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₹70000 करोड़ की डिफेंस डील को लेकर आई गुड न्‍यूज – rupees 70000 crore P75I AIP Submarine Deal Germany Finalise Internal Process

Last Updated:September 27, 2026, 13:43 IST

AIP Submarine Deal: भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को लगातार मजबूत कर रहा है. आसमान से लेकर समंदर और पाताल लोक तक को सेफ करने की पूरी कोशिश की जा रही है. कुछ महीनों पहले ही भारत ने फ्रांस से 100 से ज्‍यादा राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दी थी. अब भारत ने जर्मनी के साथ अल्‍ट्रा मॉडर्न P-75I AIP सबमरीन खरीद को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. पाताल लोक का बादशाह...₹70000 करोड़ की डिफेंस डील को लेकर आई गुड न्‍यूजZoomजर्मनी P-75I AIP सबमरीन डील को लेकर इंटरनल प्रोसेस को पूरा कर लिया है. अब भारत की कैबिनेट कमेटी की मंजूरी का इंतजार है. (फाइल फोटो)

AIP Submarine Deal: भारत डिफेंस सेक्‍टर में लगातार अपने कदम आगे बढ़ा रहा है. मिसाइल के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों का लोहा पूरी दुनिया मानती है. अब देश के रक्षा वैज्ञानिक AMCA प्रोग्राम के तहत नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने में जुटे हैं. मैरिटाइम सिक्‍योरिटी को मजबूत करने के लिए लगातार वॉरशिप बनाए जा रहे हैं. तीसरा एयरक्राफ्ट करियर बनाने के प्रोजेक्‍ट पर भी कम चल रहा है. पाताल लोक यानी पानी के अंदर से भी दुश्‍मनों के दांत खट्टे करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. इसी क्रम में भारत ने जर्मनी के साथ अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस सबमरीन खरीदने का मन बनाया है. भारत और जर्मनी के बीच P-75I AIP सबमरीन को लेकर ₹70000 करोड़ की डील हुई है. इस रक्षा सौदे को लेकर गुड न्‍यूज सामने आई है. जर्मनी ने इसको लेकर इंटरनल प्रोसेस को पूरा कर लिया है.

जर्मनी ने भारत के साथ 6 अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए प्रस्तावित करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 70,000 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट-75I सौदे को लेकर अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है. जर्मनी अब समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर के लिए तैयार है और भारत की ओर से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है. ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जर्मनी के राजदूत जास्पर वीक ने बताया कि इस सौदे से संबंधित सभी दस्तावेजों को बर्लिन की ओर से मंजूरी मिल चुकी है. इसके बाद अब निर्णय भारत सरकार के स्तर पर होना है. प्रस्तावित समझौते के तहत जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मिलकर 6 पनडुब्बियों का भारत में निर्माण करेंगी.

प्रोजेक्ट-P-75I क्‍यों है खास

प्रोजेक्ट-P-75I को भारतीय नौसेना की पनडुब्बी क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. यह पहले के प्रोजेक्ट-75 का अगला चरण है, जिसके तहत फ्रांस के सहयोग से 6 स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां बनाई गई हैं. इन पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में कलवरी श्रेणी के नाम से शामिल किया गया है. प्रस्तावित नई पनडुब्बियां जर्मन एचडीडब्ल्यू क्लास-214 के एक संस्करण पर आधारित होंगी. इनकी प्रमुख विशेषता एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्रणाली होगी. पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने और इंजन चलाने के लिए नियमित अंतराल पर सतह के करीब आना पड़ता है. इससे उनके दुश्मन की निगरानी में आने की संभावना बढ़ती है. इसके विपरीत एआईपी तकनीक से लैस पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं. प्रस्तावित पनडुब्बियों के दो से तीन सप्ताह तक पानी के भीतर रहने में सक्षम होने की बात कही गई है. इससे उनकी पहचान किए जाने की संभावना कम होगी और समुद्री अभियानों के दौरान उनकी परिचालन क्षमता बढ़ेगी.

क्‍या है टाइमलाइन

सौदे के तहत टीकेएमएस डिजाइन और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर में भी सहयोग करेगा. पनडुब्बियों का निर्माण भारत में किए जाने से घरेलू रक्षा उद्योग को एडवांस पनडुब्बी तकनीक और रखरखाव से जुड़ी विशेषज्ञता हासिल होने की उम्मीद है. यह भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों के अनुरूप है. परियोजना की समयसीमा के अनुसार, कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर हस्ताक्षर होने के करीब 7 साल बाद पहली पनडुब्बी की आपूर्ति की जाएगी. इसके बाद बाकी 5 पनडुब्बियां हर साल एक-एक करके नौसेना को सौंपी जाएंगी. राजदूत वीक ने भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने यूक्रेन युद्ध और प्रमुख शक्तियों की बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे दौर में भरोसेमंद और स्थिर साझेदारियां पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं.

जर्मनी ने भारत के लिए नियमों में किया बदलाव

जर्मनी ने भारत के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी के निर्यात संबंधी अपनी नीतियों में भी बदलाव किया है और सैन्य उपकरणों के क्षेत्र में तकनीक हस्तांतरण को लेकर अधिक सहयोगी रुख अपनाया है. दोनों देशों ने इस साल अप्रैल में रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप भी औपचारिक रूप से तय किया था. पनडुब्बी परियोजना के अलावा भारत और जर्मनी ड्रोन, साइबर सुरक्षा, मिसाइल तथा उन्नत सेंसर तकनीक जैसे क्षेत्रों में संयुक्त विकास और सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं. भारतीय नौसेना के आईएफसी-आईओआर, गुरुग्राम में जर्मनी के संपर्क अधिकारी की तैनाती को भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का संकेत माना जा रहा है.

About the AuthorManish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…

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New Delhi,Delhi

First Published :

September 27, 2026, 13:43 IST

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