Rajasthan

कांग्रेस के 42 वोट, भाजपा की नजर निर्दलीयों पर, किसका बदलेगा खेल?

बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर नगर निगम में मेयर की कुर्सी के लिए आज सियासी मुकाबला होगा. सुबह 10 बजे से मतदान शुरू हो गया है और वोटिंग के बाद मतगणना कर नतीजे घोषित किए जाएंगे. मेयर पद के लिए कांग्रेस ने अनिल कल्ला को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से सुरेंद्र सिंह शेखावत प्रत्याशी हैं. 80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, 10 अन्य और एक आरएलपी पार्षद हैं. इस संख्या बल में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से एक सीट आगे है, जबकि भाजपा बहुमत से पीछे है.

इसके बावजूद भाजपा ने निर्दलीय और अन्य पार्षदों के समर्थन के जरिए चुनावी गणित बदलने की रणनीति बनाई है. भाजपा की ओर से निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है. वहीं कांग्रेस ने अपने पार्षदों की एकजुटता दिखाने के लिए तस्वीरें जारी कर ‘ऑल इज वेल’ का संदेश दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि मतदान के दौरान कौन सा खेमा अपने पार्षदों को साथ रखने में कामयाब रहता है और क्या गैर-कांग्रेसी पार्षदों के रुख से चुनाव का गणित बदलता है.

कांग्रेस का संख्या बल मजबूत, लेकिन एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती

नगर निगम के मौजूदा गणित में कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं. बहुमत के लिए 41 पार्षदों का आंकड़ा जरूरी है. यानी कांग्रेस के पास बहुमत से एक अधिक संख्या है. यही वजह है कि कांग्रेस की रणनीति अपने पार्षदों को एकजुट रखने की है. पार्टी की ओर से एकजुटता की तस्वीरें जारी कर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि उसके पार्षद साथ हैं. हालांकि मेयर चुनाव में सिर्फ संख्या बल ही निर्णायक नहीं होता. क्रॉस वोटिंग या किसी पार्षद के मतदान से अलग रहने की स्थिति में समीकरण प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए कांग्रेस खेमे की नजर अपने पार्षदों के साथ-साथ उन पार्षदों पर भी है जो किसी दल के स्पष्ट खेमे में नहीं हैं.

भाजपा बहुमत से दूर, निर्दलीय और अन्य पार्षदों पर नजर

भाजपा के पास 27 पार्षद हैं. उपलब्ध संख्या के आधार पर पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे है. ऐसे में भाजपा के सामने सुरेंद्र सिंह शेखावत को जिताने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती है. पार्टी निर्दलीय और अन्य पार्षदों के समर्थन का दावा कर रही है. भाजपा की रणनीति में उन 10 अन्य और एक आरएलपी पार्षद की भूमिका अहम हो सकती है. हालांकि इन पार्षदों में से कितने किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा. भाजपा की कोशिश कांग्रेस के संख्या बल में सेंधमारी करने के साथ गैर-कांग्रेसी पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की है.

कांग्रेस ने एकजुटता दिखाई, भाजपा भी समर्थन का दावा कर रही

मेयर चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल अपने-अपने स्तर पर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. कांग्रेस ने अपने पार्षदों की एकजुटता वाली तस्वीरें जारी कर पार्टी में सब कुछ ठीक होने का संदेश दिया है. दूसरी ओर भाजपा की ओर से निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है. ऐसे में बीकानेर का चुनाव सीधे तौर पर दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के साथ-साथ पार्षदों के रुख पर भी निर्भर करेगा. कांग्रेस के अनिल कल्ला के सामने अपनी बढ़त को वोट में बदलने की चुनौती है, जबकि भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत के सामने संख्या बल से बाहर जाकर समर्थन जुटाने की चुनौती है.

कांग्रेस संगठन से जुड़े नेताओं को नोटिस, पुलिस पर लगाए आरोप

मेयर चुनाव के बीच कांग्रेस संगठन से जुड़े नेताओं को नोटिस दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनपुट के अनुसार कांग्रेस पार्टी के एक पदाधिकारी को एसपी-एसीपी स्तर पर नोटिस भेजा गया है और सुबह 10 बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया है. पार्टी संगठन इकाई को भी नोटिस भेजे जाने की बात कही गई है. कांग्रेस से जुड़े नेता अरुण और राजीव टंडन को भी नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है. कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस तंत्र के जरिए उसके पार्षदों और नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है. वहीं भाजपा की ओर से भी कांग्रेस नेताओं को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है. इन आरोपों और नोटिस की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध इनपुट से नहीं हुई है.

मतदान के बाद मतगणना, तभी साफ होगा मेयर का फैसला

बीकानेर नगर निगम में सुबह 10 बजे मतदान शुरू होगा. वोटिंग पूरी होने के बाद मतगणना की जाएगी. इसके साथ ही यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस के 42 पार्षदों का संख्या बल अनिल कल्ला को मेयर की कुर्सी तक पहुंचाता है या भाजपा अपने 27 पार्षदों के अलावा निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाकर चुनावी समीकरण बदलने में सफल होती है. फिलहाल दोनों खेमों की नजर क्रॉस वोटिंग और गैर-कांग्रेसी पार्षदों के रुख पर है. कांग्रेस अपने बहुमत को सुरक्षित रखने की कोशिश में है, जबकि भाजपा संख्या बल की कमी को समर्थन के जरिए पूरा करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है. नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बीकानेर की मेयर की कुर्सी अनिल कल्ला के पास जाती है या सुरेंद्र सिंह शेखावत के खाते में.

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