गहलोत के रिपोर्ट कार्ड सवाल पर राजेंद्र राठौड़ का पलटवार, बोले- बहस छोड़कर भाग गई थी कांग्रेस

जयपुर. स्थानीय निकाय चुनाव के बीच राजस्थान की सियासत में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के बयानों पर पलटवार किया. राठौड़ ने गहलोत के सरकार से ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड मांगने वाले सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में सरकार के कामकाज का पूरा ब्यौरा पहले ही पेश कर चुके हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधायक सदन छोड़कर चले गए और बहस से बचने की कोशिश की. राठौड़ ने कहा कि सरकार हर साल अपने काम का हिसाब जनता के सामने रख रही है. प्रेसवार्ता में उन्होंने ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की अवधारणा, एक साथ 309 निकायों में चुनाव, सफाईकर्मियों की भर्ती और मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए बयानों पर भी कांग्रेस को घेरा.
गहलोत के सवाल पर राठौड़ का पलटवार
राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत शायद यह भूल गए हैं कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में बजट रिप्लाई के दौरान सरकार के ढाई साल के कामकाज का विस्तृत ब्यौरा सदन के सामने रख चुके हैं. राठौड़ के मुताबिक मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सरकार के काम पर बहस करने का अवसर भी दिया था, लेकिन कांग्रेस सदन छोड़कर चली गई. राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर बहस से बच रही है, जबकि भाजपा सरकार हर साल अपने काम का लेखा-जोखा जनता के सामने रख रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी सार्वजनिक है और जनता खुद उसका आकलन कर रही है.
हॉर्स ट्रेडिंग के सवाल पर ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’
स्थानीय निकाय चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि भाजपा की सोच और सरकार का विजन ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ है. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव और आचार संहिता लगने से सरकारी खर्च बढ़ता है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं. इसी वजह से सरकार एक साथ चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है. राठौड़ ने दावा किया कि राजस्थान में पहली बार 309 निकायों में एक साथ चुनाव हो रहे हैं. उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि राजस्थान देश में ऐसी पहली सरकार है, जिसने ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की अवधारणा को मूल रूप से आगे बढ़ाने का काम किया है.
डोटासरा के ‘काका’ वाले बयान पर तंज
राठौड़ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के पुराने बयान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि डोटासरा ने विधानसभा में दावा किया था कि उनके ‘काका’ भी एक साथ चुनाव नहीं करा सकते. राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि अब वही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान में एक साथ निकाय चुनाव करवा रहे हैं. राठौड़ ने कहा कि डोटासरा को मुख्यमंत्री को अपने ‘काका’ के रूप में याद करते रहना चाहिए. उन्होंने 25 सितंबर को होने वाली 24 हजार से अधिक सफाईकर्मियों की भर्ती का भी जिक्र किया. राठौड़ ने कांग्रेस सरकार पर सफाईकर्मियों के साथ ‘क्रूर मजाक’ करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि पिछली सरकार ने भर्ती की घोषणा की और महज तीन दिन बाद आचार संहिता लग गई.
खाचरियावास के बयान पर जताया अफसोस
पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर दिए गए बयान पर भी राठौड़ ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि खाचरियावास की पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है और उनका संबंध पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत से भी रहा है. ऐसे में उनसे इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं थी. राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था भी हैं. इसलिए राजनीतिक विरोध के बावजूद भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए. उन्होंने खाचरियावास के बयान को राजस्थान की राजनीतिक परंपरा और लोक-मर्यादा के लिहाज से दुर्भाग्यपूर्ण बताया. राठौड़ ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है. प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज भी मौजूद रहे.



