Ground Report: पाली में बारिश ने दिया दगा, रोहट में 90% फसल तबाह, किसान बोले- अकालग्रस्त इलाका घोषित करो

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पाली के रोहट में अकाल जैसे हालात? 90% फसल तबाह, किसान बोले- गिरदावरी दे सरकार
Last Updated:September 27, 2026, 12:58 IST
Pali Crop Ruined Ground Report: पाली के रोहट क्षेत्र में कम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खांडी और खाड़ी क्षेत्र की विश्नोईयान की ढाणियों समेत आसपास के गांवों में मूंग, तिल और ज्वार की खड़ी फसलें बर्बाद होने का दावा किसानों ने किया है. स्थानीय किसानों के मुताबिक कई इलाकों में 90 से 100 प्रतिशत तक फसलें सूखकर नष्ट हो गई हैं. खेतों में बची-खुची फसल निकालने के लिए भी किसानों को 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देनी पड़ रही है. कई किसानों का कहना है कि जहां महज 50 से 100 किलो मूंग निकलने की उम्मीद है, वहां कटाई का खर्च ही पैदावार की कीमत से ज्यादा बैठ रहा है. किसानों ने केसीसी और साहूकारों से कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन फसल खराब होने से अब ऋण चुकाने का संकट खड़ा हो गया है. किसान यूनियन ने निष्पक्ष गिरदावरी और रोहट को अकालग्रस्त घोषित कर राहत देने की मांग की है.
पाली. आसमान में उम्मीद के बादल महीनों तक सिर्फ छलावा दिखाते रहे और जमीन पर अन्नदाता का अरमान झुलसकर राख हो गया. यह किसी एक खेत का दर्द नहीं, बल्कि पाली जिले के रोहट क्षेत्र के दर्जनों गांवों की कड़वी हकीकत है. कम बारिश की वजह से रोहट पंचायत समिति के खांडी और खाड़ी क्षेत्र की ‘विश्नोईयान की ढाणियों’ में 90 से 100 प्रतिशत तक खड़ी फसलें पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी है. हालात इतने भयावह हैं कि जिन खेतों से बच्चों की स्कूल फीस और घर के राशन का इंतजाम होना था, वहां अब सिर्फ अकाल का सन्नाटा पसरा है. जो थोड़ी-बहुत झुलसी हुई फसल बची भी है, उसे समेटने के लिए किसानों को 600 रुपये रोजाना की दर से मजदूरी देनी पड़ रही है.
यानी जेब खाली और लागत दोगुनी! कर्ज के बोझ तले दबे किसान अब रोहट को अकालग्रस्त घोषित करने और निष्पक्ष गिरदावरी की गुहार लगा रहे हैं. रोहट क्षेत्र के खांडी पंचायत, डूंगरपुर विश्नोईयान की ढाणी, और नेनाराम विश्नोई की ढाणी सहित आसपास के इलाकों में खेतों का नजारा रुला देने वाला है. बारिश की भारी कमी के कारण खेतों में बोए गए मूंग, तिल और ज्वार पूरी तरह सूखकर काले पड़ चुके हैं. स्थानीय किसानों के अनुसार 90 से 100 फीसदी तक फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. स्थिति यह है कि कई खेतों में तो लागत निकालना तो दूर, पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है.
जली फसल काटने के लिए भी 600 रुपये मजदूरी देने की मजबूरी
खेतीबाड़ी चौपट होने के बाद अब किसानों पर आर्थिक दोहरी मार पड़ रही है. खेतों में बची-कुची ज्वार और मूंग की आधी-अधूरी फसल को निकालने के लिए मजदूरों को 600 रुपये प्रति दिन के हिसाब से दिहाड़ी देनी पड़ रही है. जिन खेतों से बमुश्किल 50 से 100 किलो मूंग निकलने की उम्मीद है, वहां कटाई का खर्च ही पैदावार की कीमत से ज्यादा बैठ रहा है. अन्नदाता मजबूरी में कर्ज लेकर मजदूरों को भुगतान कर रहा है ताकि बचा-कुचा अनाज घर ला सके.
बच्चों की पढ़ाई और रसोई पर संकट, कर्ज के दलदल में फंसा किसान
ग्रामीणों का पूरा जीवन चक्र इसी मानसूनी खेती पर टिका था. इसी उम्मीद से किसानों ने केसीसी और साहूकारों से कर्ज लेकर बीज और खाद खरीदे थे कि फसल अच्छी होगी तो घर का चूल्हा सुचारू चलेगा और बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकलेगा. लेकिन अब फसलें तबाह होने से बैंक का लोन चुकाना असंभव नजर आ रहा है. कर्जदार हो चुके किसान अब पाई-पाई को मोहताज हैं और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर भारी चिंता में डूबे हैं.
किसान यूनियन ने दी चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष मदन सिंह ने क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “खांडी चौराई क्षेत्र में फसलें पूरी तरह जल चुकी है. अगर पटवारी बंद कमरों में बैठकर कागजी गिरदावरी करेंगे, तो किसानों को न तो बीमा मिलेगा और न ही सरकारी अनुदान. हमारी पाली जिला कलेक्टर से मांग है कि गिरदावरी का काम खेत-खलिहान में किसानों की मौजूदगी में खुली चौपाल लगाकर किया जाए.” उन्होंने भारत सरकार और राज्य सरकार से पूरे पाली जिले और विशेष रूप से रोहट क्षेत्र को तुरंत अकालग्रस्त घोषित कर राहत पैकेज देने की पुरजोर मांग की.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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September 27, 2026, 12:58 IST



