कम उम्र में क्यों थम रहीं धड़कनें? राजस्थान में सामने आए 3 मामलों ने बढ़ाई चिंता, जानें कारण और लक्षण

जोधपुर। कम उम्र अचानक सीने में दर्द और चंद मिनटों में सब खत्म,जी हाँ, जिस दिल के दौरे को कभी बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वो अब युवाओं और यहाँ तक कि बच्चों के लिए भी ‘साइलेंट किलर’ बनता जा रहा है. पाली और ब्यावर से आई हालिया पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. 31 साल के हरीश, 40 साल के कपिल और 43 साल के नारायण सिंह ये तीन नाम अलग हैं, शहर अलग हैं, लेकिन इनकी मौत की वजह एक ही है मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी अचानक हार्ट अटैक,काम करते-करते या चलते-फिरते अचानक गिर पड़ना और अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देना.
आखिर क्यों इतनी कम उम्र में इंसान का दिल अचानक साथ छोड़ रहा है? क्या आपकी बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता मेंटल स्ट्रेस या देर रात तक जागना आपके दिल पर भारी पड़ रहा है? और सबसे बड़ा सवाल क्या आपके बच्चे का सांस फूलना भी किसी बड़े खतरे की घंटी है? आइए समझते हैं इस ‘साइलेंट अटैक’ का पूरा सच और डॉक्टरों की वो चेतावनी, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट.
30 से 40 वर्ष की आयु के पुरूषो को हार्ट अटैकबदलती दिनचर्या और तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच अब कम उम्र के लोग भी तेजी से हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं. राजस्थान के पाली और ब्यावर जिले से सामने आए तीन अलग-अलग मामले इस भयावह सच को बयां करते हैं, जहाँ 30 से 40 वर्ष की आयु के पुरुषों की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौतों का कारण मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) सामने आया है.
हालिया मामले जिन्होंने सबको चौंकायापाली (राजेंद्र नगर): 31 वर्षीय हरीश की अचानक तबीयत बिगड़ी. परिजन अस्पताल ले गए, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक की पुष्टि हुई.
पाली (बांगड़ अस्पताल): अहमदाबाद निवासी 40 वर्षीय कपिल पुत्र अश्विन की अचानक तबीयत खराब होने पर उसके साथी उसे बांगड़ अस्पताल लाए, जहाँ इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
ब्यावर (टाटगढ़): 43 वर्षीय नारायण सिंह पुत्र भोज सिंह को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ. अस्पताल पहुँचाने से पहले ही उनकी जान चली गई.
डॉक्टर्स का अलर्ट: क्यों बढ़ रहा है युवाओं में खतरा?राजस्थान के जाने माने ह्दयरोग विशेषज्ञ डॉ रोहित माथुर जो वर्तमान में जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में हृदय रोग विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है उनका कहना है कि फास्ट फूड और अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन से कम उम्र में ही मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियाँ पैर पसार रही हैं.मेंटल स्ट्रेस, स्मोकिंग, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि (एक्सरसाइज) न करना खतरे को कई गुना बढ़ा देता है.वही उन्होंने मोटापे को भी इसका मुख्य कारण बताया.
दिल को स्वस्थ रखने के उपायसंतुलित दिनचर्या: वजन नियंत्रित रखें, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या वॉक करें.पौष्टिक आहार: प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं, हरी सब्जियाँ और फल आहार में शामिल करें.बुरी आदतों से दूरी: धूम्रपान और नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचें.पर्याप्त नींद व तनाव प्रबंधन: 7-8 घंटे की नींद लें और योग या मेडिटेशन के जरिए मेंटल स्ट्रेस कम करें.नियमित हेल्थ चेकअप: यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा हो, तो नियमित रूप से बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं.
बच्चों में भी खतरा: जन्मजात हृदय विकार (CHD)विशेषज्ञों की माने तो बच्चों में दिल की समस्याओं का मुख्य कारण जन्मजात हृदय विकार होता है. जन्म से ही बच्चे के दिल की संरचना, वाल्व, चैम्बर्स या रक्त वाहिकाओं में गड़बड़ी होने पर दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. समय पर इलाज न मिलने पर यह हार्ट फेलियर का रूप ले सकता है.
अन्य कारण: कार्डियोमायोपैथी (हृदय की मांसपेशियों की बीमारी), एरिदमिया (अनियमित धड़कन), गंभीर इंफेक्शन और आनुवंशिक (Genetic) कारण भी बच्चों में दिल के दौरे का जोखिम बढ़ाते हैं.
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाजसीने में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना.सांस लेने में तकलीफ और अत्यधिक कमजोरी.बिना किसी वजह के चक्कर आना या बेहोश होकर गिरना.दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज या असामान्य होना.
बच्चों में दिखने वाले शुरुआती संकेतखेलते या दौड़ते समय असामान्य रूप से सांस फूलना.बहुत जल्दी अत्यधिक थकान महसूस होना.सीने में दर्द की शिकायत या अचानक बेहोशी.
देश में डराने वाले आँकड़ेवर्ल्ड हार्ट फेडरेशन’ (WHF) के अनुसार, भारत में हर साल दिल की बीमारियों के कारण लगभग 28 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं. ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ और ‘ICMR’ के आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाली कुल मौतों में करीब 28% मौतें कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं.



