बारिश नहीं तो कैसे होगा बप्पा का विसर्जन? पाली में सूखे जलाशयों के बीच ग्रामीणों का काम आया ‘मेगा जुगाड़’

पाली. देशभर में इन दिनों बप्पा की विदाई का सिलसिला चल रहा है. ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति बाप्पा मोरया के जयकारे गूंज रहे हैं. लेकिन… क्या हो जब गजानन को विदा करने के लिए पानी ही ना बचे? जी हां, राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी ही बड़ी समस्या सामने आई. बारिश की कमी ने आऊवा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में ऐसा सूखा डाला कि गांव के पुराने जलस्रोत और तालाब पूरी तरह सूख गए. ऐसे में भक्तों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि आखिर अपने आराध्य का विसर्जन करें तो करें कहां?
जब कुदरत ने धोखा दिया और क्षेत्र के सभी जलस्रोत सूख गए, तो ग्रामीणों ने हार मानने के बजाय ऐसा ‘मेगा जुगाड़’ लगाया जिसने पूरे इलाके में आस्था की एक नई मिसाल कायम कर दी है. पाली जिले के ऐतिहासिक गांव आऊवा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस साल बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है. कम बारिश के कारण गांव के सदियों पुराने जलस्रोत, तालाब और पोखर पूरी तरह से सूखे पड़े हैं. गणेश उत्सव के पावन अवसर पर जैसे ही प्रतिमा विसर्जन का समय पास आया, श्रद्धालुओं और आयोजकों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह खड़ी हो गई कि अपने आराध्य का विसर्जन आखिर कहां करें? जलाशयों में पानी की एक-एक बूंद न होने से बप्पा की विदाई का उत्सव अधर में लटकता दिख रहा था.
कम बारिश में ग्रामीणों का जुगाड़
इस विकट स्थिति में गांव के ‘गणपति युवा मित्र मंडल’ ने मोर्चा संभाला. समिति के सदस्य लक्ष्मण प्रजापत, रमेश चौधरी और जितेंद्र सुथार ने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान तलाशने की ठानी. युवाओं ने तय किया कि अगर कुदरत से पानी नहीं मिला, तो वे खुद पानी का इंतजाम करेंगे. विसर्जन के लिए गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित ‘कदंब नाड़ी’ को चुना गया, लेकिन वह भी पूरी तरह सूखी थी.
घंटो की कड़ी मेहनत से बनाया नया जलाशय
समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने तुरंत जेसीबी मशीन मंगवाई और बिना समय गंवाए कदंब नाड़ी तक एक नाला खोद डाला. इसके बाद पास ही स्थित ‘बेरा वनावा’ के ट्यूबवेल का सहारा लिया गया. ट्यूबवेल से लगातार पानी चलाकर इस नए बने नाले के जरिए पानी को कदंब नाड़ी तक पहुंचाया गया. कड़ी मेहनत और घंटों तक चले इस अभियान के बाद सूखी पड़ी कदंब नाड़ी पानी से लबालब भर गई.
आपके यहां भी बारिश का अकाल तो ऐसे करें जुगाड़
ग्रामीणों के इस भगीरथ प्रयास की बदौलत अब आऊवा ही नहीं, बल्कि आसपास के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग बप्पा की प्रतिमाएं लेकर आऊवा पहुंच रहे हैं. कदंब नाड़ी में पर्याप्त पानी हो जाने से श्रद्धालु अब खुशी-खुशी और पूरे विधि-विधान के साथ अपने आराध्य का विसर्जन कर रहे हैं. ग्रामीणों की इस अनूठी पहल और सामूहिक प्रयास की पूरे जिले में जमकर तारीफ हो रही है, जिसने साबित कर दिया कि अटूट श्रद्धा के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती.



