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बिहार में सड़क किनारे बिकता है विदेशों का Exotic Food, ₹200 किलो कीमत, हर दिन 3 क्विंटल तक बिक्री

Last Updated:September 27, 2026, 19:51 IST

Snail Farming Bihar: जिस स्नेल को विदेशों में एक एग्ज़ोटिक नॉन वेज डिश के रूप में परोसा जाता है. पश्चिम चंपारण में स्नेल (घोंघा) सड़क किनारे 200 रुपये प्रति किलो बिकता है. जिसे स्थानीय लोग चाव से खाते हैं. हीरा लाल मांझी के अनुसार 70 परिवार इस व्यवसाय में हैं. यह आयरन, प्रोटीन और ओमेगा 3 से भरपूर होता है. जिसकी हर दिन 3 क्विंटल तक बिक्री होती है.

पश्चिम चम्पारण: जिस स्नेल को विदेशों में एक एग्ज़ोटिक नॉन वेज डिश के रूप में परोसा जाता है. पश्चिम चम्पारण सहित बिहार के ज्यादातर ज़िलों में उसकी ख़रीद बिक्री सड़क किनारे पत्तों पर रख कर की जाती है. जैसा कि वीडियो में आप देख सकते हैं कि सड़क किनारे एक लंबी कतार में बैठे लोग स्नेल को पत्तों और बोरियों पर रखकर बेच रहे हैं. दूसरी तरफ खरीदार उसे बड़े ही चाव से खरीद भी रहे हैं. समझने वाली बात यह है कि जिस स्नेल को दुनिया के ज्यादातर देशों में ‘सी फूड’ की कैटेगरी में रखा गया है. उसे यहां बिहार में तालाब, पोखर और छोटी नदियों से चुनकर लाया जाता है.

गांव के 70 परिवार करते हैं घोंघे का कारोबारबेतिया के हरदिया पंचायत निवासी हीरा लाल मांझी बताते हैं कि उनके साथ उनके गांव के क़रीब 70 परिवार स्नेल का व्यवसाय करते हैं. मजे की बात यह है कि वो सभी सिर्फ व्यवसाई ही नहीं, बल्कि एक फार्मर भी हैं. जो खुद ही स्नेल ( घोंघा ) की फार्मिंग करते हैं या फिर पोखरों, तालाब और छोटी नदियों से उन्हें इकट्ठा करने का काम करते हैं. इसके बाद उन्हें स्थानीय बाज़ार में लाया जाता है. जहां बड़े स्तर पर उसकी खरीद बिक्री की जाती है.

बांस से बने खास यंत्र का उपयोगबताते चलें कि स्नेल को हिन्दी में घोंघा और बिहार की स्थानीय भाषा में अइठा कहा जाता है. ये मुख्य रूप से जलीय स्रोत के निकट की मिट्टी में रहना पसंद करते हैं. जिन्हें बांस से बने एक खास यंत्र की मदद से फंसाया जाता है. व्यपारी इसे बेचते समय ऊपर की कवच को अलग कर देते हैं. उसके अंदर मौजूद जीव को पानी से साफ कर बेचते हैं.

हर दिन तीन क्विंटल तक बिक्रीहीरा बताते हैं कि बाज़ार में इसका भाव 200 रुपए प्रति किलो है. आयरन, प्रोटीन और ओमेगा 3 सहित दर्जनों पोषक तत्वों से भरे होने की वजह से लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. यही कारण है कि स्थानीय बाज़ार में हर दिन औसतन दो क्विंटल तक स्नेल की बिक्री हो जाती है, जो अगस्त से अक्टूबर महीने में बढ़कर प्रतिदिन तीन क्विंटल तक पहुंच जाती है.

About the AuthorAmit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar

First Published :

September 27, 2026, 19:50 IST

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