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जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी में था मुकेश फौजी; पूर्व विधायक हत्याकांड में नई कड़ी

Last Updated:October 17, 2026, 21:08 IST

Atar Singh Bhadana Hatyakand: भरतपुर में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में मुख्य आरोपी मुकेश फौजी जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था. खदान के रास्ते को लेकर दो साल से विवाद चल रहा था और 11 अक्टूबर को भड़ाना की पीट

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Amazon Prime DayTop Deals Insideचुनाव लड़ने की तैयारी में था मुकेश फौजी; पूर्व विधायक हत्याकांड में नई कड़ीZoomअतर सिंह भड़ाना हत्याकांड : कौन है पुलिस के शिकंजे में आया मुख्य आरोपी मुकेश फौजी?

भरतपुर. जिला परिषद सदस्य बनने की तैयारी, कांग्रेस से टिकट की आस और गांव में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश. पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे मुकेश फौजी की कहानी में अब चुनावी तैयारी का पहलू भी सामने आया है. सेना में सूबेदार के पद से रिटायर हुआ मुकेश फौजी जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था. बताया जा रहा है कि उसने चुनाव के लिए पोस्टर भी छपवा लिए थे और कांग्रेस से टिकट लेने की कोशिश में था. इसी बीच भौंडा गांव में खदान दोबारा शुरू करने को लेकर विवाद फिर सामने आया और 11 अक्टूबर को अतर सिंह भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.

इस मामले में सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, खदान और वहां तक जाने वाले रास्ते का विवाद एक-दो दिन पुराना नहीं था. करीब दो साल से इसे लेकर तनाव चल रहा था. आरोप है कि मुकेश फौजी ग्रामीणों को भड़ाना के खिलाफ लामबंद कर रहा था. खदान तक जाने वाले रास्ते में खाइयां खोदकर रास्ता बंद करने की कोशिश भी की गई थी. अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि पुराने विवाद और चुनावी तैयारी के बीच क्या संबंध था.

दो साल से खदान के रास्ते को लेकर चल रहा था विवादअतर सिंह भड़ाना की हत्या के पीछे खदान तक जाने वाले रास्ते का विवाद एक अहम पहलू बताया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुकेश फौजी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से ग्रामीणों के बीच सक्रिय था. आरोप है कि उसने भड़ाना के खिलाफ लोगों को भड़काया और विरोध के लिए आंदोलन भी किए. खदान के रास्ते में खाइयां खोदकर आवाजाही रोकने की बात भी सामने आई है. यानी विवाद सिर्फ बातचीत या विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि रास्ता बंद करने जैसे कदम भी उठाए गए थे. इसी बीच रास्ते को लेकर कानूनी लड़ाई भी चली. बताया जा रहा है कि मुकेश फौजी इस विवाद में अदालत में हार चुका था. इसके बाद भी खदान दोबारा शुरू होने की आशंका को लेकर तनाव बना हुआ था. इसी पृष्ठभूमि में अतर सिंह भड़ाना खदान फिर से शुरू करवाने के लिए भौंडा गांव पहुंचे थे. आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों को उकसाया गया और 11 अक्टूबर को भड़ाना पर हमला कर दिया गया. इस हमले में उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.

चुनाव लड़ने की तैयारी में था मुकेश फौजीइस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा में है. मुकेश फौजी जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था. बताया जा रहा है कि उसने चुनावी पोस्टर भी छपवा लिए थे और कांग्रेस से टिकट लेने की कोशिश कर रहा था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या गांव में चल रहा खदान का विवाद और स्थानीय राजनीति एक-दूसरे से जुड़े हुए थे? हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि चुनावी महत्वाकांक्षा ही हत्या की वजह थी. इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच के तथ्य सामने आना जरूरी है. फिलहाल इतना सामने आया है कि खदान और रास्ते को लेकर पुराना विवाद था, मुकेश फौजी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था और खदान दोबारा शुरू होने की आशंका के बीच 11 अक्टूबर को भड़ाना की हत्या हुई. इन घटनाओं के बीच क्या कड़ी थी, यह जांच का अहम सवाल है.

सेना से रिटायरमेंट के बाद गांव की राजनीति में सक्रियमुकेश फौजी सेना में सूबेदार के पद से रिटायर हुआ था. रिटायरमेंट के बाद वह गांव के विवाद और स्थानीय गतिविधियों में सक्रिय बताया जा रहा है. जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी इसी का एक संकेत है. पोस्टर छपवाने और कांग्रेस से टिकट की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद इस मामले का राजनीतिक पहलू भी चर्चा में आ गया है. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि चुनावी तैयारी को हत्या की वजह मान लेना अभी जल्दबाजी होगी. पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हमले की योजना कैसे बनी, कौन-कौन इसमें शामिल था और घटना से पहले क्या गतिविधियां हुई थीं.

अब जांच में पुराने विवाद और हमले की कड़ियां अहम11 अक्टूबर को हुई अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में अब खदान का विवाद, रास्ते को लेकर अदालत में हुई लड़ाई और मुकेश फौजी की चुनावी तैयारी जैसे पहलू चर्चा में हैं. आरोप है कि खदान फिर शुरू होने की आशंका में ग्रामीणों को भड़काया गया और भड़ाना पर हमला हुआ. अब जांच में इन सभी कड़ियों को जोड़कर देखना होगा. क्या हमला पुराने रास्ता विवाद का नतीजा था, क्या खदान शुरू होने से किसी को नुकसान होने का डर था और क्या गांव की राजनीति का भी इसमें कोई असर था? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ होगा. फिलहाल इस हत्याकांड ने गांव के पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है. एक तरफ जिला परिषद चुनाव की तैयारी कर रहा मुकेश फौजी है, दूसरी तरफ खदान और रास्ते को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद. अब पुलिस जांच से ही सामने आएगा कि इस पूरे मामले में हत्या की असल वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या थी.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

October 17, 2026, 21:08 IST

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