Rajasthan

अश्लील कंटेंट पर राजस्थान पुलिस की पैनी नजर, 8 हजार लिंक-ग्रुप्स और 15 हजार मोबाइल नंबरों पर हो चुकी है कार्रवाई

Last Updated:September 29, 2026, 13:54 IST

Jaipur News: राजस्थान पुलिस द्वारा कहा गया हैं कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना सुरक्षित नहीं है. क्योंकि साइबर पुलिस लगातार डिजिटल ट्रेल के जरिए हर गतिविधि ट्रैक कर रही है और संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है.

ख़बरें फटाफट

सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट देखते या शेयर करते पकड़े गए तो होगी कार्रवाईZoomअश्लील कंटेंट पर राजस्थान पुलिस की सख्त चेतावनी

जयपुर: राजस्थान पुलिस लगातार राजस्थान में साइबर अपराधियों पर शिकंजा कस रही हैं. हालही में राजस्थान साइबर क्राइम विंग और राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर ने अश्लील फिल्मों के कंटेंट बनाने और सोशल मीडिया पर करने वाले 8000 हजार लिंक और ग्रुप्स को ब्लॉक किया हैं. इसके अलावा अश्लील फिल्मों के कंटेंट से संबंधित 15 हजार मोबाइल नंबर भी बंद किए हैं. राजस्थान साइबर क्राइम विंग और राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की टीमों ने तकनीकी जांच के बाद कई सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स साइबर का डंडा चलाया हैं. जिसमें इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, वॉट्सएप और टेलीग्राम से जुड़े करीब 7,800 यूआरएल और प्रोफाइल ब्लॉक करवाए और चाइल्ड पोर्नोग्राफी गतिविधि में यूज किए जा रहे 15 हजार 326 मोबाइल और 100 से अधिक डिजिटल डिवाइस को ब्लॉक करवाया है.

सोशल मीडिया पर अश्लील फिल्मों के इन साइबर अपराधियों पर नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन की टिपलाइन रिपोर्ट्स और डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के आधार पर करीब 25 हजार इनपुट जुटाए गए और इन पर सख्त कार्रवाई की गई हैं. हालही में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस क्रॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इन अश्लील फिल्मों के कंटेंट और शेयरिंग पर राजस्थान पुलिस के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने मॉड्यूस ऑपरेंडी यानी (अपराध करने के तरीके) की जानकारी के तहत बताया.

राजस्थान में टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड के जरिए फैला हैं अश्लील कंटेंट का जालहालही में राजस्थान पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस क्रॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इन अश्लील फिल्मों के कंटेंट और शेयरिंग को लेकर जानकारी देते हुए बताया की राजस्थान में साइबर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल का इस्तेमाल करके इनमें मेंबर फर्जी या गुमनाम पहचान के साथ जुड़ते हैं. आपस में आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं. कई मामलों में सामग्री सीधे निजी मैसेज के जरिए भेजने की जानकारी पुलिस को प्राप्त हुई हैं. जबकि कुछ मामलों में अश्लील कंटेंट को गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर लिंक शेयर से इस प्रकार अश्लील कंटेंट को बढ़ावा दिया जा रहा हैं. जो राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार इन माध्यमों से जुड़कर ऐसी सामग्री भेजना और लेना गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है.

इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट फैला अश्लील कंटेंट का डार्क जालराजस्थान पुलिस साइबर अधिकारियों के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और वॉट्सएप से जुड़े लगभग 7 हजार 800 यूआरएल-प्रोफाइल और 15 हजार 326 मोबाइल नंबर व 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए. जिनमेंतकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी की रिपोर्ट्स के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबर, अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की गई. इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सूचना देकर आपत्तिजनक लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाया गया हैं. राजस्थान पुलिस साइबर टीम ने खासतौर पर अश्लील कंटेंट और शेयरिंग के इन मामलों के लिए एनसीएमईसी की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए गए व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की हैं. साथ ही पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही है. सीएसईएएम की खरीद-फरोख्त और आदान-प्रदान में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर संबंधित राज्य की पुलिस को सूचना दी जा रही है, ताकि वहां भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके.

अश्लील कंटेंट पर राजस्थान पुलिस की सख्त चेतावनीराजस्थान में लगातार साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने और अश्लील कंटेंट की शेयरिंग को लेकर लगातार पुलिस सतर्क मोड़ पर हैं इसलिए हालही में राजस्थान पुलिस द्वारा कहा गया हैं कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना सुरक्षित नहीं है. क्योंकि साइबर पुलिस लगातार डिजिटल ट्रेल के जरिए हर गतिविधि ट्रैक कर रही है और संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है. साथ ही पुलिस ने अभिभावकों और परिजनों को भी हिदायत दी हैं कि ख़ासतौर पर बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट यूज पर ध्यान देने और उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करें. अगर किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल और ऐसी सामग्री सोशल मीडिया या फोन तक पहुंचे तो इसकी जानकारी तत्काल पुलिस को दे. क्योंकि बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत अपराध है. इस प्रकार की किसी भी सूचना के लिए आमजन सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जानकारी दे सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा (आर4सी) पुलिस मुख्यालय जयपुर के ई-मेल sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर भेजी जा सकती है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

और पढ़ेंLocation :

Jaipur,Rajasthan

First Published :

September 29, 2026, 13:54 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj