Entertainment

रिलीज- 16 सितंबर 2016 | बजट- 30 करोड़ | कमाई- 157 करोड़: जब 3 हीरोइनों ने मिलकर बिगाड़ा था बॉक्स ऑफिस का हिसाब

Last Updated:September 16, 2026, 18:58 IST

16 सितंबर 2016 को बॉलीवुड के इतिहास में एक नए मोड़ की शुरुआत हुई. अनिरुद्ध रॉय चौधरी के डायरेक्शन और शूजित सरकार के प्रोड्यूस की हुई कोर्टरूम ड्रामा ‘पिंक’ इसी दिन थिएटर में रिलीज हुई थी. सिर्फ 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी दिल दहला देने वाली कहानी, सोशल मैसेज और दमदार परफॉर्मेंस से बॉक्स ऑफिस पर कमाई का सिलसिला तोड़ दिया. तीन आम लड़कियों (तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, एंड्रिया तियान) और अमिताभ बच्चन के आइकॉनिक किरदार वाली इस फिल्म ने दुनिया भर में 157 करोड़ से ज्यादा कमाए और सुपरहिट का दर्जा हासिल किया.

नई दिल्ली. जब 16 सितंबर 2016 को ‘पिंक’ बड़े पर्दे पर आई, तो इसे बहुत बड़े स्टारडम वाली फिल्म के तौर पर नहीं देखा गया. लेकिन, जब दर्शकों ने थिएटर में तीन आम महिलाओं के बीच न्याय की लड़ाई देखी, तो यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन का जरिया न रहकर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई.

फिल्म का कुल प्रोडक्शन बजट लगभग 30 करोड़ था. बिना किसी कमर्शियल गाने या मसाला एलिमेंट के इसने सिर्फ वर्ड-ऑफ-माउथ के दम पर भारत में 65 करोड़ से ज्यादा की कमाई की. दुनिया भर में 157 करोड़ से ज्यादा की कमाई के साथ ‘पिंक’ ने सभी बड़े बॉक्स ऑफिस पंडितों को हैरान कर दिया.

तापसी पन्नू (मीनल), कीर्ति कुल्हारी (फलक) और एंड्रिया तियांग (एंड्रिया) ने इंडिपेंडेंट कामकाजी महिलाओं के सामने आने वाली असली चुनौतियों को पूरी ईमानदारी से दिखाया. इन तीनों एक्ट्रेस की एक्टिंग काबिलियत और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया और साबित किया कि कंटेंट ही किंग है.

Add as Preferred Source on Google

दीपक सहगल के रोल में अमिताभ बच्चन ने बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित एक वकील का रोल किया. महिलाओं की इज्जत और हक पर कोर्टरूम में उनकी दलीलें सिनेमा के इतिहास में अमर हो गई हैं. जिस शांत और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अपना केस पेश किया, उसने फिल्म को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया.

‘पिंक’ ने भारतीय समाज को सहमति पर सबसे सटीक और मजबूत सबक सिखाया- ‘नहीं का मतलब नहीं होता ( No Means No).’ अमिताभ बच्चन की यह लाइन न सिर्फ फिल्म का टर्निंग प्वाइंट बनी, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सहमति और उनके प्रति पुरानी सोच पर देश भर में बहस भी छेड़ दी.

फिल्म का स्क्रीनप्ले (रितेश शाह का लिखा हुआ) इतना दमदार था कि दर्शक आखिर तक अपनी सीटों से चिपके रहे. कोर्टरूम में दलीलें, बेबाक मेलोड्रामा, पुरुष-प्रधान सोच पर तीखा हमला और फिल्म के सीन में असलियत को दिखाती बहसों ने ‘पिंक’ को हिंदी सिनेमा की सबसे अच्छी कोर्टरूम फिल्मों में शामिल कर दिया है.

‘पिंक’ न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, बल्कि ‘दूसरे सामाजिक मुद्दों पर बेस्ट फिल्म’ के लिए 64वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीता. फिल्म को यूनाइटेड नेशंस (UN) हेडक्वार्टर में भी दिखाया गया, जहां इसे दुनिया भर में बहुत तारीफ मिली.

16 सितंबर 2016 को रिलीज हुई ‘पिंक’ सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, बल्कि एक सोशल मूवमेंट थी. तीन हीरोइनों के संघर्ष और अमिताभ बच्चन की दमदार एक्टिंग की इस कहानी ने साबित कर दिया कि जब सिनेमा समाज की कड़वी सच्चाई को बिना किसी समझौते के दिखाता है, तो इतिहास बनता है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :

September 16, 2026, 18:58 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj