उदयपुर में 2 करोड़ की रिश्वत का बड़ा ट्रैप, ACB के हत्थे चढ़ा दलाल, SOG के एडिशनल SP डिटेन

उदयपुर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उदयपुर में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में बड़ी ट्रैप कार्रवाई की है. एसीबी ने एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी के कथित दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को परिवादी की फैक्ट्री से रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के बाद एसीबी की टीम ने एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी को बालोतरा स्थित उनके निवास से डिटेन किया है. मामले में पूछताछ और आगे की जांच जारी है.
एसीबी के अनुसार पूरा मामला उदयपुर नगर निगम के 272 भूखंड से जुड़े प्रकरण संख्या 97/2022 से संबंधित है. आरोप है कि इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को राहत देने, अन्य प्रकरणों में आरोपी नहीं बनाने और गिरफ्तारी के दौरान बरामद दस्तावेज वापस करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह रकम एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी के लिए उनके कथित दलाल सज्जन सिंह जैन के माध्यम से मांगी जा रही थी.
शिकायत के सत्यापन के बाद किया गया ट्रैप
एसीबी को मिली शिकायत के बाद अधिकारियों ने रिश्वत की मांग से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कराया. एसीबी के मुताबिक सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग को लेकर बातचीत की पुष्टि हुई. इसके बाद 26 सितंबर को एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई. परिवादी की फैक्ट्री पर रिश्वत की रकम लेने पहुंचे सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को एसीबी टीम ने पकड़ लिया. आरोपी के कब्जे से बरामद रकम में 4 लाख रुपये असली करेंसी थी, जबकि 1 करोड़ 96 लाख रुपये डमी नोट बताए गए हैं. ट्रैप कार्रवाई के बाद एसीबी ने मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच शुरू कर दी.
272 प्लॉट घोटाले से जुड़ा हुआ है मामला
उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट घोटाले में एसओजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एएसपी मुकेश सोनी को हिरासत में लिया है, जबकि दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि प्लॉट घोटाले की एफआईआर दर्ज कराने और जब्त सामान छोड़ने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी. एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार सूरजपोल थाने में यह मामला दर्ज है और इसकी जांच एएसपी मुकेश सोनी कर रहे थे. परिवादी की ओर से 4 लाख रुपये के असली नोट और 1.96 करोड़ रुपये के डमी नोट दिए गए. पूरा मामला साल 2012 से जुड़ा है, जब यूआईटी ने कई कॉलोनियां नगर निगम को सौंपी थीं. इनमें करोड़ों रुपये के प्लॉट खाली थे. आरोप है कि भू-माफियाओं ने निगम और पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी आवंटन किए और बिना राशि जमा कराए चालान पर पट्टे जारी कर दिए. करीब 500 करोड़ रुपये का यह घोटाला विधानसभा में भी उठ चुका है.
पत्नी के 2 किलो जेवर और 11 लाख लौटाने के बदले रिश्वत
साल 2022 में नगर निगम के 272 प्लॉट घोटाले की एफआईआर सूरजपोल थाने में दर्ज हुई थी. इसी मामले में एसओजी ने 4 अगस्त की सुबह सेवानिवृत्त अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था. उनके घर से 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे. आरोप है कि इसी मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस करने के लिए रिश्वत का सौदा हुआ. परिवादी चाहता था कि उसकी पत्नी के 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपये वापस मिलें. इसके लिए दलाल सज्जन सिंह जैन के माध्यम से एएसपी मुकेश सोनी से बातचीत कराई गई. आरोप है कि एफआईआर में राहत देने और जब्त सामान छोड़ने के बदले 2 करोड़ रुपये की मांग की गई. इसी मांग के बाद परिवादी ने एसीबी से संपर्क किया.
चौराहे पर खड़ी कार में हुई थी 2 करोड़ की डील
दो करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला ने परिवादी का भरोसा जीतने के लिए उसकी मुलाकात एएसपी मुकेश सोनी से करवाई थी. यह मुलाकात किसी सरकारी दफ्तर में नहीं, बल्कि उदयपुर में एक चौराहे के पास खड़ी कार में हुई. परिवादी के मुताबिक कार की आगे वाली सीट पर एएसपी मुकेश सोनी बैठे थे, जबकि पीछे की सीट पर वह और दलाल सज्जन सिंह जैन मौजूद थे. आरोप है कि सज्जन सिंह ने मामला निपटाने के बदले परिवादी से 2 करोड़ रुपये नकद मांगे थे. इतनी बड़ी रकम की मांग पर परिवादी ने पहले एएसपी से मुलाकात कराने को कहा, ताकि उसे भरोसा हो सके. कार में बातचीत के दौरान दलाल ने मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ ‘2 करोड़’ लिखा दिखाया और मामला खत्म कराने का आश्वासन दिया.
हाईकोर्ट ने रेंज से बाहर भेजने के दिए थे आदेश
मुकेश सोनी को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं. साल 2022 में अजमेर में नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में एक आरोपी को फायदा पहुंचाने के आरोपों के बीच हाईकोर्ट ने मुकेश सोनी समेत तीन पुलिस अधिकारियों को रेंज से बाहर भेजने के आदेश दिए थे. इसके बाद साल 2024 में मुकेश सोनी एसओजी की अजमेर चौकी में तैनात रहे. कई मामलों को लेकर विवाद सामने आने के बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया था. हालांकि नवंबर 2025 में उन्हें एसओजी की उदयपुर यूनिट में भेज दिया गया. अब 2 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में उनका नाम सामने आया है. आरोप है कि इससे पहले भी वे विवादों में रहे और अजमेर से हटाए गए थे. हाईकोर्ट के पुराने आदेश के बावजूद बाद में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने का मुद्दा भी चर्चा में है.
एडिशनल एसपी को बालोतरा से डिटेन किया
रिश्वत के इस मामले में कथित तौर पर रकम मांगने वाले एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी की भूमिका को लेकर भी एसीबी जांच कर रही है. ट्रैप कार्रवाई के बाद एसीबी की टीम ने उन्हें बालोतरा स्थित उनके निवास से डिटेन किया. अब उनसे पूछताछ कर रिश्वत मांगने और ट्रैप कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है. एसीबी अधिकारी सोनू शेखावत ने कार्रवाई से जुड़े मामले को साझा किया. वहीं परिवादी ने भी पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष रखा है. एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है. एजेंसी अब रिश्वत की मांग, कथित बिचौलिए की भूमिका, रकम के लेन-देन और प्रकरण संख्या 97/2022 से जुड़े अन्य प्रकरण की जांच कर रही है. जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.



