Rajasthan

Ground Report: पानी के लिए फिर पटरी पर दौड़ेगी ट्रेन? जवाई में घटा जलस्तर, पाली में बूंद-बूंद पानी का संकट

Last Updated:October 04, 2026, 17:05 IST

Ground Report: पाली में एक बार फिर गंभीर जल संकट के हालात बन रहे हैं. जवाई बांध का जलस्तर घटकर करीब 24 फीट रह गया है, जिससे पाली की पेयजल आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है. ऐसे में प्रशासन जोधपुर से दोबारा वॉटर ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है.

पाली. राजस्थान के पाली ज़िले में एक बार फिर पानी का संकट विकराल रूप लेने लगा है. मानसून की बेरुखी और पर्याप्त बारिश नही होने के कारण शहर के तमाम जल स्रोत दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं. हकीकत यह है कि आने वाले दिनों में पाली की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन को फिर से आपातकालीन रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब एक बार फिर जोधपुर से पानी की विशेष ट्रेन मंगवाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. वही वॉटर ट्रेन, जिस पर एक फैरा लगाने के लिए लाखों रूपए तक का भारी भरकम बजट खर्च करना पड़ता है.

पाली में मंडराते इस गंभीर जल संकट को देखते हुए फिर से तैयारी किए जाने की बात कही जा रही है. इसके लिए बकायदा तीन विभागों के आपसी समन्वय से काम होता है जिसमें जलदाय विभाग, डिस्कॉम और उत्तर पश्चिम रेलवे शामिल है. सूत्रों से मिल रही जानकारी में यह सामने भी आ रहा है कि राज्य सरकार को जल्द ही प्रस्ताव भेजने की तैयारी है, ताकि वक्त रहते ट्रेन के संचालन पर फैसला लिया जा सके. एक समय था जब पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा बनाया गया यही जवाई बांध जोधपुर तक की प्यास बुझाता था, लेकिन आज स्थितियां ऐसी हैं कि पाली खुद बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज़ होने की कगार पर है.

जवाई बांध का इतिहास के साथ किसने और क्यों बनवाया?जोधपुर रियासत में बार-बार पड़ने वाले भीषण अकाल और सूखे से जनता तथा मवेशियों को बचाने के लिए इसका निर्माण कराया गया. जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने 12 मई 1946 को इसकी नींव रखी थी, इसका निर्माण कार्य प्रसिद्ध इंजीनियर एडगर और मोती सिंह की देखरेख में पूरा हुआ.

जोधपुर से कनेक्शन और भराव क्षमताजवाई बांध को मारवाड़ का सबसे बड़ा बांध माना जाता है. शुरुआत में जवाई बांध का मुख्य उद्देश्य जोधपुर शहर और आसपास के इलाकों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था. दशकों तक इसने जोधपुर की प्यास बुझाई, लेकिन बाद में जोधपुर को इंदिरा गांधी नहर से जोड़ा गया और जवाई का पानी पाली ज़िले के लिए आरक्षित हो गया. जवाई बांध की कुल भराव क्षमता 61.25 फीट (लगभग 7300 मिलियन घन फीट) है. वहीं वर्तमान में जवाई बांध में पानी का स्तर घटकर केवल 24 फीट रह गया है. जलदाय विभाग के आंकड़ों और वर्तमान खपत के अनुसार, बांध में उपलब्ध यह 24 फीट पानी पाली शहर और ज़िले के जुड़े ग्रामीण इलाकों में मुश्किल से अगले 3 महीने (लगभग 90 दिन) तक ही पेयजल आपूर्ति करने के योग्य है.

वॉटर ट्रेन का इतिहास और खर्च का गणितपाली में भीषण पेयजल संकट के दौरान पहली बार 25 जुलाई 2002 को जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से पाली के लिए वॉटर ट्रेन (जल ट्रेन) चलाई गई थी. इसके बाद 2009, 2016, 2019 और 2022 में भी संकट के समय इसे चलाया गया. एक वॉटर ट्रेन में आमतौर पर 40 बोगी (टैंकर) जोड़े जाते हैं. एक फेरे में यह ट्रेन लगभग 20 से 21 लाख लीटर (2.1 MLD) पानी पाली पहुंचाती है. रेलवे द्वारा जलदाय विभाग से माल भाड़ा वसूल किया जाता है. औसतन एक फेरे (Round Trip) का खर्च लगभग 4 लाख से 4.5 लाख रुपये आता है. रोजाना 4 से 5 फेरे लगाए जाते हैं, जिससे प्रतिदिन का खर्च 18 से 22 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. जवाई में बचा केवल 24 फीट पानी, क्या पाली की प्यास बुझाने फिर दौड़ेगी ‘वॉटर ट्रेन’?

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Pali,Pali,Rajasthan

First Published :

October 04, 2026, 17:05 IST

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