cricketer Harmanpreet Kaur: लड़कों के साथ क्रिकेट खेला, रेलवे में नौकरी की, DSP बनने पर मचा था बवाल

Harmanpreet Kaur: मोगा की गलियों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने वाली एक लड़की ने कभी भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान देने वाली खिलाड़ी बनने का सपना जरूर देखा होगा, लेकिन शायद यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन उसका नाम देश की सबसे बड़ी क्रिकेट उपलब्धियों के साथ लिखा जाएगा. हरमनप्रीत कौर ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे. कभी 2017 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 171 रन की ऐतिहासिक पारी ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया तो कभी उनकी पढ़ाई की डिग्री को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ा कि पंजाब पुलिस में मिला डीएसपी का पद भी खतरे में पड़ गया.
वहीं 2025 में उन्होंने भारतीय महिला टीम को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाली कप्तान बनकर इतिहास रचा. 2026 में उनकी कप्तानी में भारत ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीता. अब 6 अक्टूबर 2026 को हरमनप्रीत ने भारतीय महिला टीम की तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है.उन्होंने एक भावुक संदेश में कहा कि यह फैसला आसान नहीं था क्योंकि इसमें वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे पल जुड़े हैं जो जिंदगी भर उनके साथ रहेंगे हालांकि वह खिलाड़ी के तौर पर भारत के लिए खेलती रहेंगी.हरमनप्रीत की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सिर्फ क्रिकेट की उपलब्धियां नहीं हैं. इसमें छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना, पढ़ाई और क्रिकेट के बीच संतुलन, रेलवे की नौकरी, पुलिस की नौकरी से जुड़ा विवाद, करियर के मुश्किल दौर और फिर मैदान पर शानदार वापसी की कहानी भी है.
मोगा में जन्म, पिता से मिला खेल का माहौल
हरमनप्रीत कौर भुल्लर का जन्म 8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में हुआ.उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर खेलों से जुड़े रहे और वॉलीबॉल तथा बास्केटबॉल खेलते थे.उनकी मां का नाम सतविंदर कौर है और उनकी छोटी बहन का नाम हेमजीत कौर है.घर में खेल का माहौल होने की वजह से हरमनप्रीत का झुकाव भी खेलों की तरफ रहा.शुरुआत में उन्होंने बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया लेकिन धीरे-धीरे क्रिकेट उनका सबसे बड़ा जुनून बन गया. उस समय महिलाओं के लिए क्रिकेट की सुविधाएं आज जैसी नहीं थीं. ऐसे में वह कई बार लड़कों के साथ गली क्रिकेट खेलती थीं. इसी दौरान उनका आक्रामक बल्लेबाजी वाला अंदाज विकसित हुआ.उनके शुरुआती कोच कमलदीश सिंह सोढ़ी रहे. उन्होंने मोगा के पास ग्यान ज्योति स्कूल अकादमी में हरमनप्रीत को ट्रेनिंग दी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों में उनके कोच ने बताया है कि हरमनप्रीत शुरुआती दिनों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं और वहीं से उनके खेल में वह बेखौफ अंदाज आया जिसने बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी पहचान बनाई.
Harmanpreet Kaur resigned: हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी छोडी.
हरमनप्रीत कौर ने कहां से पढ़ाई की?
हरमनप्रीत ने हंस राज महिला महाविद्यालय जलांधर से पढ़ाई की है. उनकी शुरुआती पढ़ाई मोगा में हुई और क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए उन्होंने ग्यान ज्योति स्कूल अकादमी से जुड़कर अभ्यास शुरू किया. परिवार और स्कूल की ओर से उन्हें क्रिकेट को आगे बढ़ाने में सहयोग मिला. उनके शुरुआती दिनों में क्रिकेट के लिए आने-जाने और ट्रेनिंग की चुनौतियां भी थीं, लेकिन उन्होंने खेल को जारी रखा. हरमनप्रीत ने बाद में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से डिस्टेंस लर्निंग के जरिए बैचलर ऑफ ऑर्टस की डिग्री हासिल करने का दावा किया था. उनके मुताबिक उन्होंने 2009 से 2011 के बीच यह पढ़ाई की थी लेकिन बाद में इसी डिग्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया और पंजाब पुलिस की ओर से विश्वविद्यालय से इसकी पुष्टि कराई गई तो रिकॉर्ड को लेकर समस्या सामने आई. यही विवाद आगे चलकर उनकी पुलिस नौकरी के लिए बड़ी परेशानी बना.
