सिर्फ इमारतें नहीं, ट्रेनिंग भी होगी आधुनिक, पीएम-सेतु योजना से मजबूत होगा राजस्थान का स्किल इंफ्रास्ट्रक्चर

जयपुर. राजस्थान में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की दिशा में पीएम-सेतु योजना अहम भूमिका निभा सकती है. 60,000 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत देशभर की 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा. इसका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण संस्थानों की इमारतों और सुविधाओं में सुधार करना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना भी है. इस पहल से राजस्थान के युवाओं को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए बेहतर लैब, आधुनिक उपकरण, उद्योग आधारित प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगे.
साथ ही प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे. तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य में स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करने के लिए ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत लगातार बढ़ रही है. इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ प्रशिक्षण संस्थानों को भी आधुनिक तकनीक से लैस करना जरूरी हो गया है. पीएम-सेतु योजना इसी जरूरत को ध्यान में रखकर कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.
60 हजार करोड़ रुपये से तैयार होगा आधुनिक कौशल प्रशिक्षण नेटवर्क
पीएम-सेतु योजना के लिए कुल 60,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसमें केंद्र सरकार 30,000 करोड़ रुपये, राज्य सरकारें 20,000 करोड़ रुपये और उद्योग जगत 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगा. योजना के तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाया जाएगा. इनमें 200 हब और 800 स्पोक संस्थान शामिल होंगे. इस व्यवस्था के जरिए प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ अन्य संस्थानों को भी उनसे जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा. इससे कौशल प्रशिक्षण के लिए जरूरी संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी.
AI से लेकर ड्रोन टेक्नोलॉजी तक की मिलेगी ट्रेनिंग
आईटीआई के अपग्रेडेशन के साथ युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जुड़े पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 5जी नेटवर्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और कंस्ट्रक्शन ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों के 32 से अधिक नए पाठ्यक्रम शामिल हैं. इन क्षेत्रों के लिए आधुनिक उपकरणों और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की सुविधाएं विकसित करना कौशल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा होगा. इससे युवाओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय तकनीकी कार्यों का व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिल सकेगा.
प्रशिक्षकों को भी मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण
योजना के तहत पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक साझेदारियों के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य प्रशिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार करना और प्रशिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है. राजस्थान के आईटीआई प्रशिक्षकों को भी इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण पद्धतियों और नई तकनीकों का लाभ मिल सकेगा. प्रशिक्षकों की दक्षता बढ़ने से संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को भी बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी.
उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार होंगे युवा
राजस्थान में पीएम-सेतु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है. आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस आईटीआई उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कुशल कार्यबल तैयार करने में अधिक सक्षम हो सकेंगी. इससे स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ने और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं मजबूत होंगी. कुल मिलाकर, यह योजना राजस्थान में कौशल विकास के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और युवाओं को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.



