Rajasthan

AAP और BAP छोड़ो… बसपा और लेफ्ट ने तो झंडे ही गाड़ दिए

Rajasthan Local Body Election Result: राजस्थान के निकाय चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है. 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में हुए चुनाव की मतगणना जारी है. अब तक सामने आए नतीजों में बीजेपी सबसे आगे दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस भी कई बड़े शहरों में मजबूत वापसी करती नजर आ रही है. लेकिन इस चुनाव का एक और दिलचस्प पहलू है. वह है छोटे दलों और निर्दलीयों का प्रदर्शन.

अभी तक नतीजों के मुताबिक बीजेपी 3475 वार्डों में जीत चुकी है, जबकि कांग्रेस के खाते में 2954 वार्ड आए हैं. निर्दलीयों ने भी 1965 वार्ड जीतकर अपनी ताकत दिखाई है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली तस्वीर बसपा और वाम दलों की है. बसपा ने 13 और माकपा ने 36 वार्डों में जीत दर्ज की है. वहीं आरएलपी के 55, बीएपी के 8 और आप के 10 वार्डों में जीतने की जानकारी सामने आई है. यानी राजस्थान की शहरी राजनीति में बीजेपी और कांग्रेस की लड़ाई के बीच छोटे दलों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.

बसपा और लेफ्ट ने कहां दिखाई ताकत?

निकाय चुनाव में बसपा और वाम दलों की सीटों की संख्या भले ही बीजेपी और कांग्रेस के मुकाबले बहुत छोटी हो, लेकिन इन नतीजों का राजनीतिक महत्व इससे ज्यादा है. खासकर माकपा की 36 सीटें यह बताती हैं कि राजस्थान के कुछ इलाकों में वाम दलों का स्थानीय संगठन अब भी जमीन पर मौजूद है. निकाय चुनाव में एक-एक वार्ड का मुकाबला बेहद स्थानीय मुद्दों पर होता है. ऐसे में किसी दल का लगातार कई वार्ड जीतना उसके स्थानीय कैडर और संगठन की मौजूदगी का संकेत देता है.

बसपा ने भी 13 वार्डों में जीत हासिल की है. यानी दलित और सामाजिक समीकरणों वाली राजनीति का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. दूसरी तरफ आरएलपी के 55 वार्ड और बीएपी के 8 वार्ड बताते हैं कि राजस्थान की राजनीति में क्षेत्रीय और सामाजिक आधार वाले दलों के लिए अभी भी जगह बनी हुई है.

निर्दलीयों ने भी मारी बड़ी बाजी

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर निर्दलीयों की है. अब तक के आंकड़ों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 1965 वार्डों में जीत दर्ज की है. इसका मतलब साफ है कि कई जगह मुकाबला सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस नहीं रहा. नगर निकाय चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, व्यक्तिगत छवि, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे कई बार पार्टी के चुनाव चिन्ह से ज्यादा असर डालते हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई है. कई निकायों में यही निर्दलीय आगे चलकर बोर्ड बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

बड़े शहरों में BJP-कांग्रेस की तस्वीर

10 नगर निगमों की तस्वीर देखें तो मुकाबला काफी दिलचस्प है. उदयपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिलने की स्थिति बनी है. जयपुर, कोटा और अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. वहीं पाली, बीकानेर और अजमेर में कांग्रेस ने बढ़त बनाई है. जोधपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है, जबकि भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं. यानी बड़े शहरों में बीजेपी की बढ़त जरूर है, लेकिन कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण नगर निगमों में वापसी करके मुकाबला एकतरफा नहीं होने दिया.

जयपुर में बीजेपी आगे

राजस्थान की राजधानी जयपुर पर सबकी नजर थी. जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में मतगणना हो रही है. अब तक घोषित परिणामों में बीजेपी ने 57 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 40 वार्ड मिले हैं. निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने 11 वार्डों में जीत हासिल की है. बाकी वार्डों की मतगणना जारी है. इसलिए जयपुर की अंतिम तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है.