पढ़ाई की डिग्री से जुड़ा विवाद क्या था?
हरमनप्रीत कौर के करियर में सबसे बड़ा विवाद उनकी ग्रेजुएशन डिग्री को लेकर सामने आया. 2018 में पंजाब पुलिस ने उनकी ओर से जमा की गई चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ की डिग्री को सत्यापन के लिए भेजा. इंडियन एक्सप्रेस की जुलाई 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस जांच में डिग्री को विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से सत्यापित नहीं किया जा सका और इसे फर्जी बताया गया.हरमनप्रीत का पक्ष यह था कि उन्हें खुद इस बात की जानकारी नहीं थी कि डिग्री में कोई समस्या है. उस समय उन्होंने बताया था कि उनके कोच ने उनका एडमिशन विश्वविद्यालय में कराया था और उन्हें बताया गया था कि वहां खिलाड़ियों के लिए परीक्षा में लचीलापन रहेगा. उनका कहना था कि क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह कुछ परीक्षाएं नहीं दे पाईं और बाद में उन्हें डिग्री मिल गई.इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सरकार के अधिकारियों ने उस समय यह भी कहा था कि सरकार ने इस मामले में उनके प्रति नरम रुख अपनाया क्योंकि हरमनप्रीत एक प्रमुख खिलाड़ी थीं और उन्होंने देश के लिए उपलब्धियां हासिल की थीं. अधिकारियों ने यह भी कहा था कि वह खुद डिग्री के फर्जी होने से अनजान होने की बात कह रही थीं.
Harmanpreet Kaur resigned: हरमनप्रीत कौर काफी चर्चा में रहीं.
DSP की नौकरी कैसे मिली और फिर पद क्यों गया?
हरमनप्रीत को 2017 महिला वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद पंजाब सरकार ने पुलिस में डीएसपी पददेने की पेशकश की थी. खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 171 रन की पारी के बाद वह देशभर में चर्चा में आई थीं. पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें पुलिस में नौकरी देने की घोषणा की थी हालांकि उस समय एक और दिक्कत सामने आई. हरमनप्रीत पहले से इंडियन रेलवे में नौकरी कर रही थीं और उन्होंने पांच साल का बॉन्ड साइन किया था. रेलवे उन्हें तुरंत रिलीव करने को तैयार नहीं था. बाद में मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप के बाद रेलवे से उन्हें रिलीव किया गया और मार्च 2018 में उन्होंने पंजाब पुलिस में अंडर-ट्रेनिंग डीएसपी के रूप में जॉइन किया लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद सामने आया. पुलिस के लिए डीएसपी पद पर ग्रेजुएशन की योग्यता जरूरी थी. डिग्री सत्यापन में समस्या आने के बाद पंजाब सरकार ने उनके डीएसपी पद को लेकर दोबारा विचार किया.
DSP से कॉन्स्टेबल बनाने की बात क्यों उठी?
जुलाई 2018 की इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब सरकार हरमनप्रीत को डीएसपी पद से हटाकर कॉन्स्टेबल पद पर रखने पर विचार कर रही थी, क्योंकि उनके पास उपलब्ध और सत्यापित शैक्षणिक योग्यता सीनियर सेकेंडरी तक मानी जा रही थी. सरकार का तर्क था कि डीएसपी पद के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है और नियमों में हरमनप्रीत के लिए छूट देना संभव नहीं था.रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मामले में नरम रुख अपनाया था. प्रस्ताव यह था कि उन्हें उनकी उपलब्ध शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप कॉन्स्टेबल पद दिया जाए और जब वह जरूरी शैक्षणिक योग्यता पूरी कर लें तब उन्हें दोबारा डीएसपी बनाया जा सकता है. पंजाब पुलिस के तत्कालीन डीजीपी ने भी उन्हें मानद डीएसपी बनाए रखने का सुझाव दिया था, लेकिन मामला नियमों और पहले के एक समान मामले की वजह से उलझ गया था.
