World

Chilling Prediction for 2050: 2050 तक खत्म हो जाएगी हमारी दुनिया? इतिहासकार ने दिखाया ऐसा भविष्य सोचकर ही खड़े हो जाएंगे रोंगटे

Last Updated:September 25, 2026, 12:31 IST

Chilling Prediction About Humanity: हमारी दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है, जो रोजाना देखने के बाद भी हम नजरअंदाज कर देते हैं. इसे लेकर अमेरिकी इतिहासकार जेरेड डायमंड ने ऐसी भविष्यवाणी की है, जो डरा देने वाली है. ये कई ज्योतिष की गणना नहीं बल्कि मौजूदा हालात को देखते हुए 25 साल बाद का खौफनाक भविष्य है. 2050 तक खत्म हो जाएगी दुनिया? इतिहासकार ने दिखाया ऐसा भविष्य, कांप जाएगी रूहZoomइतिहासकार की डरावनी भविष्यवाणी, 2050 तक बदल जाएगी दुनिया की तस्वीर. (Credit- Canva/सांकेतिक तस्वीर)

How world will look in 2050: कल्पना कीजिए… आज से करीब 25 साल बाद दुनिया वैसी न रहे, जैसी हम उसे जानते हैं. शहर हों, तकनीक हो, इंसान हों, लेकिन हमारी सभ्यता का मौजूदा ढांचा धीरे-धीरे बिखर चुका हो. सुनने में ये किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन अमेरिकी इतिहासकार और रिसर्चर जेरेड डायमंड ने भविष्य को लेकर ऐसी ही गंभीर आशंका जताई है. डायमंड के मुताबिक करीब 49 प्रतिशत संभावना है कि साल 2050 तक दुनिया में मौजूदा व्यवस्था गंभीर रूप से ढह सकती है और सब खत्म हो जाएगा.

जेरेड डायमंड ने यह बात एक इंटरव्यू में कही. हालांकि यह किसी निश्चित भविष्यवाणी के बजाय उनके आकलन और वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर जताई गई आशंका है. डायमंड की चिंता किसी एक युद्ध या प्राकृतिक आपदा को लेकर नहीं है, न ही ये कोई गणनाओं के आधार पर की गई भविष्यवाणी ही है. उनके मुताबिक असली खतरा उन संसाधनों से जुड़ा है, जिन पर आज की सभ्यता और दुनिया की पूरी इमारत खड़ी है.

कैसे खत्म हो रहा है सभ्यता का ढांचा?

डायमंड कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में मछलियों के भंडार, खेती की जमीन, मिट्टी और मीठे पानी का इस्तेमाल लंबे समय तक टिकाऊ तरीके से नहीं किया जा रहा. अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले दशकों में इन संसाधनों पर भारी दबाव पड़ सकता है. सबसे रहस्यमयी सवाल यहीं से पैदा होता है- अगर जमीन की उपजाऊ शक्ति घटती गई, पानी की कमी बढ़ती गई और समुद्रों से मछलियां कम होती गईं, तो अरबों लोगों को भोजन और पानी कैसे मिलेगा? इसे लेकर ही डायमंड का अनुमान है कि मौजूदा तरीके से संसाधनों का इस्तेमाल कुछ दशकों तक तो चलता रह सकता है, लेकिन करीब 2050 के आसपास यह व्यवस्था अपनी सीमा तक पहुंच सकती है. तब दुनिया के सामने दो रास्ते होंगे- या तो टिकाऊ जीवनशैली अपना ली जाए, या फिर बहुत देर हो चुकी होगी.

क्या बच सकते हैं ऐसी स्थिति से?

यहां पर डायमंड की बात का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है. उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि भविष्य पूरी तरह से अंधकार से भरा हुआ है. उनका कहना है कि बदलाव केवल सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. हर इंसान अपने स्तर पर कम ईंधन इस्तेमाल करने, कम गाड़ी चलाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा सकते हैं. कंपनियां भी उत्पादन और संसाधनों के इस्तेमाल के तरीके बदल सकती हैं. वहीं सरकारें पर्यावरण, परिवहन, पानी और कृषि से जुड़ी नीतियों में बड़े बदलाव कर सकती हैं. 2050 अभी दूर लगता है, लेकिन सवाल बेहद करीब है कि क्या इंसान अपनी विकास की रफ्तार बदल पाएगा, इससे पहले कि धरती के संसाधन उसे बदलने पर मजबूर कर दें? ये डायमंड की 49 प्रतिशत वाली चेतावनी को और भी रहस्यमयी और गंभीर बना देता है.

About the AuthorPrateeti Pandey

में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…

और पढ़ेंFirst Published :

September 25, 2026, 12:31 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj