बिना गॉडफादर के मुंबई पहुंचे थे देव आनंद, कभी नौकरी कर चलाया अपना खर्च, फिर बन बैठे हिंदी सिनेमा के ‘गाइड’

Last Updated:September 26, 2026, 04:06 IST
बेमिसाल अंदाज और शानदार अभिनय के दम पर देव आनंद ने हिंदी सिनेमा में 6 दशकों तक राज किया. बहुत लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लाखों दिलों की धड़कन बनने से पहले सुपरस्टार ने मुंबई की सड़कों पर कड़ा संघर्ष झेला था. जेब में कुछ पैसे और आंखों में बड़े सपने लिए बॉलीवुड में बिना किसी गॉडफादर के अपनी किस्मत खुद लिखी. ‘जिद्दी’ और ‘गाइड’ जैसी ऐतिहासिक फिल्मों से हिंदी सिनेमा का चेहरा बदलने वाले देव आनंद का सफर बेहद प्रेरणादायक है.
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देव आनंद ने 6 दशक तक सिनेमा पर किया राज. (फोटो साभार: Instagram@evergreen_dev_anand)
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में देव आनंद एक ऐसे स्टार रहे, जिनकी जादुई शख्सियत ने हर दौर के दर्शकों को अपना दीवाना बनाया. उनका खास अंदाज, बोलने की अदा, अनोखी चाल और स्टाइल स्टेटमेंट ही उनकी असली पहचान बन गई थी. करीब 6 दशकों तक भारतीय सिनेमा पर एकछत्र राज करने वाले देव आनंद ने न सिर्फ अभिनय की दुनिया में नए आयाम स्थापित किए, बल्कि एक सफल निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में भी खुद को साबित किया. आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी है और इस मौके पर हम आपको उनके फिल्मी सफर के बारे में बताते हैं.
देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था. उस समय उनका नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था. उन्होंने लाहौर से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की. पढ़ाई के बाद वह 1943 में मुंबई पहुंचे. उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और फिल्मी दुनिया में कोई बड़ा सहारा भी नहीं था. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुंबई आने के बाद करीब दो साल संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने शुरुआत में नौकरी भी की, लेकिन उनका सपना फिल्मों में काम करना था.
‘जिद्दी’ फिल्म ने देव आनंद को दिलाई पहचान
उन्हें साल 1946 में आई फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का मौका मिला. इसके बाद 1948 में आई फिल्म ‘जिद्दी’ ने देव आनंद को पहचान दिलाई. वह धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के बड़े स्टार्स में शामिल हो गए. उन्होंने अपने भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर नवकेतन फिल्म्स की शुरुआत की. इस बैनर के तहत उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाईं और नए कलाकारों को भी मौके दिए.
‘गाइड’ बनी देव आनंद के करियर की खास फिल्म
1950 और 60 का दशक देव आनंद के करियर का खास दौर रहा. इस दौरान उनकी ‘बाजी’, ‘जाल’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘काला पानी’, ‘काला बाजार’, ‘गाइड’ और ‘ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्में रिलीज हुई. विजय आनंद के साथ उनकी जोड़ी ने ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘काला बाजार’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ जैसी फिल्में दीं. उनके करियर की सबसे खास फिल्मों में ‘गाइड’ को भी गिना जाता है.
डायरेक्शन और प्रोडक्शन में भी आजमाया हाथ
देव आनंद ने सिर्फ एक्टिंग नहीं की, बल्कि डायरेक्शन और प्रोडक्सन में भी हाथ आजमाया. ‘प्रेम पुजारी’, ‘हरे राम हरे कृष्णा’ और कई दूसरी फिल्मों के जरिए उन्होंने नए कलाकारों को जगह दी. वह अपने आखिरी समय तक फिल्मों को लेकर सक्रिय रहे. 2011 में आई ‘चार्जशीट’ उनकी आखिरी फिल्म थी. उन्होंने 88वें बर्थडे पर भी कहा था कि जब तक उनका शरीर और दिमाग साथ देगा, फिल्में बनाते रहेंगे.
साल 2011 में दुनिया छोड़कर चले गए थे देव आनंद
देव आनंद को कई बड़े अवॉर्ड्स मिले. उन्हें ‘काला पानी’ और ‘गाइड’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिले. उन्हें 1991 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला. उन्हें भारत सरकार ने 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया और 2002 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया. देव आनंद का निधन 3 दिसंबर 2011 को लंदन में 88 साल की उम्र में हुआ था.
About the AuthorKamta PrasadSenior Sub Editor
कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
September 26, 2026, 04:06 IST