Harmanpreet Kaur resigned: हरमनप्रीत कौर ने खेल से दिया जवाब.
विवाद के बीच मैदान पर हरमनप्रीत ने दिया जवाब
2018 में जब डिग्री विवाद अपने चरम पर था तब हरमनप्रीत ने मीडिया के सामने इस मामले पर ज्यादा विस्तार से बात नहीं की. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था कि वह विवाद से अवगत हैं और सरकार मामले को देख रही है तथा उन्हें सकारात्मक जवाब की उम्मीद है. इसके कुछ ही महीनों बाद हरमनप्रीत ने मैदान पर ऐसा प्रदर्शन किया जिसने विवाद की जगह फिर से उनके क्रिकेट को चर्चा में ला दिया.2018 महिला टी20 वर्ल्ड कप में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 51 गेंदों पर 103 रन बनाए और भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं जिसने महिला टी20 इंटरनेशनल में शतक लगाया.उस पारी को उनके करियर में मुश्किल दौर से वापसी के तौर पर भी देखा गया.
2017 में 171 रन ने बदल दी पहचान
हरमनप्रीत के करियर की सबसे यादगार पारियों में 2017 महिला वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 171 रन की नाबाद पारी सबसे ऊपर आती है. उन्होंने सिर्फ 115 गेंदों में यह स्कोर बनाया था.यह पारी इतनी प्रभावशाली थी कि हरमनप्रीत भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गईं.आज भी 171 नाबाद रन महिला वर्ल्ड कप में किसी भारतीय बल्लेबाज की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारियों में दर्ज है. मुंबई इंडियंस और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया दोनों उनके इस प्रदर्शन को उनके करियर की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धियों में गिनते हैं.
रेलवे की नौकरी ने करियर को दिया सहारा
पंजाब पुलिस में जाने से पहले हरमनप्रीत इंडियन रेलवे के साथ काम कर चुकी थीं. घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने रेलवे का रुख किया और वहां नौकरी ने उनके करियर को आर्थिक स्थिरता दी.पंजाब पुलिस में डीएसपी के रूप में जाने से पहले वह ऑफिस सुपरिंटेंडेंट के तौर पर रेलवे में काम कर रही थीं.रेलवे की नौकरी छोड़कर पुलिस में जाने के दौरान उनका पांच साल का बॉन्ड भी चर्चा में रहा था.अंततः रेलवे से रिलीव होने के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस जॉइन की.
2009 में इंटरनेशनल क्रिकेट में एंट्री
हरमनप्रीत ने 2009 में भारत के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया. उनका वनडे डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ हुआ और कुछ ही समय बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया.उनकी पहचान एक आक्रामक दाएं हाथ की बल्लेबाज और राइट-आर्म ऑफ-स्पिन गेंदबाज के तौर पर बनी. 2016 में वह पहली बार भारतीय महिला टी20 टीम की कप्तान बनीं.
विदेशी टी20 खेलने वाली पहली भारतीय क्रिकेटरों में शामिल
हरमनप्रीत भारतीय महिला क्रिकेट की उन खिलाड़ियों में भी रहीं जिन्होंने विदेशी फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोला. वह सिडनी थंडर के लिए महिला बिग बैश लीग यानी WBBL में खेलने वाली पहली भारतीय क्रिकेटर बनीं.इसके बाद जब भारत में महिला प्रीमियर लीग यानी WPL की शुरुआत हुई तो उन्हें मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम का कप्तान बनाया.उन्होंने 2023 में मुंबई इंडियंस को पहली WPL ट्रॉफी जिताई. हरमनप्रीत की कप्तानी का सबसे बड़ा अध्याय 2025 में आया. उनकी अगुवाई में भारत ने पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता. भारत ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर इतिहास बनाया और हरमनप्रीत भारत की पहली महिला वर्ल्ड कप विजेता कप्तान बनीं. हाल ही में उनकी अगुवाई में भारतीय महिला टीम ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद उन्होंने कप्तानी से हटने का फैसला किया. 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया.



