GST Council Meet : 10 हजार से कम के मामले में नहीं जाएगा नोटिस, जीएसटी परिषद ने 12 लाख कारोबारियों को दी राहत

Last Updated:October 08, 2026, 19:52 IST
GST Council Meet : जीएसटी परिषद की बैठक में 8 अक्टूबर को सबसे बड़ा फैसला नोटिस के बारे में लिया गया. परिषद ने कहा कि अब 10 हजार रुपये से कम के मामले में जीएसटी नोटिस नहीं भेजा जाएगा और पहले अगर भेजा गया है तो उसे भी वापस ले लिया जाएगा. इस फैसले से करीब 12 लाख छोटे कारोबारियों को राहत मिल सकती है.जीएसटी परिषद ने 10 हजार से कम के मामले में नोटिस वापस लेने का फैसला किया है.
नई दिल्ली. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में 8 अक्टूबर को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में इस बार बारी थी कारोबारियों की. परिषद ने पिछले साल उपभोक्ताओं को टैक्स की दरों में राहत दी थी और इस बार कारोबारियों के हित में कई बड़े फैसले किए गए. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है जीएसटी नोटिस से जुड़ा फैसला. जीएसटी परिषद ने साफ कहा है कि अब 10 हजार से कम के मामले में कारोबारियों को नोटिस नहीं भेजा जाएगा और इस राशि से कम के जो भी नोटिस पहले भेजे जा चुके हैं, उन्हें भी वापस ले लिया जाएगा. अनुमान है कि जीएसटी परिषद के इस फैसले से करीब 12 लाख छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी.
जीएसटी काउंसिल ने अपनी बैठक में कहा है कि अगर 10 हजार रुपये से कम की जीएसटी चोरी के मामले में नोटिस नहीं जारी की जाएगी. काउंसिल ने कहा है कि कारोबारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी अब 5 करोड़ से ज्यादा का मामला होना चाहिए. अगर जीएसटी चोरी 5 करोड़ से कम है तो टैक्स अधिकारी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा क्रिमिनल केस शुरू करने के लिए भी अब मिनिमम लिमिट को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पहले यह लिमिट 1 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब 5 करोड़ से कम के मामले को सिर्फ जुर्माना भरकर सुलझाया जा सकेगा. परिषद ने जीएसटी मामलों में जुर्माने की सामान्य रकम को भी 25 हजार से घटाकर 5 हजार रुपये कर दिया है.
कब आता है जीएसटी नोटिसकेंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सेक्शन 73 में जीएसटी नोटिस भेजे जाने के कारणों का पूरा उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि जब कम या टैक्स न चुकाए जाने का मामला हो अथवा गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट वसूलने की बात हो तब नोटिस भेजा जाता है. इसके अलावा सीबीआईसी के सेक्शन 74 के तहत फ्रॉड, जानबूझकर गलत स्टेटमेंट देने अथवा फैक्ट छिपाने पर भी नोटिस भेजा जाता है. कई बार अधिकारी नोटिस जारी करने के बजाय टैक्स, ब्याज और पेनाल्टी की जानकारी देते हैं.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 08, 2026, 19:26 IST