पाली में BJP प्रदेश अध्यक्ष को झटका

सबसे ज्यादा चर्चा पाली की हो रही है. पाली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह क्षेत्र है. लेकिन पाली नगर निगम में कांग्रेस ने बढ़त बना ली है. अब तक के आंकड़ों के मुताबिक पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29 उम्मीदवार जीते हैं, जबकि बीजेपी को 21 वार्डों में जीत मिली है. निर्दलीयों ने भी 15 वार्ड जीतकर समीकरण को दिलचस्प बना दिया है. इसलिए यहां बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस को निर्दलीयों की जरूरत पड़ सकती है.

पाली की आसपास की नगर पालिकाओं में हालांकि बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत रहा है. सोजत सिटी में बीजेपी के 23, कांग्रेस के 8 और निर्दलीयों के 2 उम्मीदवार जीते हैं. सोजत रोड में बीजेपी 14, कांग्रेस 7 और निर्दलीय 4 सीटों पर जीते हैं. मारवाड़ जंक्शन में तो दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवार 11-11 सीटों पर जीते हैं. यहां तीन निर्दलीय निर्णायक हो सकते हैं.

बीकानेर में कांग्रेस आगे, निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल के लोकसभा क्षेत्र बीकानेर में भी कांग्रेस ने बीजेपी को पीछे छोड़ा है. बीकानेर नगर निगम के घोषित 36 वार्डों में कांग्रेस ने 17 सीटें जीती हैं. बीजेपी को 13 सीटें मिली हैं. आरएलपी को एक और निर्दलीयों को पांच सीटें मिली हैं. यहां निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. अगर किसी दल को बहुमत के लिए इनकी जरूरत पड़ती है तो बोर्ड बनाने में निर्दलीय पार्षद किंगमेकर बन सकते हैं.

नगर परिषद और पालिकाओं में BJP का दबदबा

नगर निगमों से अलग नगर परिषद और नगर पालिकाओं की तस्वीर बीजेपी के पक्ष में ज्यादा मजबूत है. 47 नगर परिषदों में बीजेपी 33 पर, कांग्रेस 13 पर और अन्य एक पर आगे है. वहीं 252 नगर पालिकाओं में बीजेपी 153, कांग्रेस 91 और अन्य 8 निकायों में आगे है. यानी छोटे शहरी निकायों में बीजेपी का संगठन और प्रदर्शन ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है.

वसुंधरा राजे के गढ़ में कांग्रेस की सेंध

चुनाव की एक और बड़ी खबर झालावाड़ से आई है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में कांग्रेस बोर्ड बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. वहीं बारां में आम आदमी पार्टी ने भी मुकाबले को दिलचस्प बनाया है. यह तस्वीर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान की शहरी राजनीति में बीजेपी के मजबूत माने जाने वाले इलाकों में विपक्षी दलों की सेंध को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी देखा जाएगा.

2028 के लिए क्या संकेत?

राजस्थान के निकाय चुनाव विधानसभा चुनाव का सीधा जनमत संग्रह नहीं होते. लेकिन इनसे पार्टियों के संगठन और शहरी इलाकों में उनकी पकड़ का अंदाजा जरूर मिलता है. अभी तक की तस्वीर में बीजेपी स्पष्ट रूप से आगे है. बड़े शहरों और नगर पालिकाओं में उसका प्रदर्शन मजबूत है. कांग्रेस ने भी पाली, बीकानेर और अजमेर जैसे अहम इलाकों में वापसी की है. लेकिन इस चुनाव की एक और कहानी है.

निर्दलीय करीब दो हजार वार्डों में जीत रहे हैं. आरएलपी ने 55, माकपा ने 36, बीएसपी ने 13, आप ने 10 और बीएपी ने 8 वार्डों में जीत दर्ज की है. यानी राजस्थान की शहरी राजनीति में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं है. कई इलाकों में स्थानीय चेहरे और छोटे दल अब भी अपना असर रखते हैं.

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