रिपोर्ट सब नॉर्मल, फिर भी पेट में रहता है दर्द ? AIIMS के डॉ. गोविंद मखारिया से जानिए साइलेंट बीमारी का सच और इलाज

Functional abdominal pain: क्या आप भी अक्सर पेट में दर्द से परेशान रहते हैं या दर्द कुछ दिन रूक जाता है और फिर से शुरू हो जाता है. वास्तव में अधिकांश लोग पेट में इस तरह के दर्द से परेशान रहते हैं. कई बार कुछ लोग डॉक्टर से भी दिखाते हैं और अल्ट्रासाउंड भी कराते हैं लेकिन रिपोर्ट नॉर्मल ही रहता है. सिर्फ कहा जाता है कि आंत में थोड़ी सी सूजन है. ऐसे में पीड़ित लोगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है. उन्हें समझ में नहीं आता कि इसके लिए क्या करना चाहिए. इन असमंजस वाली स्थिति में मरीज को क्या करना चाहिए, इस सवाल का जवाब जानने के लिए न्यूज 18 हिन्दी ने एम्स नई दिल्ली में गैस्ट्रोएंटेरेलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया से बात की.
पेट में दर्द क्यों होता है
हमने सबसे पहले यह जानने की कोशिश की पेट में दर्द होता ही क्यों है. अगर सूजन के कारण दर्द हो रहा है तो यह सूजन क्यों बनती है. डॉ. गोविंद मखारिया ने बताया कि जब पेट में सूजन हो जाए तो इसके कई कारण हो सकते हैं. आमतौर पर पेट में दर्द पेप्टिक अल्सर, इंफ्लामेटरी बाओल डिजीज, कुछ इंफेक्शन, क्रोंस डिजीज, अल्सरेटिव कोलाइटिस, सिलिएक डिजीज और यहां तक कि खून की कमी से भी हो सकता है. इतना ही नहीं, आंतों में कई सारी नसें होती है जो सीधे ब्रेन से जुड़ी होती है. जब आंतें अति संवेदनशील होने लगती है तो सामान्य पाचन, गैस या भोजन की मामूली हलचल को भी दिमाग तेज दर्द के रूप में महसूस करने लगता है. कभी-कभी आंतों की मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने का तालमेल बिगड़ जाता है जिससे ऐंठन और दर्द होता है. कुछ मामलों में बीमारी नहीं निकलती, इसे फंक्शनल एब्डोमिनल पेन कहा जाता है.यानी बिना किसी बीमारी के भी पेट में दर्द हो सकता है. ऐसे में मरीज को किस तरह का दर्द हो रहा है और किस तरफ और किस जगह हो रहा है, यह समझना जरूरी है. इसलिए अगर बार-बार कई दिनों से दर्द हो रहा हो तो पहले डॉक्टर से जरूर दिखाएं.
दर्द के कारणों का पता क्यों नहीं चलता
कई बार पेट में दर्द करता रहता है और फिर ठीक हो जाता है. यह क्रम लगातार चलता रहता है. डॉ. गोविंद मखारिया कहते हैं कि इसके भी कई कारण हो सकते हैं. कई बार आंतों में बहुत हल्की सूजन रहती है और इस कारण दर्द होता रहता है लेकिन इसका पता अल्ट्रासाउंड में भी नहीं चलता. दरअसल, यह सूजन इन्फेक्शन या ट्यूमर वाली भारी सूजन नहीं होती बल्कि इसे मेडिकल भाषा में माइक्रोस्कोपिक सूजन या लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन कहा जाता है. जब पेट की नसें लगातार तनाव में रहती हैं तो आंतों की अंदरुनी परत में हल्की जलन और लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन पैदा हो सकती है. इस कारण दर्द तो करेगा लेकिन इसका पता नहीं चलेगा. यह सूजन इतनी मामूली और सूक्ष्म होती है कि यह अल्ट्रासाउंड या साधारण टेस्ट में पकड़ में नहीं आती लेकिन आंतों के काम करने के तरीके को प्रभावित करती है. इसलिए इसे फंक्शनल एब्डोमिनल पेन कहा जाता है.
