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राजस्थान में 2028 से पहले BJP के बड़े नेताओं के लिए अलर्ट? राजस्थान निकाय चुनाव ने दिखा दिया आईना

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने कई बड़े नेताओं के गढ़ में सियासी तस्वीर बदल दी है. चुनाव में बीजेपी ने कई बड़े शहरों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ ऐसे नतीजे भी आए हैं, जिन्होंने पार्टी के दिग्गज नेताओं की पकड़ पर सवाल खड़े किए हैं. खास तौर पर जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, पाली और झालावाड़ के नतीजे बीजेपी के लिए चर्चा का विषय बन गए हैं. वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है.

जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रभाव वाले शहर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी पर आ गया है. 100 वार्ड वाले जोधपुर नगर निगम में अब तक बीजेपी और कांग्रेस को 44-44 सीटें मिली हैं, जबकि 11 सीटें अन्य के खाते में गई हैं. एक सीट का परिणाम बाकी है. ऐसे में किसी भी पार्टी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षद यहां सत्ता की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

अजमेर में बड़ा झटका, बड़े नेताओं के गढ़ में क्या हुआअजमेर में भी बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. 80 वार्ड वाले नगर निगम में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी को 32 सीटें मिली हैं, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद जीते हैं. यहां भी कांग्रेस के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है, लेकिन बीजेपी भी बोर्ड बनाने के लिए जरूरी आंकड़े से दूर है. ऐसे में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.

भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर का परिणाम भी बीजेपी के लिए चिंता बढ़ाने वाला है. 65 वार्ड वाले भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों ने 36 सीटों पर जीत दर्ज की है. बीजेपी 20 सीटों पर रही, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 7 वार्डों में जीत मिली. BSP और RLP को एक-एक सीट मिली है. यानी भरतपुर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के आंकड़े से काफी दूर हैं और निर्दलीयों ने पूरा सियासी समीकरण बदल दिया है. यहां किसी एक पार्टी का स्पष्ट बोर्ड बनना आसान नहीं होगा.

पाली में मदन राठौड़ के गृह जिले में भी बहुमत नहीं
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाई. 65 वार्डों में कांग्रेस को 29 सीटें मिली हैं, जबकि बीजेपी 21 पर रही. 15 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन बहुमत के लिए उसे 34 सीटों की जरूरत है. ऐसे में पाली में भी निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखे हुए हैं.

झालावाड़ में वसुंधरा राजे के गढ़ में बीजेपी को बड़ा झटका
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. झालावाड़ नगर परिषद की 45 सीटों में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया. बीजेपी को यहां सत्ता से बाहर होना पड़ा. यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि झालावाड़ लंबे समय से वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक आधार वाले क्षेत्रों में गिना जाता रहा है. झालावाड़ जिले के कुल आठ निकायों की तस्वीर भी बीजेपी के लिए पूरी तरह एकतरफा नहीं रही. कांग्रेस ने चार निकायों में जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी तीन निकायों में जीत हासिल कर सकी. पिड़ावा में किसी भी दल को साफ बहुमत नहीं मिला और यहां आम आदमी पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.

बीकानेर में बीजेपी के लिए अलग कहानी
बीकानेर का परिणाम बाकी तस्वीर से अलग है. 80 वार्ड वाले नगर निगम में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. बीजेपी 27 सीटों पर रही, जबकि अन्य दलों और निर्दलीयों को भी सीटें मिली हैं. 42 सीटों के साथ कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए किसी दूसरे दल के सहारे की जरूरत नहीं है. इसलिए बीकानेर में यह कहना सही होगा कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के प्रभाव वाले क्षेत्र में बीजेपी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, लेकिन यह कहना कि कांग्रेस बहुमत नहीं बना पाई, आंकड़ों के हिसाब से गलत होगा.

नगर निगमों के नतीजों की तस्वीर

नगर निगमबीजेपीकांग्रेसअन्यस्थितिअजमेर323711कांग्रेस सबसे बड़ी, निर्दलीय निर्णायकबीकानेर274211कांग्रेस को स्पष्ट बहुमतउदयपुर53234बीजेपी को स्पष्ट बहुमतपाली212915कांग्रेस सबसे बड़ी, बहुमत से दूरअलवर282314बीजेपी सबसे बड़ीभरतपुर20738निर्दलीयों का दबदबाजोधपुर444411बीजेपी-कांग्रेस बराबर, एक सीट बाकीकोटा42202अभी परिणाम अधूरेजयपुर634413अभी परिणाम अधूरेभीलवाड़ा37912अभी परिणाम अधूरे

नतीजों का बड़ा संदेश क्या है
इन नतीजों की सबसे बड़ी बात यह है कि कई जगह बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने के बजाय निर्दलीयों ने पूरा समीकरण बदल दिया है. भरतपुर, पाली, अजमेर और जोधपुर इसके बड़े उदाहरण हैं. दूसरी तरफ उदयपुर और बीकानेर जैसे शहरों में तस्वीर काफी साफ रही है. राजस्थान के निकाय चुनावों में बीजेपी कुल मिलाकर कांग्रेस से आगे चल रही है, लेकिन बड़े नेताओं के प्रभाव वाले कई इलाकों में पार्टी को उम्मीद के मुताबिक स्पष्ट बढ़त नहीं मिली. ऐसे में इन नतीजों को सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस की जीत-हार के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. कई शहरों में स्थानीय नाराजगी और निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी ने भी चुनावी समीकरण बदल दिया है.

बीजेपी मजबूत स्थिति में है?यही वजह है कि 2026 के निकाय चुनावों का राजनीतिक संदेश मिलाजुला दिखाई दे रहा है. बीजेपी राज्य स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन उसके कई बड़े नेताओं के गढ़ में स्थानीय स्तर पर उसे चुनौती मिली है. कांग्रेस के लिए भी यह पूरी जीत नहीं है, क्योंकि कई जगह सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद वह बहुमत से दूर है. ऐसे में अब असली परीक्षा बोर्ड गठन के दौरान होगी.

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