Ambeshwar Mahadev Sirohi | अरावली के इच्छाधारी आंबेश्वर महादेव

Last Updated:August 15, 2026, 08:03 IST
Ambeshwar Mahadev Temple Sirohi: सिरोही से 10 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों में इच्छाधारी आंबेश्वर महादेव मंदिर स्थित है. 400 सीढ़ियाँ चढ़कर भक्त यहाँ स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करते हैं. परिसर में तीन प्राचीन गंगाकुंड हैं जिनका जल कभी नहीं सूखता. यहाँ संत सालासुराजी ने तपस्या की थी और प्राचीन कोलरगढ़ नगरी बसाई थी. मन्नत पूरी होने पर पशुपालक शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हैं. श्रावण मास में यहाँ हजारों श्रद्धालु आते हैं.
ख़बरें फटाफट
Sirohi: राजस्थान के सिरोही जिले को देवनगरी के रूप में पहचाना जाता है. सिरोही जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमाला की गोद में प्राचीन आंबेश्वर महादेव मंदिर स्थित है. श्रावण मास के दौरान यह मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र बन जाता है. चारों ओर घने जंगलों और अरावली की मनोरम पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है.
मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 400 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं. यहाँ सैकड़ों वर्ष पुराना स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस धाम को इच्छाधारी आंबेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहाँ दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. श्रावण महीने में सिरोही के साथ-साथ दूर-दराज के राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ महादेव का जलाभिषेक करने पहुँचते हैं. मंदिर परिसर में एक अखंड धुना भी है, जो कई वर्षों से निरंतर प्रज्वलित है.
कोलरगढ़ नगरी और संत सालासुराजी का इतिहासमंदिर परिसर में एक अत्यंत प्राचीन शिलालेख मौजूद है. हालांकि समय बीतने के साथ इसके अक्षर अस्पष्ट हो चुके हैं, जिससे इसका पूर्ण इतिहास पढ़ना कठिन है. स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार गुजरात से आए एक प्रसिद्ध संत सालासुराजी ने यहाँ वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. उनके प्रभाव से ही मंदिर के निकट समृद्ध कोलरगढ़ नगरी की स्थापना हुई थी. आज भी यहाँ प्राचीन कोलरगढ़ किले के ऐतिहासिक अवशेष देखे जा सकते हैं, जो इसके समृद्ध अतीत की गवाही देते हैं.
कभी न सूखने वाले तीन गंगाकुंड और अनूठी परंपराइस मंदिर परिसर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित तीन प्राचीन जलकुंड हैं, जिन्हें गंगावेरी या गंगाकुंड कहा जाता है. इन कुंडों की खासियत यह है कि भीषण गर्मी के मौसम में भी इनका जल कभी नहीं सूखता और पानी निरंतर बहता रहता है. इसके अलावा यहाँ एक अनोखी परंपरा भी प्रचलित है. स्थानीय पशुपालक अपने मवेशियों की बीमारी दूर करने और दूध की पैदावार बढ़ाने की मन्नत माँगने यहाँ आते हैं. मन्नत पूरी होने के बाद भक्त अत्यंत श्रद्धा से भगवान शिव को दूध अर्पित करते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
August 15, 2026, 08:03 IST



