Bharatpur News: 20 साल तक नहीं टूटा इंतजार, सुहाग का सिंदूर संभालकर बैठी रही पत्नी, आखिर लौट आया लापता पति

Last Updated:August 11, 2026, 11:11 IST
20 साल पहले लापता हुए पति की राह पत्नी ने कभी नहीं छोड़ी. सिंदूर और सुहाग की निशानियां संभालकर मालती देवी पति के लौटने का इंतजार करती रहीं. आखिरकार भरतपुर के अपना घर आश्रम की मदद से परशुराम महतो अपने परिवार तक पहुंच गए. पति को सामने देखकर दो दशक का इंतजार खुशी के आंसुओं में बदल गया.
भरतपुर. कहते हैं सच्चा इंतजार वही होता है, जिसमें समय गुजरता रहे लेकिन उम्मीद न टूटे. भरतपुर में सामने आई एक ऐसी ही भावुक कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया है. करीब 20 साल पहले परिवार से बिछड़े परशुराम महतो आखिरकार अपने घर लौट आए हैं, उनकी तलाश और परिवार से मिलाने में भरतपुर के अपना घर आश्रम की अहम भूमिका रही. सबसे खास बात यह है कि परशुराम की पत्नी मालती देवी ने दो दशक तक पति के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी, उन्होंने सुहाग के प्रतीक सिंदूर और श्रृंगार को बनाए रखा और विश्वास जताती रही कि उनके पति एक दिन जरूर वापस आएंगे.
मार्च 2024 में राजस्थान के कुचामन सिटी से मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में एक व्यक्ति को अपना घर आश्रम लाया गया था, उस समय वह अपना नाम पता और परिवार से जुड़ी कोई जानकारी बताने की स्थिति में नहीं थे. आश्रम में उन्हें प्रभुजी विष्णु नाम दिया गया आश्रम की ओर से उनका उपचार सेवा और देखभाल शुरू की गई, इस दौरान उनकी गंभीर बीमारी का आवश्यक ऑपरेशन भी कराया गया. लगातार इलाज और आत्मीय माहौल के बीच धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति में सुधार होने लगा.
काम की तलाश में दोस्तों के साथ गए थे मुंबई
कुछ समय बाद उन्होंने अपने बारे में जानकारी देना शुरू किया उन्होंने बताया कि वह झारखंड के बोकारो क्षेत्र के गोविंदपुर गांव के रहने वाले हैं. इसके बाद आश्रम की टीम ने जानकारी के आधार पर उनके परिवार की तलाश शुरू की गांव की प्रधान अनीता से संपर्क किया गया. स्थानीय स्तर पर पड़ताल के बाद पता चला कि गोविंदपुर गांव से परशुराम महतो नाम का व्यक्ति करीब 20 वर्षों से लापता है. इसके बाद उनके भाई कामेश्वर महतो से संपर्क किया गया, सूचना मिलते ही कामेश्वर अपने जीजा टीकेन्द्र महतो और बेटे के साथ भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम पहुंचे. आश्रम में भाई को देखते ही परिवार भावुक हो गया और पहचान की पुष्टि हुई परिवार के मुताबिक परशुराम पहले इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक का काम करते थे. बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण के दौरान उनकी दुकान टूटने के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी.
बाद में वह काम की तलाश में दोस्तों के साथ मुंबई चले गए लेकिन दोस्त लौट आए और परशुराम वापस नहीं आए. परिवार ने वर्षों तक तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली, इस दौरान उनके माता-पिता का भी निधन हो गया और परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी. हालांकि पत्नी मालती देवी का विश्वास कभी नहीं टूटा, संतान नहीं होने के बावजूद उन्होंने दूसरा विवाह नहीं किया और पति के लौटने की आस में सुहाग की परंपराएं निभाती रही. वह करवा चौथ का व्रत भी रखती थी उनका विश्वास था कि परशुराम जीवित हैं और एक दिन जरूर लौटेंगे. परशुराम के मिलने की खबर जैसे ही गांव पहुंची परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई कामेश्वर महतो के अनुसार घर में ऐसा माहौल था मानो बिना दीपावली के ही दीपावली आ गई हो. अब 20 साल का इंतजार खत्म हो चुका है, परशुराम अपने परिवार के साथ गोविंदपुर लौट गया और मालती देवी का वह विश्वास सच साबित हो गया जिसे उन्होंने दो दशक तक अपने दिल में जिंदा रखा था.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
August 11, 2026, 11:11 IST



