चोपड़ा को पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ में काम करने का मौका मिला. फिल्म में उन्होंने हीरो का किरदार निभाया था. यह फिल्म जबरदस्त हिट रही और इसे पंजाबी में बेस्ट फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला. इसके बाद प्रेम चोपड़ा ने कुछ और पंजाबी फिल्मों में काम किया.जब उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा तो शुरुआत में उन्हें हीरो के तौर पर ही काम मिला. लेकिन उनकी बतौर हीरो फिल्में ज्यादा सफल नहीं हो पाईं. इसके बाद साल 1965 में आई फिल्म ‘शहीद’ ने उनके करियर की दिशा बदल दी. इस फिल्म में उन्होंने सुखदेव का किरदार निभाया और उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया. इसके बाद उन्हें फिल्मों में लगातार नेगेटिव रोल मिलने लगे.
खुद प्रेम चोपड़ा ने अपने एक इंटव्यू में बताया था कि उनके साथ के कई दोस्त जो छोटे-छोटे रोल कर रहे थे, वह काम न मिलने पर इडंस्ट्री से बाहर हो गए थे. उन्होंने अपना सपना छोड़ दिया और उनकी कुर्बानी देखकर प्रेम ने इंडस्ट्री में बने रहने के लिए विलेन के रोल करना शुरू किया था.
बता दें कि बतौर विलेन प्रेम चोपड़ा को बड़ी पहचान, साल 1973 आई फिल्म ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की’बॉबी’ से मिली थी. इस फिल्म ने उनके करियर को एक अलग मुकाम पर पहुंचा दिया. फिल्म में उनका डायलॉग ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ आज भी लोगों को याद है.धीरे-धीरे प्रेम चोपड़ा हिंदी सिनेमा के चर्चित विलेन बन गए. उनकी आवाज, बोलने का अंदाज और पर्दे पर खतरनाक किरदार निभाने का तरीका दर्शकों को खूब पसंद आया.
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September 23, 2026, 05:01 IST



