बांगड़ अस्पताल के 120 नर्सिंग ऑफिसर्स को 4 महीने से नहीं मिली सैलरी, ID के पेंच में अटका भुगतान

Last Updated:October 08, 2026, 12:36 IST
Pali Nursing Officers News: पाली के बांगड़ अस्पताल में राजमेस के तहत जून 2026 में नियुक्त हुए 120 नर्सिंग ऑफिसर्स को पिछले 4 महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे दिवाली के त्योहार पर उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. नर्सिंग कर्मी राशन, बच्चों की फीस और कमरे के किराए के लिए परेशान हैं. यह मामला वेंडर आईडी और एम्पलाई आईडी के प्रशासनिक पेंच में फंसा है. मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ ओपी सुथार के अनुसार बजट उपलब्ध है, लेकिन कर्मचारी वेंडर आईडी के बजाय एम्पलाई आईडी से वेतन लेने पर अड़े हैं, जिसकी मंजूरी अभी सरकार से नहीं मिली है.
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पाली. अस्पतालों में डॉक्टर को भले ही भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर दिन-रात मरीजों की जान बचाने वाले नर्सिंग कर्मी आज खुद आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे हैं. पाली जिले के सबसे बड़े बांगड़ अस्पताल में कार्यरत 120 नर्सिंग ऑफिसर्स को पिछले चार महीनों से वेतन के रूप में फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है. एक तरफ जहां पूरा देश और प्रदेश रोशनी के पर्व दीपावली की तैयारियों में जुटा हुआ है, वहीं इन 120 परिवारों के घरों में मायूसी और आर्थिक संकट का अंधेरा मंडरा रहा है. बजट उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक और तकनीकी पेंच के चलते इन कर्मचारियों की खुशियां अधर में लटकी हुई हैं.
राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी यानी राजमेस के अंतर्गत जून 2026 में पाली के बांगड़ अस्पताल में इन 120 नर्सिंग कर्मियों ने अपना कार्यभार संभाला था. जॉइनिंग के बाद से लेकर अब तक चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन इन्हें एक भी महीने का वेतन नसीब नहीं हुआ है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि मरीजों की सेवा करने वाले ये कर्मचारी अब अपने परिवार के रोजमर्रा के राशन, बच्चों की स्कूल फीस और मकान का किराया चुकाने के लिए भी मोहताज हो गए हैं. दूसरे जिलों से आकर पाली में किराए पर रह रहे कर्मियों पर दोहरी मार पड़ रही है, क्योंकि मकान मालिक किराए के लिए दबाव बना रहे हैं और स्थानीय दुकानदारों ने भी अब उधार में सामान देना बंद कर दिया है.
एम्पलाई आईडी और वेंडर आईडी के पेंच में अटकी तनख्वाहनर्सिंग ऑफिसर्स का वेतन रुकने की सबसे बड़ी वजह एम्पलाई आईडी और वेंडर आईडी के बीच फंसा प्रशासनिक पेंच है. राजमेस मुख्यालय और चिकित्सा शिक्षा विभाग जयपुर की ओर से इन कर्मचारियों का भुगतान वेंडर आईडी के माध्यम से करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, नर्सिंग कर्मियों का तर्क है कि यदि वे वेंडर आईडी से वेतन स्वीकार करते हैं, तो भविष्य में उन्हें मिलने वाली सरकारी सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ नहीं मिल पाएंगे. इसके अलावा एम्पलाई आईडी न बनने से उनकी स्थायी सेवा से जुड़ी प्रक्रियाएं भी बाधित हो जाएंगी, इसलिए वे एम्पलाई आईडी से ही भुगतान की मांग कर रहे हैं.
पीड़ित नर्सिंग कर्मियों का दर्द और मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्षअस्पताल में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर जसवंत सिंह और रूद्रप्रताप सिंह ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि चार महीने से जेब पूरी तरह खाली है और सामने दिवाली का बड़ा त्योहार खड़ा है. अपने हक की तनख्वाह के लिए वे मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है. दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर पाली मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ ओपी सुथार का कहना है कि वेतन के लिए बजट पूरी तरह से उपलब्ध है, लेकिन नर्सिंग ऑफिसर्स ने लिखित में आवेदन देकर एम्पलाई आईडी से ही वेतन लेने की मांग रखी है. राज्य सरकार के स्तर से अभी तक एम्पलाई आईडी बनाने की अनुमति नहीं मिली है और कर्मचारी वेंडर आईडी से भुगतान लेने को तैयार नहीं हैं, जिसके कारण वेतन की प्रक्रिया अटकी हुई है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
October 08, 2026, 12:36 IST



