पहाड़ी पर विराजे संकट मोचन हनुमान, सिरदर्द के झाड़े से लेकर केसर की बारिश तक अनोखी मान्यताएं

Last Updated:September 27, 2026, 15:14 IST
Sankat Mochan Hanuman Temple: जालौर के देसू गांव की पहाड़ी पर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में सिरदर्द और माइग्रेन से पीड़ित लोग इलाज की आस लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां हनुमान जी के नाम का झाड़ा लगवाने से इन बीमारियों में राहत मिलती है. 1701 ईस्वी में जीर्णोद्धार किए गए इस मंदिर में शिव-पार्वती सपरिवार विराजमान हैं. इस मंदिर से जुड़ी सबसे अनोखी मान्यता यह है कि महाशिवरात्रि के दिन यहां केसर की बारिश होती है और पूरी पहाड़ी का वातावरण केसरिया हो जाता है.
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जालौर: राजस्थान के जालौर जिले से लगभग 13 किलोमीटर दूर देसू गांव की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित संकट मोचन हनुमान जी का मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर केवल पूजा-पाठ के लिए ही नहीं, बल्कि यहां से जुड़ी अनोखी और चमत्कारिक मान्यताओं के लिए भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. पहाड़ी की चोटी पर बने इस प्राचीन मंदिर में दर्शन करने के लिए न केवल जालौर जिले के स्थानीय लोग, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में मन्नतें लेकर पहुंचते हैं.
इस संकट मोचन हनुमान मंदिर से जुड़ी सबसे प्रमुख और प्रचलित मान्यता बीमारियों के इलाज को लेकर है. स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों का अटूट विश्वास है कि यदि किसी व्यक्ति को सिर में तेज दर्द रहता हो या वह माइग्रेन जैसी पुरानी और गंभीर बीमारी से परेशान हो, तो यहां हनुमान जी के नाम का ‘झाड़ा’ लगवाने से चमत्कारिक रूप से राहत मिलती है. इसी आस्था और विश्वास के चलते सिरदर्द और माइग्रेन से पीड़ित कई मरीज नियमित रूप से देसू गांव की इस पहाड़ी पर झाड़ा लगवाने और हनुमान जी से स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर पहुंचते हैं.
1701 ईस्वी में हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धारइस मंदिर का इतिहास काफी पुराना बताया जाता है. स्थानीय जानकारों और मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के अनुसार, देसू के इस संकट मोचन हनुमान मंदिर से कई प्राचीन चमत्कार और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और तत्कालीन ठाकुर साहब द्वारा वर्ष 1701 ईस्वी में करवाया गया था. तब से लेकर आज तक यह स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
शिव-पार्वती का परिवार और महाशिवरात्रि पर केसर की बारिशमंदिर परिसर केवल हनुमान जी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां कई अन्य प्राचीन प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस स्थान की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाती हैं. मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. इस मंदिर की सबसे अनोखी और रहस्यमयी मान्यता महाशिवरात्रि के पर्व से जुड़ी है. स्थानीय लोगों और पुजारियों का दावा है कि महाशिवरात्रि के पावन दिन इस मंदिर और आसपास की पूरी पहाड़ी पर ‘केसर’ की बारिश होती है. मान्यता के अनुसार, उस विशेष दिन पर पूरा वातावरण और पहाड़ी केसरिया रंग में रंगी हुई दिखाई देने लगती है, जो भक्तों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
September 27, 2026, 15:14 IST



