सीकर में सेना का जुनून, ग्राउंड पर रोज दौड़ रहे हजारों युवा, 52 हजार से ज्यादा सैन्य परिवारों से जुड़ा जिला

Last Updated:September 15, 2026, 17:58 IST
सीकर की धरती पर सेना में जाने की परंपरा पीढ़ियों से कायम है, जिले के 16 हजार से ज्यादा जवान थलसेना, वायुसेना और नौसेना में देश सेवा कर रहे हैं, जबकि 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक युवाओं को भर्ती की तैयारी में मार्गदर्शन दे रहे हैं. 500 से ज्यादा ग्राउंड पर रोज हजारों युवा दौड़ और शारीरिक दक्षता की तैयारी करते हैं, अग्निवीर योजना के बाद भी सीकर के युवाओं का सेना में जाने का जुनून बरकरार है.
राजस्थान का सीकर जिला देश की रक्षा में योगदान के लिए अलग पहचान रखता है. जिले के गांवों और ढाणियों में सेना में जाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. वर्तमान में सीकर जिले के 16 हजार से अधिक जवान भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में अलग-अलग पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं.
सीकर में सिर्फ सेवारत जवान ही नहीं, बल्कि 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक भी रहते हैं. रिटायर्ड सैनिक और अधिकारी युवाओं के लिए मार्गदर्शक और ट्रेनर की भूमिका निभा रहे हैं. कई पूर्व सैनिक गांवों में युवाओं को शारीरिक परीक्षा और भर्ती की तैयारी निशुल्क करवाते हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सेना की तैयारी का माहौल लगातार मजबूत हुआ है.
जिले में सेना की तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 500 से ज्यादा ग्राउंड गांव-कस्बों में तैयार हो चुके हैं. सुबह होते ही इन मैदानों पर युवाओं की दौड़ शुरू हो जाती है. कोई दौड़ का अभ्यास करता है तो कोई लंबी कूद, पुशअप और अन्य शारीरिक दक्षता की तैयारी में जुटा रहता है.
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खास बात यह है कि इन ग्राउंड तक पहुंचने वाले युवाओं में शहरों के साथ-साथ गांव और ढाणियों के युवा भी बड़ी संख्या में शामिल हैं. कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर ही युवाओं ने तैयारी के लिए ट्रैक और मैदान विकसित किए हैं. पूर्व सैनिकों के अनुभव और युवाओं की मेहनत का यह मेल सीकर में सेना भर्ती की मजबूत संस्कृति तैयार कर रहा है.
अग्निवीर योजना आने के बाद भी सीकर के युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ है. जिले के करीब 4 हजार अग्निवीर थलसेना, वायुसेना और नौसेना में चयनित होकर ट्रेनिंग और सेवा में हैं. पूर्व सैनिकों के अनुसार, अग्निवीर भर्ती रैलियों में सीकर के युवाओं की भागीदारी लंबे समय से प्रदेश में सबसे अच्छी रही है.
सीकर में सेना से जुड़े लोगों की संख्या सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका असर सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है. सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक और अग्निवीर मिलाकर जिले से जुड़े सैन्य समुदाय की संख्या 52 हजार से अधिक है. इनके परिवारों का शिक्षा, आवास, बाजार और स्थानीय सेवाओं से जुड़ा आर्थिक योगदान भी अहम है.
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September 15, 2026, 17:58 IST



