National

वाजपेयी सरकार की तरह नरेंद्र मोदी सरकार में आ रही डीएमके, क्या सीएम विजय कर पाएंगे राहुल गांधी के इस नुकसान की भरपाई?

तमिलनाडु के जरिए केंद्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है. मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) शनिवार को औपचारिक रूप से विपक्षी पार्टियों के इंडिया गठबंधन में शामिल हो गई. अब सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के पुरानी सहयोगी एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके एनडीए में शामिल होंगे या फिर कोई तीसरा मोर्चा बनाने पर विचार कर सकते हैं? दूसरा सवाल यह है कि टीवीके के इंडिया गठबंधन में शामिल होने से विपक्षी खेमे खासकर कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को इसका क्या फायदा होगा? आइए इन सारी बातें को स्टेप बाई स्टेप समझते हैं.

इंडिया गठबंधन में कैसे आई टीवीके

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरी टीवीके ने सबको चौंकाते हुए 108 सीटें जीतीं जो बहुमत के आंकड़े 118 से दूर रही. ऐसी स्थिति में टीवीके को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के अलावा CPI, CPI(M), VCK, MDMK और IUML के विधायकों का समर्थन लेना पड़ा, जिसके बाद सी जोसेफ विजय मुख्यमंत्री बन पाए. हालांकि कुछ दिनों बाद ही CPI और CPI(M) सीएम विजय के साथ गठबंधन से अलग हो गई. सरकार बनने के बाद सीएम विजय ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूरी बनाए रखी. वहीं विचारधारा के स्तर पर दो धुरी होने के चलते टीवीके बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन से भी दूर ही रही. टीवीके की तरफ से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जाने लगा. इससे कांग्रेस के लिए थोड़ी असहज स्थिति बनती दिख रही थी.

30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक में ना तो डीएमके का कोई प्रतिनिधि दिखा और ना ही सीएम विजय की पार्टी से कोई शामिल हुआ. चर्चा शुरू हो गई कि एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके अब पूरी तरह से इंडिया गठबंधन से अलग हो चुकी है. वहीं टीवीके भले ही तमिलनाडु में कांग्रेस की सहयोगी है, लेकिन केंद्रीय राजनीति में वह साझेदार नहीं बननान चाहती है.

शनिवार को सीएम विजय की पार्टी टीवीके के प्रतिनिधि आधव अर्जुन और मैरी विल्सन अचानक चेन्नई में तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी हेडक्वार्टर में हो रहे इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचे. इस बैठक में CPI, CPI(M), VCK, MDMK और IUML के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. इसके बाद तमिलनाडु कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने कहा कि सीएम सी जोसेफ विजय की पार्टी आधिकारिक रूप से इंडिया गठबंधन में शामिल हो गई है. यह ना केवल तमिलनाडु बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए ऐतिहासिक दिन है.

SIR के खिलाफ इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होगी टीवीके?

टीवीके के इंडिया गठबंधन में शामिल होने की औपचारिकता पूरी होने के कुछ दिन बाद ही SIR के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन होने वाला है. इंडिया गठबंधन ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है, जिसके तहत 13 और 14 अक्टूबर को पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शन होने हैं. इसके बाद 15 अक्टूबर को चेन्नई में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा. इस प्रदर्शन में टीवीके के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है. हालांकि सीएम विजय खुद शामिल होंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है.

इंडिया गठबंधन को लेकर टीवीके पर बदले कांग्रेस के सुर

पिछले कुछ दिनों पहले तक जब भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर से टीवीके के इंडिया गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा जाता तो वह कहते- ‘TVK को टेक्निकली इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं माना जा सकता, क्योंकि संसद में उनका कोई भी प्रतिनिधि नहीं है. पिछले हफ्ते टीवीके को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में भी नहीं बुलाया गया था. बताया जा रहा है कि इसलिए शनिवार को न केवल टीवीके के हालात में, बल्कि कांग्रेस की इसे औपचारिक मान्यता देने की इच्छा में भी बदलाव आया है.

टीवीके जोसेफ विजय को अब पीएम नहीं करेगी प्रोजेक्ट

अब तक राज्य में मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे जोसेफ विजय के इंडिया गठबंधन में आने के साथ ही उनके लिए राष्ट्रीय राजनीति के रास्ते खुल चुके हैं. 2029 के लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक की तरफ से टीवीके के मजबूत प्लेयर होंगे. यही वजह है कि टीवीके की सोशल मीडिया टीम को कहा गया है कि वो अब तक सीएम विजय को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे, इस कैंपेन को अब रोक दिया जाए. इंस्टाग्राम रील्स और सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीएम मैटेरियल के रूप में विजय को दिखाना कम कर दिया गया है.

डीएमके के पास है एनडीए में जाने का विकल्प

शनिवार को हुई विपक्षी दलों की बैठक का असर तमिलनाडु की राजनीति में सबसे ज्यादा DMK पर पड़ता दिख रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी खुद को उस पुराने गठबंधन ढांचे से अलग हालत में पा रही है, जिसके सहारे उसने चुनावी राजनीति आगे बढ़ाई थी. अब TVK के सक्रिय होने से DMK के सामने नए सियासी समीकरण की चुनौती खड़ी हो गई है.

डीमके जब तक इंडिया गठबंधन में रही तब तक वह विपक्ष के तमाम मुद्दों पर मुखर रही. तत्कालिन सीएम एमके स्टालिन ने बीजेपी परिसीमन बिल को जलाकर अपना विरोध जताया था. राहुल गांधी के साथ उनकी जुगलबंदी की काफी बातें होती थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में हालात बदलते ही कांग्रेस का टीवीके के साथ जाना डीएमके के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है.