सूजन वाले दर्द को कैसे पहचानें
डॉ. गोविंद मखारिया बताते हैं कि आंतों की सूजन का दर्द हमेशा एक जैसा नहीं रहता. जब आंतों में भोजन या गैस गुजरती है या सूजन वाली जगह पर ऐंठन उठती है तो दर्द अचानक तेज हो जाता है. जब आंतें थोड़ी शांत होती हैं तो दर्द धीमा या मीठा-मीठा बना रहता है. खाना खाने के तुरंत बाद या 30-40 मिनट अंदर आंतों की गतिविधि तेज होती है जिससे सूजन वाले हिस्से में मरोड़ और तेज दर्द उठ सकता है. आंतों की अंदरुनी परत में सूजन के कारण आंतों का मार्ग थोड़ा संकरा या सुस्त हो जाता है. इससे पेट में बनी गैस आसानी से पास नहीं हो पाती और एक ही जगह फंस जाती है. इससे दर्द महसूस होता है. जब हवा बाहर निकलती है, तो आंतों का दबाव कम होता है और दर्द से तुरंत थोड़ी राहत महसूस होती है. कुछ मामलों में पेट फुला हुआ, कड़ा और ढोल की तरह तना हुआ महसूस हो सकता है. कभी-कभी पेट में मरोड़ उठने के बाद शौच जाने की तीव्र इच्छा होती है. फिर पेट साफ होने के बाद दर्द कम हो जाता है.
तनाव से भी दर्द
डॉ. गोविंद मखारिया कहते हैं कि यदि आतों में सूजन है तो तनाव लेने पर दर्द बढ़ सकता है. क्योंकि आंतों की नसें सीधे दिमाग से जुड़ी होती है. इसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है. दिमाग और आंतें आपस में लाखों तंत्रिकाओं और हार्मोन के जरिए लगातार जुड़ी रहती हैं. जब आप तनाव में रहेंगे तो इस दौरान दिमाग कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स रिलीज करता है. ये हार्मोन्स आंतों में मौजूद नसों को अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं. इससे आंतों की मामूली ऐंठन या गैस भी दिमाग को बहुत तेज दर्द के रूप में महसूस होने लगती है. तनाव की स्थिति में शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है. इससे आंतों की मांसपेशियों की सामान्य गति बिगड़ जाती है. आंतों की चाल सुस्त होने से कब्ज और गैस फंसने लगती है जिससे सूजन वाले हिस्से पर दबाव बढ़ता है और तेज दर्द होता है.
क्या यह कैंसर भी हो सकता है
डॉ. गोविंद मखारिया कहते हैं कि बहुत रेयर मामलों में यह कैंसर भी हो सकता है. कैंसर का दर्द लगातार होता रहेगा. आम सूजन वाला दर्द कभी होगा तो कभी नहीं होगा लेकिन कैंसर वाला दर्द लगातार होगा. ऐसे में अगर लगातार 15-20 दिनों से एक ही जैसा दर्द हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए.
क्या इस बीमारी का इलाज है
बिल्कुल है. पहले आप डॉक्टर से दिखाएं. अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टर निष्कर्ष निकालेंगे कि आपको पेट से संबंधित किस तरह की परेशानी है. दवा से आप ठीक हो सकते हैं. अगर दवा खाने के बाद भी दर्द आपका सही नहीं हो रहा है तो आप किसी विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर से दिखाएं.
इससे बचने के लिए क्या करें
इससे बचना बहुत आसान है. डॉ. गोविंद मखारिया बताते हैं कि पेट में सूजन वाली बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्यान दें. अपनी डाइट में फाइवर वाले फूड को शामिल करें. फास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड से बचें. घर का बना सुपाच्य भोजन करें. फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें. इसके साथ ही हर रोज एक्सरसाइज करें. दिन में कम से कम आधा घंटे की एक्सरसाइज जरूर करें. अगर तनाव है तो इसे भगाने के लिए रोज योग और मेडिटेशन करें. अगर तनाव तो भी नहीं जाता तो साइकेट्रिस्ट से दिखाएं. रोजाना पर्याप्त पानी पिएं और रात में सुकून भरी नींद लें. सुकून भरी नींद के लिए बिस्तर पर जाने से आधा-एक घंटे पहले मोबाइल की स्क्रीन को देखना छोड़ दें. पर्याप्त नींद नहीं लेंगे तो भी परेशानी बढ़ेगी. इसके साथ ही खुश रहने की कोशिश करें.
छोटी आंत में सूजन है तो फाइबर फूड न लें
कभी-कभी छोटी आंत में सूजन हो जाती है. इसके कारण छोटी आंतें सिकुड़ जाती है. डॉ. गोविंद मखारिया कहते हैं कि जब छोटी आंत में सूजन हो जाए तो फाइबर वाले फूड का सेवन न करें. फाइबर आंत के लिए हार्ड कंटेंट होता है. यह देर से पचता है इसलिए छोटी आंत में जमा होने लगता है. जब यह जमा होने लगेगा कि छोटी आंत में अटक जाएगा. इस स्थिति में छोटी आंत एकदम से बंद भी हो सकती है. इसलिए नॉन-फाइबर फूड का सेवन करें.



