‘सरफरोश’ से ‘बॉर्डर’ तक, 15 अगस्त को ‘अल्ट्रा प्ले’ पर देखें 10 यादगार फिल्में, खास अंदाज में मनाएं आजादी का जश्न

Last Updated:August 14, 2026, 21:31 IST
सीमा पर डटा जवान, देश के लिए लड़ता क्रांतिकारी, ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाता अधिकारी और मुश्किल वक्त में अपनों से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाता एक आम इंसान. आज भी इन कहानियों की भावनाएं उतनी ही मजबूत हैं. इस 15 अगस्त को अल्ट्रा प्ले के साथ इन टाइमलेस देशभक्ति क्लासिक्स को देखकर परिवार के साथ पुरानी यादों को ताजा करें और नई पीढ़ी को इन प्रेरणादायक कहानियों से जोड़ें.
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सभी फिल्में ‘अल्ट्रा प्ले’ पर मौजूद हैं.
नई दिल्ली: भारत इस साल अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. यह दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत सुनने का नहीं, बल्कि उन लोगों को याद करने का भी है, जिनके साहस, संघर्ष और बलिदान की बदौलत हमें आजादी मिली. हिंदी सिनेमा ने हमेशा इन भावनाओं को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है. कभी देश की रक्षा में डटे सैनिकों की कहानियों के जरिए, तो कभी आजादी के लिए लड़ने वाले वीरों की दास्तानों के माध्यम से. अगर आप भी इस स्वतंत्रता दिवस ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं, जो दिल में देशभक्ति का जज्बा जगा दें, तो अल्ट्रा प्ले पर मौजूद ये 10 यादगार फिल्में जरूर देखें.
1997 में आई ‘बॉर्डर’ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बनी है. इसमें भारतीय सैनिकों की बहादुरी, दोस्ती और बलिदान की कहानी को दिखाया गया है. ‘उपकार’ (1967) किसान और जवान दोनों को देश की ताकत के रूप में दिखाती है और ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना को यादगार बनाती है. वहीं क्रांति (1981) अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीयों के स्ट्रगल और एकजुटता की कहानी कहती है.
‘शहीद’ में भगत सिंह की कहानीस्वतंत्रता संग्राम की बात हो तो ‘शहीद’ (1965) भगत सिंह की कहानी को पर्दे पर जीवंत करती है. मनोज कुमार की फिल्म ने स्वतंत्रता आंदोलन और एक युवा क्रांतिकारी के देश के प्रति समर्पण को असरदार ढंग से पेश किया. वहीं, साल 2002 में आई ’23 मार्च 1931: शहीद’ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के संघर्ष तथा बलिदान को दर्शाती है.
‘कर्मा’-‘सरफरोश’ भी हैं खासदेशभक्ति और एक्शन की बात करें तो कर्मा (1986) और सरफरोश (1999) खास हैं. ‘कर्मा’ देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक बड़े एक्शन ड्रामा के रूप में पेश करती है, जबकि ‘सरफरोश’ एक पुलिस अधिकारी के कर्तव्य और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ उसके संघर्ष की कहानी है. ‘इंडियन’ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और ईमानदारी को देशसेवा से जोड़ती है, वहीं ‘पुकार’ (2000) कर्तव्य और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच के संघर्ष को दर्शाती है.
‘अल्ट्रा प्ले’ पर देशभक्ति फिल्मों का उठाएं आनंद1999 के कारगिल युद्ध की याद दिलाने वाली फिल्म ‘एलओसी: कारगिल’ भारतीय सैनिकों के साहस और कठिन हालात में उनके संघर्ष को बड़े पैमाने पर दिखाती है. इन सभी फिल्मों में देशभक्ति के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं. अल्ट्रा प्ले पर हिंदी सिनेमा की यादगार क्लासिक फिल्में, लोकप्रिय मनोरंजन, क्षेत्रीय पसंदीदा फिल्में और एक्सक्लूसिव कंटेंट का शानदार संग्रह उपलब्ध है. यह सभी फिल्में आप ‘अल्ट्रा प्ले’ पर देख सकते हैं.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
New Delhi,Delhi
First Published :
August 14, 2026, 21:31 IST



