मारवाड़ को मिलेगी रफ्तार, 11,492 करोड़ से बनेगा एक्सप्रेसवे, जोधपुर से मुंबई का सफर 11 में होगा पूरा

जयपुर. राजस्थान में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने वाली है. सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार पश्चिमी हिस्से की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला है. साथ ही सड़क कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ा बदलाव पश्चिमी हिस्से से शुरू होने जा रहा है. जयपुर-जोधपुर-पचपदरा एक्सप्रेसवे बनने के बाद मारवाड़ से देश के बड़े कारोबारी केंद्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है. करीब 390 से 400 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा और इसकी अनुमानित लागत 11,492 करोड़ रुपए बताई जा रही है. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जयपुर और जोधपुर के बीच सड़क यात्रा का समय करीब 6-7 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे रह सकता है.
इस परियोजना की खासियत सिर्फ जयपुर और जोधपुर को जोड़ना नहीं है. एक्सप्रेसवे को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इससे पश्चिमी राजस्थान की मुंबई, गुजरात और दिल्ली की ओर सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होगी. खास तौर पर पचपदरा रिफाइनरी और उससे जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह सड़क परियोजना माल परिवहन और बाजार तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
मुंबई जाने वालों का 7 घंटे तक बचेगा समय
फिलहाल जोधपुर से मुंबई की सड़क यात्रा में ट्रैफिक और शहरों के भीतर से गुजरने के कारण करीब 17 से 18 घंटे तक लग सकते हैं. प्रस्तावित एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद इस सफर को करीब 11 घंटे तक सीमित करने की संभावना है. यानी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो यात्रियों और माल वाहनों के लिए 7 से 8 घंटे तक का समय बच सकता है. जोधपुर से निकलने के बाद एक्सप्रेसवे का नेटवर्क दौसा-लालसोट की दिशा में जाएगा और आगे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज से जुड़ेगा. इसके बाद वाहन कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत की दिशा में आगे बढ़ते हुए मुंबई तक पहुंच सकेंगे. इस कनेक्टिविटी का सीधा असर राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच होने वाले व्यापार पर पड़ने की उम्मीद है.
जयपुर से जोधपुर का सफर करीब 4 घंटे में होगा तय
इस परियोजना का एक बड़ा असर राजस्थान के भीतर यात्रा पर भी पड़ेगा. अभी जयपुर से जोधपुर सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे लगते हैं. एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह समय लगभग 4 घंटे तक आने का अनुमान है. यानी करीब 2 से 3 घंटे की बचत हो सकती है. तेज कनेक्टिविटी का फायदा सिर्फ निजी वाहनों को नहीं मिलेगा. कृषि उपज, औद्योगिक सामान और दूसरे माल की आवाजाही भी कम समय में हो सकेगी. इससे जयपुर और पश्चिमी राजस्थान के बीच कारोबारी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है.
6 से ज्यादा जिलों और 208 गांवों से जुड़ेगा नेटवर्क
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे जयपुर के बगरू-सांगानेर क्षेत्र में रिंग रोड के आसपास से शुरू होने की योजना है. इसके बाद यह राजस्थान के कई जिलों से गुजरते हुए करीब 208 गांवों को अपने नेटवर्क से जोड़ेगा. रूट में मोजमाबाद, किशनगढ़, विजयनगर, पाली, भाद्राजून, समदड़ी और पचपदरा जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं. पचपदरा तक पहुंचने वाली यह कनेक्टिविटी वहां मौजूद रिफाइनरी और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अहम होगी. जयपुर से पचपदरा के साथ दिल्ली, मुंबई और गुजरात की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क बनने से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ सकती है.
पचपदरा रिफाइनरी को भी मिलेगा फायदा
पचपदरा रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान की बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है. एक्सप्रेसवे के जरिए रिफाइनरी क्षेत्र को जयपुर और देश के बड़े बाजारों से तेज सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है. गुजरात की ओर भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी. ऐसे में यह परियोजना केवल एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने का रास्ता नहीं होगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क को बड़े राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखी जा रही है.
NHAI संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी
इस एक्सप्रेसवे को लेकर एक अहम बदलाव यह है कि निर्माण की जिम्मेदारी अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI के स्तर पर आगे बढ़ रही है. परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर विकसित किया जाना है. इससे निर्माण, फंडिंग और गुणवत्ता से जुड़े काम को एक तय ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जाएगा. परियोजना का विस्तृत रूट अलाइनमेंट अंतिम चरण में पहुंच चुका है और करीब 208 गांवों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी गति देने की कवायद चल रही है. एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद इसका सबसे बड़ा असर यात्रा समय घटने के साथ-साथ पश्चिमी राजस्थान की आर्थिक गतिविधियों और माल परिवहन की रफ्तार पर पड़ने की उम्मीद है.



