छुट्टी के दिन भी खुला हाईकोर्ट, रात 10 बजे तक चली सुनवाई; कई पार्षदों को गिरफ्तारी से राहत

जोधपुर. राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच हाईकोर्ट में भी खीचतान देखने को मिली. इतिहास में पहली बार है कि राजस्थान हाईकोर्ट में पहली बार है कि छुट्टी वाले दिन भी रात 10 बजे तक याचिकाओं पर सुनवाई होती रहीं. कुचेरा से लेकर हनुमानगढ़, बीकानेर और श्रीविजयनगर तक, चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों और नवनिर्वाचित पार्षदों ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था. इस तरह कुल 6 मामलों में कार्रवाई की गई.
दोपहर में कुचेरा के प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा को राहत मिली, जबकि शाम तक पांच अन्य मामलों में भी अलग-अलग एकलपीठों ने सुनवाई की. कुछ मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई, तो एक मामले में बिना कानूनी प्रक्रिया के दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए.
बीकानेर के मकसूद अहमद को भी राहत
एक अन्य मामले में बीकानेर यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष और नवनिर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद ने अदालत का रुख किया. जानकारी के मुताबिक, उन्हें एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में सोमवार सुबह मतदान के दिन पूछताछ के लिए बुलाया गया था.
गिरफ्तारी की आशंका के चलते अधिवक्ता सचिन आचार्य ने उनकी ओर से कोर्ट में पैरवी की. सुनवाई के दौरान अदालत ने मकसूद अहमद को राहत प्रदान की. मामले में गिरफ्तारी से जुड़ी राहत की शर्तें और आगे की कानूनी प्रक्रिया कोर्ट के आदेश के अनुसार तय होंगी.
कुचेरा के प्रत्याशी को सबसे पहले राहत
छुट्टी के दिन हाईकोर्ट में सुनवाई की शुरुआत कुचेरा के प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा के मामले से हुई. मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बाद दोपहर में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया.
इसके बाद शाम तक पांच अन्य अहम मामलों की सुनवाई अलग-अलग एकलपीठों में हुई. इन मामलों में कई पार्षदों और सभापति पद के उम्मीदवारों ने चुनाव के दौरान पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका जताई थी.
श्रीविजयनगर में सुशील मिड्ढा को राहत
श्रीविजयनगर में सभापति पद के उम्मीदवार सुशील मिड्ढा उर्फ बिट्टू मिड्ढा के खिलाफ चुनाव की घोषणा के ठीक अगले दिन भारतीय न्याय संहिता यानी BNS और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की अदालत में हुई. राज्य सरकार ने आरोपों को गंभीर बताते हुए याचिका का विरोध किया. हालांकि, अदालत ने घटनाक्रम की टाइमिंग को ध्यान में रखते हुए सुशील मिड्ढा की गिरफ्तारी पर 7 अक्टूबर तक रोक लगा दी.
हनुमानगढ़ की पार्षद मंजू को कोर्ट से राहत
हनुमानगढ़ नगर परिषद की पार्षद मंजू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आशंका जताई. उन्हें आशंका था कि राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें परेशान किया जा सकता है. साथ ही उन्हें मतदान से रोका जा सकता है.
वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली की दलीलों पर न्यायाधीश कुलदीप माथुर की पीठ ने सुनवाई की. कोर्ट ने निर्देश दिया कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना पार्षद के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए. इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और जिला निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सभी से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.
नौ अन्य पार्षदों की गिरफ्तारी पर भी रोक
हनुमानगढ़ के ही नौ अन्य नवनिर्वाचित पार्षदों ने भी सभापति चुनाव के दौरान गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था. मामले की सुनवाई न्यायाधीश नुपूर भाटी की पीठ ने की. सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी नौ पार्षदों की गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश जारी कर दिया. इस आदेश से चुनाव के दौरान गिरफ्तारी की आशंका का सामना कर रहे पार्षदों को फिलहाल राहत मिली है.
चुनावी माहौल में कानूनी लड़ाई तेज
राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद बोर्ड बनाने की प्रक्रिया के बीच कई प्रत्याशी और पार्षद कानूनी राहत के लिए हाईकोर्ट पहुंच रहे हैं. अदालतों में हुई इन सुनवाइयों में कुछ मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है, जबकि कुछ में पुलिस को कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.



