Moth Bean Farming I bikaner news I मोठ की खेती को मिलेगा ग्लोबल विस्तार, विदेश भेजे गए 70 से ज्यादा जीनोटाइप

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बीकानेर की मोठ का इंटरनेशनल टेस्ट, अलग-अलग देशों में परखी जाएगी पैदावार
Last Updated:September 20, 2026, 18:46 IST
Moth Bean Farming: बीकानेर की शुष्क जमीन पर उगने वाली मोठ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रही है. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने मोठ के 70 से अधिक जीनोटाइप विदेश भेजे हैं, जहां अलग-अलग जलवायु और कम पानी वाले क्षेत्रों में इनकी उत्पादन क्षमता का परीक्षण होगा. सफल परिणाम मिलने पर राजस्थान की मोठ की खेती का दायरा दूसरे देशों तक बढ़ सकता है.
बीकानेर. जिले में विकसित मोठ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुष्क क्षेत्रों की खाद्य सुरक्षा और दलहन उत्पादन की संभावनाओं का हिस्सा बन रहा है. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने अनुसंधान और परीक्षण के लिए मोठ के 70 से अधिक जीनोटाइप विदेश भेजे हैं. इन जीनोटाइप के माध्यम से अलग-अलग जलवायु और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मोठ की उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा. सफल परिणाम मिलने पर राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में होने वाली मोठ की खेती का दायरा दूसरे देशों तक बढ़ सकता है. विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. एन.के. शर्मा ने बताया कि किर्कहाउस ट्रस्ट, यूनाइटेड किंगडम और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से मोठ पर अनुसंधान किया जा रहा है. इसके तहत विश्वविद्यालय में उपलब्ध मोठ की अलग-अलग आनुवंशिक सामग्री को विदेश भेजा गया है. इन जीनोटाइप का परीक्षण कर यह पता लगाया जाएगा कि कौन-सी सामग्री शुष्क जलवायु, सीमित पानी और बदलते तापमान में बेहतर उत्पादन दे सकती है.
डॉ. शर्मा ने बताया कि मोठ राजस्थान के शुष्क इलाकों के लिए लाइफलाइन की तरह है. बारिश कम होने और दूसरी फसलों के उत्पादन की संभावनाएं कमजोर पड़ने पर किसान मोठ को अंतिम और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखते हैं. कम पानी में तैयार होने वाली यह दलहनी फसल प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता रखती है. राजस्थान में करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोठ की खेती की जाती है. विश्वविद्यालय उन्नत किस्मों के विकास के साथ फसल प्रबंधन, पौध संरक्षण, कीट और बीमारियों की रोकथाम पर भी अनुसंधान कर रहा है. बीज उत्पादक संस्थाओं को प्रजनक बीज और किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध करवाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य अनुसंधान से तैयार तकनीक और उन्नत बीज को किसानों तक पहुंचाकर मोठ का उत्पादन बढ़ाना है.
बीकानेरी भुजिया उद्योग की भी मोठ पर निर्भरताबीकानेर के लिए मोठ का महत्व खेती तक सीमित नहीं है. यहां के विश्व प्रसिद्ध भुजिया उद्योग का उत्पादन भी काफी हद तक मोठ पर निर्भर हैं. डॉ. शर्मा के अनुसार बीकानेरी भुजिया बनाने में करीब 80 प्रतिशत मोठ का उपयोग होता है. मोठ का उत्पादन प्रभावित होने पर इसका सीधा प्रभाव भुजिया के उत्पादन, कीमत और इससे जुड़े उद्योगों पर पड़ता है. बीकानेरी भुजिया देश के साथ विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है. इस कारण मोठ की पैदावार बढ़ाना किसानों की आय, स्थानीय उद्योग और विदेशी मुद्रा अर्जित करने की दृष्टि से आवश्यक है. बेहतर उत्पादन से भुजिया उद्योग को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा.
आरएम-2251 किस्म शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगीकृषि विश्वविद्यालय में संचालित मोठ परियोजना के अंतर्गत अब तक आठ से दस उन्नत किस्में विकसित की गई हैं. इनमें आरएम-225, आरएम-257 और आरएम-435 सहित कई किस्में शामिल हैं. हाल ही में विकसित आरएम-2251 किस्म को बीकानेर और राजस्थान के दूसरे शुष्क क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी माना गया है. म्यूटेशन ब्रीडिंग तकनीक से विश्वविद्यालय ने ऐसी किस्म भी विकसित की है, जो 70 दिन से कम समय में पककर तैयार हो जाती है. कम अवधि में पकने वाली किस्म सीमित वर्षा वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए लाभदायक हो सकती है. इससे बारिश रुकने की स्थिति में फसल खराब होने का खतरा कम किया जा सकता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
September 20, 2026, 18:46 IST