ऐसे समय में राष्ट्रीय राजनीति में बने रहने के लिए डीएमके के पास बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन में जाने का विकल्प है. याद करा दें कि साल 1999 के लोकसभा चुनाव में डीएमके, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनी थी. डीएमके एनडीए सरकार में शामिल हुई और उसके नेता केंद्र में मंत्री भी बने. डीएमके 1999 से 2003-2004 तक एनडीए में रही. 2004 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले डीएमके एनडीए से अलग हो गई और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए (UPA) गठबंधन में शामिल हो गई थी.

लेफ्ट के लिए भी बदले हालात

CPI और CPI(M) ने विजय के गठबंधन से दूरी बनाने के बाद उपचुनाव में अलग रास्ता चुना है. सामान्य परिस्थितियों में इन दोनों दलों की DMK के साथ वापसी को स्वाभाविक माना जा सकता था. लेकिन TVK के मैदान में आने से समीकरण पहले जैसे नहीं रहे. शनिवार की बैठक में लेफ्ट पार्टियों के साथ VCK और MDMK भी शामिल हुए. यानी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता के मंच पर अब तमिलनाडु की कई ऐसी पार्टियां साथ बैठ रही हैं, जिनके राज्य में राजनीतिक हित और गठबंधन की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं.

राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति अलग

यही अंतर आने वाले दिनों में अहम हो सकता है. INDIA ब्लॉक के लिए BJP साझा राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी है. लेकिन तमिलनाडु में कौन किसके साथ चुनाव लड़ेगा, यह सवाल अभी पूरी तरह साफ नहीं है. कांग्रेस के लिए विजय की TVK सिर्फ एक संभावित सहयोगी नहीं है. वह राज्य की सत्ता की राजनीति में अहम साझेदार भी बन सकती है. दूसरी तरफ TVK के लिए कांग्रेस विधानसभा में समर्थन और 2029 के लोकसभा चुनाव की राजनीति के बीच एक संभावित पुल का काम कर सकती है. ऐसे में DMK के लिए कांग्रेस, लेफ्ट और TVK के बीच बनते रिश्तों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

तीसरे मोर्चे की संभावना कमजोर

DMK के नेता राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के दलों के साथ बातचीत जारी रख सकते हैं. लेकिन विजय के औपचारिक रूप से इस राजनीतिक खेमे के करीब आने से तमिलनाडु में DMK के लिए अपनी पुरानी केंद्रीय भूमिका बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. कुछ समय से DMK की डिप्टी जनरल सेक्रेटरी कनिमोझी की गैर-कांग्रेसी INDIA नेताओं के साथ बातचीत को भी अलग विपक्षी मोर्चे की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा था. लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है.

कांग्रेस को अलग रखकर कोई नया विपक्षी मोर्चा बनाना पहले ही मुश्किल था. ऊपर से कई संभावित सहयोगी अब INDIA की बैठक में नजर आ रहे हैं. TVK की मौजूदगी ने इस संभावना को और कमजोर कर दिया है.

विजय के सामने भी नई चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि विजय जब विधानसभा चुनाव में उतरे थे, तब उनकी पार्टी TVK तमिलनाडु की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ एक नए विकल्प के तौर पर पेश की गई थी. लेकिन चुनाव नतीजों के करीब पांच महीने बाद राजनीतिक तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है. पहले सत्ता की राजनीति में बहुमत के लिए जरूरी सहयोगियों की जरूरत सामने आई. अब राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की राजनीति भी दरवाजे पर दस्तक दे रही है. शनिवार की बैठक ने तमिलनाडु के इन सभी सवालों का जवाब नहीं दिया है. लेकिन उसने बदलते राजनीतिक समीकरण को एक नाम जरूर दे दिया है INDIA ब्लॉक.

पूरे खेल में राहुल गांधी के लिए क्या नफा क्या नुकसान?

टीवीके के इंडिया ब्लॉक में आ जाने से ये मैसेज जो गया ही है कि सीएम जोसेफ विजय ने राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार लिया है. उधर ममता बनर्जी की ओर से राहुल गांधी के समर्थन में बयानबाजी होने के बाद कांग्रेस पहले से इतरा रही है. मौजूदा वक्त में राहुल गांधी विपक्षी दलों में सबसे मजबूत नेता के रूप में स्थापित होते दिख रहे हैं.

वहीं अगर डीएमके बीजेपी वाली एनडीए में शामिल होती है तो यह राहुल गांधी के लिए बड़ा झटका होगा. तमिलनाडु में अभी टीवीके भले ही राज्य की सत्ता में है, लेकिन लोकसभा चुनाव में अभी उसका परीक्षण होना बाकी है. ऐसे में अगर डीएमके और बीजेपी मिलकर तमिलनाडु में 2029 के चुनाव में बड़ी सफलता हासिल करते हैं तो यह ना केवल राहुल गांधी बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा नुकसान साबित होगा. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (9)और डीएमके (22) गठबंधन ने सभी 39 सीटें जीती थी. डीएमके के इंडिया गठबंधन में होने से लोकसभा में विपक्षी मजबूत स्थिति में नजर आते हैं. अगर डीएमके एनडीए में गई तब तो नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए परिसीमन बिल पास कराना भी आसान हो जाएगा, क्योंकि टीएमसी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सांसद टूटकर पहले ही एनडीए में आ चुके हैं.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj