Agriculture: मूंगफली की कटाई से पहले ये गलती न करें, वरना खेत में छूट जाएंगी फलियां, जानें सही तरीका

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मूंगफली की कटाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान, वरना खेत में छूट जाएंगी फलियां
Last Updated:October 03, 2026, 06:17 IST
Groundnut Harvesting Tips: मूंगफली की अच्छी गुणवत्ता और उपज बचाने के लिए कटाई से लेकर भंडारण तक सावधानी जरूरी है. खुदाई से पहले किसान खेत की मिट्टी में नमी की स्थिति जरूर देखें. बहुत ज्यादा सूखी या गीली मिट्टी दोनों ही स्थिति फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. फलियों के पकने के संकेत देखकर सही समय पर खुदाई करना चाहिए, क्योंकि जल्दी कटाई से दाने अधपके रह सकते हैं और देर करने पर फलियां जमीन में टूटकर छूट सकती हैं. खुदाई के बाद पौधों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. फसल को साफ, सूखी और हवादार जगह पर रखने से नमी के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. खराब और क्षतिग्रस्त फलियों को अलग करने से अच्छी उपज सुरक्षित रहती है. इसके बाद किसान अगली फसल की तैयारी भी शुरू कर सकते हैं.
भीलवाड़ा – खेतों में इन दिनों मूंगफली की फसल पककर तैयार होने लगी है और किसान इसकी खुदाई व कटाई में जुट गए हैं। मूंगफली की अच्छी पैदावार के बाद किसान चाहते हैं कि फसल को सुरक्षित तरीके से खेत से बाहर निकाला जाए, ताकि दानों की गुणवत्ता खराब न हो। कटाई के समय थोड़ी सी लापरवाही से मूंगफली के दाने टूट सकते हैं या उनमें नमी बढ़ने से खराब होने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को कटाई से पहले फसल की स्थिति को अच्छी तरह देख लेना चाहिए।
मूंगफली की खुदाई करने से पहले खेत की मिट्टी में नमी की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए. बहुत ज्यादा सूखी मिट्टी होने पर पौधों को जमीन से निकालने में परेशानी हो सकती है और कई फलियां मिट्टी में ही रह जाने की संभावना रहती है. वहीं अधिक गीली मिट्टी में खुदाई करने पर फलियों के साथ मिट्टी चिपक सकती है और फसल को सुखाने में ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में कटाई करना उचित रहता है जब खेत में मिट्टी में आवश्यक नमी हो और पौधों को आसानी से निकाला जा सके.
कटाई का सही टाइम फिक्स करना भी मूंगफली की गुणवत्ता के लिए काफी महत्वपूर्ण है. किसान पौधों को देखकर यह पता लगा सकते हैं कि फसल पूरी तरह पक चुकी है या नहीं. सामान्य तौर पर पकने पर फलियों का रंग और अंदर मौजूद दानों की स्थिति में बदलाव दिखाई देता है. यदि फसल को बहुत जल्दी निकाल लिया जाए तो दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और उपज प्रभावित हो सकती है. दूसरी ओर बहुत देर करने पर फलियां जमीन में टूटकर रह सकती है, इसलिए पकाव की स्थिति देखकर ही खुदाई करनी चाहिए.
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मूंगफली की खुदाई के बाद पौधों को खेत में कुछ समय तक उचित तरीके से सुखाना भी जरूरी है. खेत से निकालने के बाद अगर फसल में नमी ज्यादा है, तो उसे सीधे भंडारण में रखने से दाने खराब होने का खतरा बढ़ सकता है. किसानों को पौधों को साफ और सूखी जगह पर फैलाकर पर्याप्त हवा और धूप मिलने देना चाहिए. फलियों में मिट्टी लगी हो तो उसे सावधानी से अलग करना चाहिए. तेज धूप या गलत तरीके से सुखाने के बजाय मौसम और फसल की स्थिति देखकर सुखाने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए.
कटाई के दौरान फसल को संभालते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मूंगफली की फलियां टूटें नहीं और दाने किसी तरह से क्षतिग्रस्त न हों. खुदाई के बाद फसल को इकट्ठा करते समय बहुत अधिक दबाव डालने या उसे जमीन पर घसीटने से बचना चाहिए. खराब सड़ी या क्षतिग्रस्त फलियों को अलग कर देना बेहतर रहता है ताकि अच्छी उपज सुरक्षित रह सके. फसल को पूरी तरह सुखाने के बाद ही साफ करके उचित स्थान पर रखना चाहिए. भंडारण वाली जगह सूखी साफ और नमी से सुरक्षित होनी चाहिए.
मूंगफली की कटाई के बाद किसान अगले फसल चक्र की तैयारी भी शुरू कर सकते हैं. खेत से फसल के अवशेष हटाने और खेत की स्थिति देखने के बाद अगली फसल के लिए जरूरी कृषि कार्यों की योजना बनाना आसान होता है. कटाई के दौरान बची हुई अच्छी फलियों को अलग करके सुरक्षित रखने से नुकसान कम किया जा सकता है. किसान मौसम, मिट्टी की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह को ध्यान में रखते हुए अगली फसल की तैयारी करें. सही समय पर कटाई, उचित सुखाई और सुरक्षित भंडारण से मूंगफली की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
First Published :
October 03, 2026, 06:17 IST



