सात पहाड़ियां पार करने पर होते हैं सीम माता के दर्शन, 800 साल पुराने मंदिर में आज भी मौजूद है युद्ध में मिली तलवार

Last Updated:October 17, 2026, 18:10 IST
Seem Mata Temple: राजसमंद में देवगढ़-आमेट की सीमा पर स्थित 800 साल पुराने सीम माता मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु सात पहाड़ियां पार करते हैं. मान्यता है कि साल में एक दिन पूरी पहाड़ी सोने जैसी दिखाई देती है. मुगलकाल में ठाकुर परिवारों की रक्षा और मंदिर में मौजूद ऐतिहासिक तलवार से जुड़ी कहानी इस धाम को खास बनाती है.
राजसमंद. मेवाड़ की धरती पर कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे आस्था, इतिहास और वीरता की अनूठी कहानियां जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में से एक है राजसमंद जिले में देवगढ़ और आमेट की सीमा पर स्थित सीम माता का प्राचीन मंदिर. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सात पहाड़ियों को पार करना पड़ता है. जमीन से लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर वर्षों से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. नवरात्रि के दौरान यहां माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित सीम माता मंदिर का नाम भी अपने आप में खास है. मान्यता है कि माता पांच गांवों की सीमाओं पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें सीम माता कहा जाता है. दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित इस धाम तक पहुंचने के लिए भक्तों को कठिन रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन माता के प्रति श्रद्धा उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष में एक दिन पूरी पहाड़ी सोने जैसे रंग में दिखाई देती है. इस अनूठे दृश्य को लेकर भी श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है.
मुगलकाल में ठाकुर परिवारों की रक्षा की मान्यता
सीम माता मंदिर का संबंध मेवाड़ के इतिहास और वीरता से भी जोड़ा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मुगलकाल में जब विभिन्न रियासतों पर हमले हो रहे थे, तब ठाकुर परिवारों ने अपनी आराध्य देवी से रक्षा की प्रार्थना की थी. कहा जाता है कि माता ने कमेरी गांव के ठाकुर प्रताप सिंह चुण्डावत और उनके परिवार की युद्ध के दौरान सहायता की थी. मान्यता है कि माता ठाकुर प्रताप सिंह को साक्षात दर्शन देती थी. युद्ध के समय माता द्वारा भेंट की गई तलवार आज भी मंदिर में मौजूद है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से देखते हैं.
गुर्जर परिवार की दसवीं पीढ़ी कर रही सेवा
सीम माता मंदिर की एक खास परंपरा यह भी है कि यहां गुर्जर परिवार की दसवीं पीढ़ी माता की पूजा-अर्चना और सेवा कर रही है. मंदिर के पुजारी भगवान लाल गुर्जर ने इसके इतिहास और परंपराओं से जुड़ी जानकारी दी. पीढ़ियों से जारी यह सेवा मंदिर की धार्मिक परंपरा और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है. चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में नौ दिनों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. भक्त माता के चरणों में शीश नवाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. मेवाड़ की शक्तिपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त सीम माता का यह धाम आज भी आस्था, लोकविश्वास और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम बना हुआ है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Rajsamand,Rajasthan
First Published :
October 17, 2026, 18:10 IST



