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राजस्थान में सूखे की आहट, गहलोत बोले- अब सिर्फ बारिश की कमी नहीं, रोजी-रोटी का सवाल, नहीं चेते तो मुश्किलें बढ़ेंगी

जयपुर. राजस्थान में मानसून की विदाई के साथ सूखे की तस्वीर अब साफ होने लगी है. खेतों में पानी की कमी के साथ गांवों में रोजगार, पशुओं के लिए चारा और इंसानों के लिए पीने के पानी का संकट भी सामने आने की आशंका है. ऐसे समय में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को अभी से तैयारी शुरू करने की सलाह दी है. गहलोत ने कहा कि सूखे का इंतजार करके राहत के इंतजाम करने के बजाय सरकार को पहले ही आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए.

जयपुर में गहलोत ने कहा कि राजस्थान में बनी सूखे की स्थिति को सरकार को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि चिंता सिर्फ कम बारिश या फसल खराब होने तक सीमित नहीं है. आने वाले समय में खेतों में काम नहीं होगा तो ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होगा. फसल प्रभावित होने से किसानों की आय घटेगी, चारे की कमी से पशुधन पर असर पड़ेगा और कई गांवों में पीने के पानी की जरूरत भी बढ़ सकती है.

अकाल में सबसे पहले रोजगार पर आता है संकट

गहलोत ने कहा कि सूखे की स्थिति में सबसे बड़ा संकट उन परिवारों पर आता है, जिनकी रोजी-रोटी खेती और मजदूरी पर निर्भर है. खेत में काम नहीं होगा तो मजदूर को रोजगार कहां से मिलेगा, सरकार को इस सवाल का जवाब अभी से तलाशना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी थी. काम मांगने पर काम देना पड़ता था और काम नहीं मिलने की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान था. गहलोत के मुताबिक अब रोजगार उपलब्ध कराने का फैसला राज्य सरकारों पर निर्भर करता है. ऐसे में उन्होंने सूखे की स्थिति में अभी से रोजगार के काम खोलने की तैयारी करने की सलाह दी.

पानी और चारे का भी इंतजाम जरूरी

गहलोत ने कहा कि राजस्थान में सूखे का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता. गांवों और ढाणियों में पानी के स्रोत सूखने पर पशुधन भी संकट में आ जाता है. इसलिए सरकार को मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था अभी से करनी चाहिए. साथ ही चारे का प्रबंधन भी पहले से जरूरी है. उन्होंने कहा कि राजस्थान पहले भी अकाल का सामना करता रहा है. ट्यूबवेल, हैंडपंप और रोजगार योजनाओं की वजह से पिछले लंबे समय में अकाल की मार कुछ कम महसूस हुई. यही वजह है कि लोगों की एक पीढ़ी शायद अकाल की वास्तविक विभीषिका को भूल गई है. गहलोत का संकेत है कि पुराने अकाल जैसे हालात बनने का इंतजार करना भारी पड़ सकता है.

बाड़मेर का उदाहरण देकर राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल

गहलोत ने बाड़मेर का उदाहरण देते हुए राहत व्यवस्था की गति पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बाड़मेर के लिए सहायता की घोषणा की, लेकिन तीन दिन बाद भी उसके आदेश जिला कलेक्टर तक नहीं पहुंचे थे. गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अगर आदेश नीचे तक पहुंचने में समय लगेगा तो सूखे जैसे संकट का सामना कैसे किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सवाल केवल घोषणा का नहीं, बल्कि घोषणा से राहत जमीन तक पहुंचने के बीच की दूरी का है. प्रभावित परिवार के लिए मायने यह रखता है कि पानी का टैंकर कब पहुंचा, चारा कब मिला, मजदूरी कब मिली और राहत की राशि उसके हाथ में कब पहुंची.

किसानों के कर्ज का मुद्दा भी उठाया

गहलोत ने सूखे की स्थिति में किसानों के कर्ज माफ करने की सलाह भी दी. उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 14 हजार करोड़ रुपए के किसानों के कर्ज माफ किए थे. उनका कहना है कि सूखे का असर एक फसल तक सीमित नहीं रहता. किसान की आमदनी प्रभावित होती है और उसके सामने अगली फसल की तैयारी के साथ कर्ज चुकाने का दबाव भी बढ़ जाता है. इसलिए किसानों को तत्काल राहत देने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति संभालने की जरूरत है.

गांवों में जाकर राहत की हकीकत देखेगी कांग्रेस

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर के नेता सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे. कांग्रेस कार्यकर्ता यह देखेंगे कि सरकार ने राहत के काम शुरू किए या नहीं, गरीबों को समय पर मदद मिली या नहीं, मजदूरी का भुगतान हुआ या नहीं, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था है या नहीं और गांवों में पीने के पानी की वास्तविक स्थिति क्या है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अकाल राहत के काम का पुराना अनुभव है. पहले अकाल के समय जिला कांग्रेस कमेटियों को अकाल राहत समितियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी को प्रदेश कांग्रेस अकाल राहत समिति के रूप में काम में लगाया जाता रहा है. सरकार को अभी से तय करना चाहिए कि कहां रोजगार के काम खोलने हैं, कहां चारा पहुंचाना है, किन इलाकों में वैकल्पिक जल व्यवस्था करनी है और सूखे की मार झेल रहे किसानों को किस तरह राहत देनी है. गहलोत का कहना है कि संकट बढ़ने के बाद राहत शुरू करने के बजाय उसकी आहट मिलते ही तैयारी करना ज्यादा जरूरी है.

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